चर्चा में क्यों?
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑकलैंड यात्रा के दौरान भारत और न्यूज़ीलैंड ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को सामरिक साझेदारी (Strategic Partnership) के स्तर तक उन्नत किया तथा 10 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए। दोनों देशों ने राजनीतिक, रक्षा, आर्थिक, तकनीकी तथा जन-से-जन सहयोग को दिशा देने के लिए रोडमैप 2030 को अपनाया। साथ ही, दोनों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय वस्तुओं एवं सेवाओं के व्यापार को 7 अरब न्यूज़ीलैंड डॉलर तक दोगुना करने पर सहमति व्यक्त की।
भारत–न्यूज़ीलैंड संबंधों की पृष्ठभूमि:
भारत और न्यूज़ीलैंड ने 1952 में राजनयिक संबंध स्थापित किए तथा दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों, विधि के शासन (Rule of Law) और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति समान प्रतिबद्धता साझा करते हैं।
यह संबंध निम्नलिखित आधारों से समर्थित है:
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- लगभग 2.9 लाख भारतीय मूल के लोग न्यूज़ीलैंड में रहते हैं (जो न्यूज़ीलैंड की कुल जनसंख्या का लगभग 6% हैं)।
- शिक्षा, संस्कृति और खेल के क्षेत्र में आदान-प्रदान।
- व्यापार, कृषि तथा बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग।
- यह सामरिक साझेदारी सुरक्षा, अर्थव्यवस्था तथा क्षेत्रीय मामलों में अधिक गहन सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन का प्रतीक है।
- लगभग 2.9 लाख भारतीय मूल के लोग न्यूज़ीलैंड में रहते हैं (जो न्यूज़ीलैंड की कुल जनसंख्या का लगभग 6% हैं)।
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भारत–न्यूज़ीलैंड साझेदारी के प्रमुख परिणाम:
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- सामरिक साझेदारी रोडमैप 2030: व्यापार, निवेश, रक्षा, प्रौद्योगिकी, कृषि, शिक्षा, संस्कृति तथा समुद्री सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए दोनों देशों ने सामरिक साझेदारी रोडमैप 2030 को स्वीकृति दी।
- व्यापार एवं निवेश: मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के माध्यम से वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। न्यूज़ीलैंड ने भारत में 20 अरब डॉलर के निवेश की योजना की भी घोषणा की है।
- रक्षा एवं समुद्री सुरक्षा: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए हिंद-प्रशांत महासागर पहल (IPOI) के अंतर्गत सहयोग बढ़ाया जाएगा। नौसैनिक अभ्यास, सैन्य आदान-प्रदान, रक्षा संवाद, हाइड्रोग्राफी, लॉजिस्टिक सहयोग तथा समुद्री अभियानों में साझेदारी को प्रोत्साहित किया जाएगा।
- आतंकवाद, साइबर सुरक्षा एवं वैश्विक सहयोग: आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्य समूह को सक्रिय किया जाएगा, साइबर सुरक्षा सहयोग को मजबूत किया जाएगा तथा अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद एवं संगठित अपराध के विरुद्ध संयुक्त प्रयास किए जाएंगे। न्यूज़ीलैंड ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता की आकांक्षा का समर्थन भी दोहराया।
- स्वच्छ ऊर्जा एवं वैश्विक दृष्टिकोण: दोनों देश कम कार्बन उत्सर्जन, स्वच्छ ऊर्जा, सतत ऊर्जा संक्रमण तथा जैव-ईंधन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाएंगे। साथ ही, स्वतंत्र, खुले एवं शांतिपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र, संयुक्त राष्ट्र सुधार तथा आतंकवाद-रोधी प्रयासों जैसे वैश्विक मुद्दों पर सहयोग को और सुदृढ़ करेंगे।
- सामरिक साझेदारी रोडमैप 2030: व्यापार, निवेश, रक्षा, प्रौद्योगिकी, कृषि, शिक्षा, संस्कृति तथा समुद्री सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए दोनों देशों ने सामरिक साझेदारी रोडमैप 2030 को स्वीकृति दी।
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महत्त्व:
यह सामरिक साझेदारी प्रशांत क्षेत्र में भारत की भागीदारी को सुदृढ़ करती है तथा स्वतंत्र, खुले और स्थिर हिंद-प्रशांत क्षेत्र का समर्थन करती है। इससे व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और नवाचार के नए अवसर उत्पन्न होंगे। न्यूज़ीलैंड के साथ सहयोग भारत के आर्थिक विकास लक्ष्यों, विशेषकर विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण को प्राप्त करने में सहायक होगा, साथ ही समुद्री सुरक्षा और वैश्विक मंचों पर सहयोग को भी मजबूत करेगा।
चुनौतियाँ:
इस साझेदारी के समक्ष चीन और क्षेत्रीय सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर दोनों देशों के दृष्टिकोण में अंतर, सीमित व्यापार, कृषि बाज़ार तक पहुँच से जुड़ी चिंताएँ तथा भौगोलिक दूरी जैसी चुनौतियाँ मौजूद हैं। रोडमैप 2030 के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए समझौतों का प्रभावी क्रियान्वयन तथा बेहतर संपर्क व्यवस्था अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।
निष्कर्ष:
भारत–न्यूज़ीलैंड सामरिक साझेदारी द्विपक्षीय संबंधों के एक नए चरण का प्रतीक है, जिसमें रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार किया गया है। यदि रोडमैप 2030 का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया जाता है, तो यह दोनों देशों की साझा समृद्धि को बढ़ावा देगा तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

