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Blog / 21 Feb 2026

भारत ने पैक्स सिलिका घोषणा पर हस्ताक्षर किए

संदर्भ:

हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान भारत ने औपचारिक रूप से पैक्स सिलिका घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर किए। इसके साथ ही भारत एक ऐसे रणनीतिक समूह में शामिल हो गया है, जिसका नेतृत्व संयुक्त राज्य अमेरिका कर रहा है। इस पहल का उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों के लिए सुरक्षित, विश्वसनीय और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण करना है।

पैक्स सिलिका के बारे में:

      • पैक्स सिलिका की शुरुआत वर्ष 2025 के अंत में की गई थी। यह उन देशों का एक समूह है, जो आपसी तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आपूर्ति शृंखलाओं को अधिक सुरक्षित एवं लचीला बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसका उद्देश्य संवेदनशील तकनीकी क्षेत्रों में बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों को कम करना भी है।
      • पैक्स सिलिकानाम दो शब्दों से मिलकर बना है, ‘पैक्स’ (अर्थात शांति) और सिलिका’ (सेमीकंडक्टर निर्माण में प्रयुक्त एक मूलभूत पदार्थ)। यह नाम तकनीकी संप्रभुता, सहयोग और सुरक्षित आपूर्ति व्यवस्था के विचार को दर्शाता है।
      • यह पहल एआई अवसंरचना, सेमीकंडक्टर निर्माण, महत्वपूर्ण खनिजों और अन्य उन्नत तकनीकों के लिए भरोसेमंद एवं टिकाऊ आपूर्ति तंत्र विकसित करने पर केंद्रित है।
      • इस समूह में प्रारंभिक रूप से ऑस्ट्रेलिया, जापान, इज़राइल, दक्षिण कोरिया, यूनाइटेड किंगडम, यूएई, सिंगापुर, क़तर और ग्रीस जैसे देश शामिल थे। भारत के शामिल होने से इस गठबंधन का भू-राजनीतिक और आर्थिक दायरा और अधिक विस्तृत हो गया है।

India Signs Pax Silica Declaration

रणनीतिक महत्व:

      • चीन के साथ तकनीकी प्रतिस्पर्धा: पैक्स सिलिका को वैश्विक तकनीकी आपूर्ति शृंखलाओं में चीन के प्रभाव को संतुलित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, विशेषकर महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण, सेमीकंडक्टर निर्माण और एआई तकनीकों के क्षेत्रों में।
      • आर्थिक और सुरक्षा ढांचा: यह समझौता साझेदार देशों के बीच संयुक्त अनुसंधान, समन्वित निवेश और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती पर बल देता है। इसका उद्देश्य कच्चे माल, विनिर्माण तंत्र और एआई विकास मंचों को एकीकृत कर समन्वित तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है।
      • भरोसेमंद तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र: इस पहल का लक्ष्य समान विचारधारा वाले देशों के बीच सहयोग बढ़ाकर संवेदनशील तकनीकों के लिए संभावित विरोधी स्रोतों पर निर्भरता कम करना है, ताकि वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

भारत के घरेलू और भू-राजनीतिक हित:

      • तकनीकी आत्मनिर्भरता: पैक्स सिलिका में भारत की भागीदारी आत्मनिर्भर भारत जैसी राष्ट्रीय पहलों के अनुरूप है। साथ ही यह राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन और भारत सेमीकंडक्टर मिशन जैसे कार्यक्रमों को भी मजबूती प्रदान करती है, जिनका उद्देश्य देश की तकनीकी क्षमता और विनिर्माण ढांचे को सशक्त बनाना है।
      • प्रतिभा और नवाचार क्षमता: भारत के पास विशाल इंजीनियरिंग प्रतिभा और तेजी से विकसित हो रहा सेमीकंडक्टर डिज़ाइन तंत्र है, जो इस गठबंधन के उद्देश्यों को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
      • आपूर्ति शृंखला का विविधीकरण: इस समूह की सदस्यता से भारत को अपनी तकनीकी आपूर्ति शृंखलाओं को विविध और संतुलित बनाने का अवसर मिलेगा। इससे किसी एक देश पर निर्भरता कम होगी और भविष्य के उद्योगों के लिए आवश्यक कच्चे माल तथा तकनीकी अवसंरचना तक स्थिर पहुंच सुनिश्चित की जा सकेगी।

भू-राजनीतिक प्रभाव:

      • भारतअमेरिका रणनीतिक संबंधों को मजबूती: पैक्स सिलिका में भारत की भागीदारी से संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ उसके रणनीतिक संबंध और गहरे होंगे। इससे व्यापार, तकनीकी हस्तांतरण तथा संयुक्त अनुसंधान एवं विकास के नए अवसर उत्पन्न हो सकते हैं।
      • लोकतांत्रिक तकनीकी मानकों के साथ सामंजस्य: यह गठबंधन पारदर्शिता, नैतिक एआई उपयोग और सुरक्षित सेमीकंडक्टर मानकों पर आधारित शासन ढांचे को बढ़ावा देता है। इससे भारत उन देशों के साथ खड़ा होता है, जो वैश्विक तकनीकी शासन में लोकतांत्रिक मूल्यों और उत्तरदायित्व को प्राथमिकता देते हैं।

निष्कर्ष:

नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान पैक्स सिलिका घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर करना भारत की तकनीकी कूटनीति में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम है। यह न केवल संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य भरोसेमंद देशों के साथ सहयोग को सुदृढ़ करता है, बल्कि 21वीं सदी में सुरक्षित, लोकतांत्रिक और लचीली तकनीकी एवं आपूर्ति शृंखला संरचना के निर्माण में भारत की उभरती केंद्रीय भूमिका को भी रेखांकित करता है।