संदर्भ:
हाल ही में, भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में सतत विमानन ईंधन (Sustainable Aviation Fuel - SAF) के मिश्रण के लिए क्रमिक और संकेतात्मक लक्ष्य निर्धारित किए हैं: जनवरी 2027 से 1%, 2028 से 2% और 2030 तक 5%। इस पहल का उद्देश्य विमानन क्षेत्र से होने वाले उत्सर्जन को कम करना और स्वच्छ ईंधनों को बढ़ावा देना है।
सतत विमानन ईंधन (SAF) क्या है?
-
-
- SAF पारंपरिक जीवाश्म ईंधन आधारित विमानन टरबाइन ईंधन (Aviation Turbine Fuel - ATF) का एक वैकल्पिक ईंधन है। इसका उत्पादन टिकाऊ कच्चे माल से किया जाता है और यह अपने संपूर्ण जीवन चक्र में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम कर सकता है।
- SAF एक “ड्रॉप-इन ईंधन” (Drop-in Fuel) है। इसका अर्थ है कि इसे पारंपरिक जेट ईंधन के साथ मिलाकर उपयोग किया जा सकता है। लागू ईंधन मानकों के अधीन, इसे संगत विमान इंजनों और हवाई अड्डों की मौजूदा ईंधन अवसंरचना में बड़े बदलाव किए बिना इस्तेमाल किया जा सकता है।
- SAF पारंपरिक जीवाश्म ईंधन आधारित विमानन टरबाइन ईंधन (Aviation Turbine Fuel - ATF) का एक वैकल्पिक ईंधन है। इसका उत्पादन टिकाऊ कच्चे माल से किया जाता है और यह अपने संपूर्ण जीवन चक्र में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम कर सकता है।
-
भारत की SAF पहल की प्रमुख विशेषताएँ:
-
-
- क्रमिक लक्ष्य: 2027 में 1%, 2028 में 2% और 2030 तक 5% ईंधन मिश्रण का लक्ष्य।
- प्रारंभिक दायरा: इस पहल के शुरुआती चरण में घरेलू उड़ानों पर समान रूप से लागू करने के बजाय अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
- नियामक ढाँचा: अप्रैल 2026 में सरकार ने मिश्रण को सुविधाजनक बनाने के लिए संबंधित ATF नियामक ढाँचे के अंतर्गत SAF को मान्यता देने वाली अधिसूचना जारी की।
- घरेलू उत्पादन: इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियाँ प्रयुक्त खाना पकाने के तेल सहित विभिन्न स्रोतों से SAF उत्पादन की तकनीकों पर काम कर रही हैं।
- क्रमिक लक्ष्य: 2027 में 1%, 2028 में 2% और 2030 तक 5% ईंधन मिश्रण का लक्ष्य।
-
कच्चे माल के स्रोत और उत्पादन:
-
-
- SAF का उत्पादन प्रयुक्त खाना पकाने के तेल (Used Cooking Oil - UCO), अपशिष्ट वसा, कृषि अवशेषों, नगरपालिका एवं औद्योगिक कचरे तथा अल्कोहल-टू-जेट (Alcohol-to-Jet - ATJ) तकनीक के माध्यम से किया जा सकता है। इसका सतत उत्पादन कच्चे माल की उपलब्धता, रूपांतरण तकनीक और संपूर्ण जीवन चक्र में होने वाले उत्सर्जन पर निर्भर करता है।
- अपशिष्ट पदार्थों का उपयोग जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) के उद्देश्यों को भी बढ़ावा दे सकता है। हालाँकि, पर्यावरणीय नुकसान को रोकने के लिए कच्चे माल की स्थिरता और उसकी आपूर्ति की पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक है।
- SAF का उत्पादन प्रयुक्त खाना पकाने के तेल (Used Cooking Oil - UCO), अपशिष्ट वसा, कृषि अवशेषों, नगरपालिका एवं औद्योगिक कचरे तथा अल्कोहल-टू-जेट (Alcohol-to-Jet - ATJ) तकनीक के माध्यम से किया जा सकता है। इसका सतत उत्पादन कच्चे माल की उपलब्धता, रूपांतरण तकनीक और संपूर्ण जीवन चक्र में होने वाले उत्सर्जन पर निर्भर करता है।
