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Blog / 27 Mar 2026

भारत के नए जलवायु लक्ष्य 2035: अद्यतन NDC, नेट ज़ीरो और प्रमुख चुनौतियाँ

भारत के नए जलवायु लक्ष्य 2035

सन्दर्भ:

हाल ही में भारत सरकार ने वर्ष 2031-2035 की अवधि के लिए अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (Nationally Determined Contributions - NDC) के अपडेट को मंजूरी दी है। यह कदम पेरिस समझौते के तहत भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को और मजबूत करता है और 2070 तक 'नेट-जीरो' उत्सर्जन प्राप्त करने के विजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

प्रमुख अद्यतन लक्ष्य (2035 तक):

भारत के संशोधित NDC में तीन मुख्य स्तंभों पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जो देश की ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाते हैं:

      • गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता: भारत ने 2035 तक उसकी कुल स्थापित विद्युत क्षमता का 60% हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों (सौर, पवन, जलविद्युत, परमाणु और जैव-ऊर्जा) से लेने का लक्ष्य रखा है। यह 2030 के पिछले 50% के लक्ष्य से एक महत्वपूर्ण बढ़त है। विशेष बात यह है कि भारत ने 2030 का अपना पिछला लक्ष्य पांच साल पहले ही (2025 में) हासिल कर लिया था।
      • उत्सर्जन तीव्रता में कटौती: भारत ने वर्ष 2005 के स्तर की तुलना में अपनी जीडीपी की उत्सर्जन तीव्रता (Emissions Intensity) को 47% तक कम करने का संकल्प लिया है। यह दर्शाता है कि भारत अपनी आर्थिक वृद्धि को कार्बन उत्सर्जन से अलग (Decoupling) करने में वैश्विक स्तर पर अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
      • कार्बन सिंक का विस्तार: वन और वृक्षों के आवरण के माध्यम से अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाने के लक्ष्य को बढ़ाकर 3.5 से 4 बिलियन टन CO2 समकक्ष कर दिया गया है। यह पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली और व्यापक वनीकरण पर भारत के बढ़ते जोर को रेखांकित करता है।

India’s New Climate Targets 2035

कार्यान्वयन के लिए प्रमुख सरकारी पहलें:

इन महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सरकार ने कई मिशन मोड परियोजनाएं शुरू की हैं:

      • पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना: इसका उद्देश्य 1 करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर पैनल स्थापित करना है।
      • राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन: भारत को ग्रीन हाइड्रोजन का वैश्विक केंद्र बनाना।
      • ऊर्जा भंडारण मिशन: सौर और पवन ऊर्जा की अनिरंतरता को दूर करने के लिए बैटरी स्टोरेज और पंप हाइड्रो प्रोजेक्ट्स पर ध्यान।
      • परमाणु ऊर्जा का विस्तार: स्वच्छ ऊर्जा के स्थिर 'बेस लोड' के लिए परमाणु क्षमता में वृद्धि।:

चुनौतियां:

      • उत्पादन बनाम क्षमता का अंतर: भारत की गैर-जीवाश्म क्षमता का लक्ष्य बढाकर 60%  किया गया है लेकिन वास्तविक विद्युत उत्पादन में अब भी कोयले की हिस्सेदारी 70-75% है। अक्षय ऊर्जा (सौर/पवन) हमेशा उपलब्ध नहीं होती, जिससे 'बेस लोड' के लिए कोयले पर निर्भरता बनी रहती है।
      • ग्रिड स्थिरता और भंडारण: अक्षय ऊर्जा की अनिरंतरता (Intermittency) के कारण ग्रिड को संभालना मुश्किल होता है। इसके लिए बड़े पैमाने पर बैटरी स्टोरेज (BESS) और पंप हाइड्रो प्रोजेक्ट्स की जरूरत है, जो वर्तमान में काफी महंगे हैं।
      • वित्तीय बाधाएं: 2035 के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए भारी निवेश की आवश्यकता होगी। विकसित देशों से मिलने वाला 'क्लाइमेट फाइनेंस' अभी भी उम्मीद से बहुत कम है।

निष्कर्ष:

भारत द्वारा UNFCCC के लिए नए लक्ष्य न केवल जलवायु न्याय के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं, बल्कि "विकसित भारत @2047" के सपने को 'हरित विकास' के साथ जोड़ते हैं। एक विकासशील देश होने के बावजूद, भारत का यह कदम विकसित देशों पर अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारियों को निभाने और विकासशील देशों को 'क्लाइमेट फाइनेंस' प्रदान करने के लिए दबाव बढ़ाएगा।