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Blog / 18 Mar 2026

भारत में सेमीकंडक्टर बाजार का तीव्र विस्तार

संदर्भ:

हाल ही में बहुराष्ट्रीय प्रोफेशनल सर्विसेज कंपनी डेलॉइट (Deloitte) द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का सेमीकंडक्टर बाजार वर्तमान में लगभग 45–50 अरब डॉलर से बढ़कर 2035 तक 300 अरब डॉलर तक पहुँच सकता है। वर्ष 2030 तक इसके लगभग 120 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है। यह दर्शाता है कि भारत वैश्विक तकनीकी क्षेत्र में तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

सेमीकंडक्टर के बारे में:

      • सेमीकंडक्टर सिलिकॉन जैसा एक पदार्थ होता है, जिसका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक चिप बनाने में किया जाता है। ये चिप आधुनिक उपकरणों का दिमागहोती हैं और मोबाइल फोन, कंप्यूटर, कारों तथा अन्य कई मशीनों में प्रयुक्त होती हैं। सेमीकंडक्टर के बिना आधुनिक तकनीक का संचालन संभव नहीं है।
      • ये उभरती तकनीकों जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इलेक्ट्रिक वाहन और डेटा सेंटर में भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी कारण सेमीकंडक्टर को आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

विकास के कारण और सरकारी पहल:

      • भारत में सेमीकंडक्टर की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिसका मुख्य कारण AI, स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहन और डिजिटल सेवाओं का विस्तार है। वैश्विक स्तर पर भी AI और डेटा सेंटर के कारण इसकी मांग निरंतर बढ़ रही है।
      • भारत सरकार ने इस क्षेत्र को विकसित करने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की हैं, जिसमें भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) की शुरुआत की गई है। इस पहल का उद्देश्य चिप डिजाइन, निर्माण और परीक्षण सहित एक मजबूत इकोसिस्टम विकसित करना है।
      • सरकार कंपनियों को चिप निर्माण इकाइयाँ स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता और प्रोत्साहन प्रदान कर रही है। ISM 2.0 के माध्यम से बड़े निवेश और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
      • वर्तमान में भारत अपनी सेमीकंडक्टर आवश्यकताओं का 90% से अधिक आयात करता है, लेकिन आने वाले वर्षों में इसमें बदलाव की संभावना है। अनुमान है कि 2035 तक भारत अपनी लगभग 60% जरूरतों का उत्पादन स्वयं कर सकेगा।

चुनौतियाँ:

      • तेजी से विकास की संभावनाओं के बावजूद इस क्षेत्र में कई चुनौतियाँ मौजूद हैं। इसमें अत्यधिक पूंजी निवेश, उन्नत तकनीक और उच्च कौशल वाले मानव संसाधन की आवश्यकता होती है।
      • भारत को ताइवान और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, कुशल जनशक्ति की कमी और आधारभूत ढांचे की सीमाएँ भी प्रमुख चुनौतियाँ हैं।

आगे की राह:

इन चुनौतियों से निपटने के लिए भारत को कौशल विकास, अनुसंधान एवं विकास (R&D) और आधुनिक आधारभूत ढांचे पर विशेष ध्यान देना होगा। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय भी आवश्यक है। भारत के पास वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनने का सुनहरा अवसर है। प्रभावी नीतियों और मजबूत क्रियान्वयन के माध्यम से भारत आयात पर निर्भरता कम कर सकता है और इस रणनीतिक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल कर सकता है।

प्रारंभिक तथ्य:

      • इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM):
      • शुरुआत: दिसंबर 2021 (केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित)
      • कुल बजट:76,000 करोड़
      • नोडल मंत्रालय: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)
      • क्रियान्वयन एजेंसी: डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन के तहत इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन