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Blog / 17 Sep 2026

भारत ने पाकिस्तान–चीन सीमा संयुक्त आयोग को खारिज किया

संदर्भ:

हाल ही में भारत ने इस्लामाबाद में हुई पाकिस्तानचीन सीमा संयुक्त आयोग की पहली बैठक पर आपत्ति जताई। भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत द्वारा दावा किए गए क्षेत्रों से संबंधित किसी भी व्यवस्था को तय करने का अधिकार भारत की सहमति के बिना पाकिस्तान और चीन के बीच किसी तंत्र को नहीं दिया जा सकता। नई दिल्ली ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न अंग हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:

      • भारतपाकिस्तानचीन के बीच क्षेत्रीय विवादों की पृष्ठभूमि 1947 के विभाजन, ब्रिटिश काल की सीमा व्यवस्थाओं और स्वतंत्रता के बाद विकसित क्षेत्रीय दावों में निहित है। स्वतंत्रता के बाद जम्मू-कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच प्रमुख विवाद का केंद्र बना।
      • 1963 में पाकिस्तान और चीन ने एक सीमा समझौता किया, जिसमें ट्रांस-काराकोरम ट्रैक्ट और शक्सगाम घाटी से संबंधित प्रावधान शामिल थे। भारत ने इस समझौते को स्वीकार नहीं किया और उसका तर्क रहा है कि पाकिस्तान ऐसे क्षेत्र से संबंधित समझौता नहीं कर सकता, जिस पर भारत अपना संप्रभु दावा करता है।
      • दूसरी ओर, पाकिस्तान इस क्षेत्र पर अपने प्रशासन और दावों के आधार पर अलग दृष्टिकोण रखता है, जबकि चीन ने पाकिस्तान के साथ हुए समझौते को अपने सीमा संबंधों के संदर्भ में मान्यता दी है। इसलिए यह विवाद केवल दो देशों के बीच सीमा निर्धारण का प्रश्न नहीं, बल्कि तीन देशों के परस्पर दावों और सुरक्षा हितों से जुड़ा विषय है।

भारत का पक्ष:

भारत की आधिकारिक स्थिति के अनुसार:

      • 1963 का चीनपाकिस्तान सीमा समझौता भारत को स्वीकार्य नहीं है।
      • भारत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे क्षेत्र पर अपनी संप्रभुता का दावा करता है।
      • भारत का मत है कि किसी तीसरे देश द्वारा भारत के दावे वाले क्षेत्र के संबंध में किया गया समझौता भारत के अधिकारों या दावों को प्रभावित नहीं कर सकता।
      • भारत चीनपाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) पर भी आपत्ति जताता है, क्योंकि इसका एक हिस्सा ऐसे क्षेत्रों से होकर गुजरता है, जिन पर भारत अपना दावा करता है।

रणनीतिक महत्व:

      • चीनपाकिस्तान सहयोग: चीन और पाकिस्तान के बीच रक्षा, व्यापार, बुनियादी ढाँचे और कनेक्टिविटी के क्षेत्रों में व्यापक सहयोग है। सीमा संबंधी सहयोग का संस्थागत रूप से विस्तार इस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत कर सकता है। भारत के लिए इसका महत्व इसलिए भी है क्योंकि चीन और पाकिस्तान दोनों के साथ भारत के अलग-अलग सीमा विवाद हैं।
      • दो-मोर्चे की सुरक्षा चुनौती: भारत को पाकिस्तान के साथ नियंत्रण रेखा (LoC) और चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर अलग-अलग सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। दोनों मोर्चों पर तनाव की स्थिति भारत के लिए सैन्य और कूटनीतिक संसाधनों के प्रबंधन को जटिल बना सकती है।
      • CPEC और भू-राजनीति: चीनपाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत इसकी कुछ परियोजनाओं पर इसलिए आपत्ति जताता है क्योंकि उनका मार्ग उन क्षेत्रों से होकर गुजरता है, जिन पर भारत अपना दावा करता है।

भारत के सामने प्रमुख चुनौतियाँ:

      • लंबे समय से चले आ रहे और अनसुलझे क्षेत्रीय विवाद
      • सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य एवं बुनियादी ढाँचे का विकास
      • चीन और पाकिस्तान के बीच बढ़ता रणनीतिक सहयोग
      • सीमा पर तनाव और गलत आकलन की संभावना
      • कठिन हिमालयी भू-भाग और उससे जुड़ी सीमा-प्रबंधन चुनौतियाँ
      • सुरक्षा हितों के साथ आर्थिक और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के हितों में संतुलन

आगे की राह:

भारत के लिए एक संतुलित रणनीति में कूटनीतिक संवाद और सुरक्षा तैयारियों दोनों को महत्व देना आवश्यक होगा। सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचे, निगरानी और लॉजिस्टिक क्षमताओं को मजबूत करना आवश्यक है ताकि सीमा प्रबंधन प्रभावी बना रहे। भारत को अपनी वैकल्पिक कनेक्टिविटी पहलों को आगे बढ़ाना चाहिए। ऐसी परियोजनाएँ संप्रभुता, पारदर्शिता, आर्थिक व्यवहार्यता और संबंधित देशों के साथ परामर्श के सिद्धांतों पर आधारित हो सकती हैं।

निष्कर्ष:

पाकिस्तानचीन सीमा संयुक्त आयोग भारत, पाकिस्तान और चीन के बीच मौजूद जटिल क्षेत्रीय और रणनीतिक संबंधों को सामने लाता है। भारत की आपत्ति मुख्यतः इस सिद्धांत पर आधारित है कि भारत के दावे वाले क्षेत्रों से संबंधित कोई भी व्यवस्था उसकी सहमति के बिना उसके अधिकारों को प्रभावित नहीं कर सकती। भारत के लिए चुनौती यह है कि वह अपनी संप्रभुता और सुरक्षा हितों की रक्षा करते हुए क्षेत्रीय स्थिरता और कूटनीतिक संवाद के लिए पर्याप्त स्थान बनाए रखे। यही दृष्टिकोण सीमा विवादों को नियंत्रित करने और व्यापक क्षेत्रीय शांति के लिए अधिक टिकाऊ आधार प्रदान कर सकता है।

 

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