संदर्भ:
हाल ही में, भारत ने पाकिस्तान के राष्ट्रीय विरासत एवं संस्कृति मंत्री औरंगजेब खान खिची को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के पहले सभ्यतागत संवाद मंच में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है। यह मंच 20–22 नवंबर 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित किया जाना निर्धारित है। मई 2025 में पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद हुए सैन्य टकराव के कारण भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव बना हुआ है। ऐसे में यह आमंत्रण एक महत्त्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम है।
सभ्यतागत संवाद मंच के बारे में:
इस पहल का प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर 2025 में चीन के तियानजिन में आयोजित SCO शिखर सम्मेलन के दौरान दिया था, जिसके बाद इसे संगठन द्वारा अपनाया गया। इस मंच का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक समझ, साझा विरासत, सभ्यतागत संबंधों और जन-से-जन संपर्क को बढ़ावा देना है। इसमें SCO के सदस्य देशों और साझेदार देशों के प्रतिनिधियों के भाग लेने की उम्मीद है।
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) क्या है?
SCO एक यूरेशियाई क्षेत्रीय संगठन है, जिसकी स्थापना वर्ष 2001 में क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग तथा राजनीतिक एवं सांस्कृतिक सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए की गई थी। इसके वर्तमान 10 सदस्य देश चीन, भारत, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और बेलारूस हैं। इसके सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में आतंकवाद-रोधी कार्रवाई, संपर्क व्यवस्था, व्यापार, ऊर्जा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान शामिल हैं।
भारत के लिए महत्त्व:
यह आमंत्रण दर्शाता है कि पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय संबंध सीमित होने के बावजूद भारत बहुपक्षीय कूटनीति में अपनी भागीदारी जारी रखे हुए है। यह मंच सांस्कृतिक कूटनीति को मजबूत करने, साझा सभ्यतागत विरासत को बढ़ावा देने और क्षेत्रीय संस्थानों के माध्यम से संवाद बनाए रखने का अवसर प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त, यह भारत को मध्य एशियाई देशों और अन्य यूरेशियाई साझेदारों के साथ साझा हितों के मुद्दों पर सहयोग करने का अवसर भी देता है।
भारत-पाकिस्तान संबंधों में चुनौतियाँ:
सीमा पार आतंकवाद, सुरक्षा संबंधी चिंताओं और सार्थक संवाद के निलंबन के कारण दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं। SCO के किसी कार्यक्रम में भागीदारी का अर्थ यह नहीं है कि द्विपक्षीय संबंधों में कोई बड़ी सफलता मिल गई है। इसलिए, भारत को अपनी सुरक्षा प्राथमिकताओं और आतंकवाद के संबंध में अपने घोषित रुख के साथ बहुपक्षीय सहभागिता के बीच संतुलन बनाए रखना होगा। इस मंच में पाकिस्तान की भागीदारी की भी अभी पुष्टि नहीं हुई है।
आगे की राह:
भारत को SCO जैसे बहुपक्षीय मंचों का उपयोग सांस्कृतिक आदान-प्रदान, क्षेत्रीय संपर्क व्यवस्था और साझा चुनौतियों पर सहयोग को बढ़ावा देने के लिए करना चाहिए। रचनात्मक सहभागिता को राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के अनुरूप बनाए रखना आवश्यक है। सांस्कृतिक कूटनीति, शैक्षणिक आदान-प्रदान और जन-से-जन संपर्क औपचारिक कूटनीति को पूरक बना सकते हैं। हालाँकि, द्विपक्षीय संबंधों में स्थायी सुधार के लिए लंबित सुरक्षा और राजनीतिक मुद्दों का समाधान आवश्यक होगा।
निष्कर्ष:
SCO सभ्यतागत संवाद मंच के लिए पाकिस्तान को भारत का आमंत्रण दर्शाता है कि द्विपक्षीय तनावों के बीच सीमित सहभागिता बनाए रखने में बहुपक्षीय संस्थाएँ महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। सांस्कृतिक कूटनीति आपसी समझ के नए अवसर पैदा कर सकती है, लेकिन क्षेत्रीय स्थिरता के लिए निरंतर सहयोग, संप्रभुता के प्रति सम्मान और आतंकवाद के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है।