-
SAF मिश्रण का महत्त्व:
-
-
- पर्यावरणीय लाभ: कुछ उत्पादन तकनीकों में SAF पारंपरिक ईंधन की तुलना में संपूर्ण जीवन चक्र के दौरान ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को 80% तक कम कर सकता है। यह विमानन क्षेत्र को कार्बन उत्सर्जन से मुक्त करने में मदद कर सकता है, क्योंकि इस क्षेत्र में विद्युत ऊर्जा का उपयोग करना कठिन है।
- अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताएँ: अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) द्वारा विकसित अंतरराष्ट्रीय विमानन के लिए कार्बन ऑफसेटिंग और न्यूनीकरण योजना (Carbon Offsetting and Reduction Scheme for International Aviation - CORSIA) एक वैश्विक बाजार-आधारित व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय विमानन से होने वाले CO₂ उत्सर्जन को नियंत्रित करना है। इसके नियमों के अंतर्गत पात्र SAF विमानन कंपनियों के उत्सर्जन में कमी लाने के प्रयासों में योगदान दे सकता है।
- ऊर्जा सुरक्षा: घरेलू स्तर पर SAF का उत्पादन भारत के विमानन ईंधन स्रोतों में विविधता ला सकता है और जीवाश्म ईंधनों की कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति निर्भरता कम कर सकता है।
- आर्थिक अवसर: SAF से अपशिष्ट प्रबंधन, जैव-शोधन, कृषि अवशेषों के उपयोग, अनुसंधान और हरित ऊर्जा में निवेश के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
- पर्यावरणीय लाभ: कुछ उत्पादन तकनीकों में SAF पारंपरिक ईंधन की तुलना में संपूर्ण जीवन चक्र के दौरान ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को 80% तक कम कर सकता है। यह विमानन क्षेत्र को कार्बन उत्सर्जन से मुक्त करने में मदद कर सकता है, क्योंकि इस क्षेत्र में विद्युत ऊर्जा का उपयोग करना कठिन है।
-
चुनौतियाँ:
प्रमुख चुनौतियों में पारंपरिक ATF की तुलना में SAF की अधिक लागत, व्यावसायिक स्तर पर सीमित उत्पादन, अपशिष्ट कच्चे माल के संग्रह की अपर्याप्त व्यवस्था, प्रमाणन संबंधी आवश्यकताएँ और आपूर्ति शृंखला में निवेश की जरूरत शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, यदि कच्चे माल का उत्पादन उचित तरीके से नहीं किया जाता है, तो इससे भूमि, जल और खाद्य फसलों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।
आगे की राह:
भारत को अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना चाहिए, सतत घरेलू उत्पादन के लिए प्रोत्साहन देना चाहिए, विश्वसनीय प्रमाणन और निगरानी प्रणालियाँ स्थापित करनी चाहिए तथा ईंधन उत्पादकों, विमानन कंपनियों और नियामक संस्थाओं के बीच सहयोग मजबूत करना चाहिए। उत्सर्जन में कमी और ईंधन की किफायती उपलब्धता के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए चरणबद्ध दृष्टिकोण अपनाया जा सकता है, जिससे विमानन कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मकता भी बनी रहे।
निष्कर्ष:
भारत की SAF पहल स्वच्छ विमानन, बेहतर ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु संबंधी लक्ष्यों की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। इसकी सफलता किफायती उत्पादन, टिकाऊ कच्चे माल, प्रभावी नियमन और उत्सर्जन की विश्वसनीय गणना पर निर्भर करेगी।

