चर्चा में क्यों?
हाल ही में जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची 1 से 3 जुलाई 2026 तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर रही। इस दौरान भारत–जापान 16वाँ वार्षिक शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ। दोनों देशों के नेताओं ने "साझा विकास, समृद्धि और लचीलापन के लिए रणनीतिक अभिसरण और विश्वास" (Strategic Convergence and Trust for Shared Growth, Prosperity and Resilience) की साझा दृष्टि को अपनाते हुए भारत–जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी (Special Strategic and Global Partnership) को और मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की।
शिखर सम्मेलन के प्रमुख परिणाम:
1. रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग
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- 2+2 मंत्रिस्तरीय संवाद व्यवस्था को और सशक्त बनाने पर सहमति।
- JIMEX, मालाबार और धर्म गार्जियन जैसे संयुक्त नौसैनिक एवं सैन्य अभ्यासों का विस्तार।
- UNICORN प्रणाली परियोजना सहित रक्षा प्रौद्योगिकी सहयोग में प्रगति।
- समुद्री क्षेत्र जागरूकता (Maritime Domain Awareness) तथा लॉजिस्टिक सहयोग को बढ़ावा।
- 2+2 मंत्रिस्तरीय संवाद व्यवस्था को और सशक्त बनाने पर सहमति।
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उद्देश्य: हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना।
2. आर्थिक एवं आर्थिक सुरक्षा सहयोग
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- भारत–जापान आर्थिक सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा (Joint Declaration on Economic Security Cooperation) को अपनाया गया।
- सेमीकंडक्टर, महत्त्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals), सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT), औषधि उद्योग तथा स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर।
- वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं (Global Supply Chains) को अधिक लचीला एवं विविधतापूर्ण बनाने की प्रतिबद्धता।
- व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) की समीक्षा एवं विस्तार पर सहमति।
- भारत–जापान आर्थिक सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा (Joint Declaration on Economic Security Cooperation) को अपनाया गया।
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मुख्य उद्देश्य: रणनीतिक आर्थिक लचीलापन (Strategic Economic Resilience) को बढ़ावा देना।
3. व्यापार, निवेश एवं अवसंरचना
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- 10 ट्रिलियन येन निवेश लक्ष्य की दिशा में प्रगति।
- भारत में जापानी औद्योगिक टाउनशिप (Japanese Industrial Townships) का विस्तार।
- मेट्रो रेल, समर्पित माल गलियारे (Freight Corridors) और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में सहयोग।
- मुंबई–अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना को जापान का निरंतर समर्थन।
- 10 ट्रिलियन येन निवेश लक्ष्य की दिशा में प्रगति।
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उद्देश्य: भारत के औद्योगिक एवं संपर्क (Connectivity) ढाँचे को सुदृढ़ बनाना।
4. प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एवं नवाचार
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- भारत–जापान AI रणनीतिक संवाद (AI Strategic Dialogue) की शुरुआत।
- क्वांटम प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष क्षेत्र (LUPEX मिशन) तथा डिजिटल अवसंरचना में सहयोग।
- हिरोशिमा AI प्रक्रिया (Hiroshima AI Process) तथा जिम्मेदार AI शासन (Responsible AI Governance) के सिद्धांतों के अनुरूप सहयोग।
- भारत–जापान AI रणनीतिक संवाद (AI Strategic Dialogue) की शुरुआत।
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मुख्य उद्देश्य: सुरक्षित, विश्वसनीय एवं भरोसेमंद प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण।
5. ऊर्जा एवं जलवायु सहयोग
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- हाइड्रोजन, अमोनिया, सौर ऊर्जा एवं बायोगैस परियोजनाओं में सहयोग का विस्तार।
- ऊर्जा सुरक्षा तथा रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserves) पर संयुक्त प्रयास।
- स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन (Clean Energy Transition) एवं आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती को बढ़ावा।
- हाइड्रोजन, अमोनिया, सौर ऊर्जा एवं बायोगैस परियोजनाओं में सहयोग का विस्तार।
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6. वैश्विक एवं क्षेत्रीय सहयोग
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- मुक्त एवं खुला हिंद-प्रशांत (Free and Open Indo-Pacific – FOIP) के प्रति साझा प्रतिबद्धता।
- क्वाड (Quad) ढाँचे के अंतर्गत सहयोग को मजबूत करना।
- दक्षिण चीन सागर एवं पूर्वी चीन सागर में समुद्री सुरक्षा को लेकर साझा चिंता व्यक्त की।
- G4 समूह के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार एवं वैश्विक शासन सुधारों पर समन्वय।
- मुक्त एवं खुला हिंद-प्रशांत (Free and Open Indo-Pacific – FOIP) के प्रति साझा प्रतिबद्धता।
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भारत–जापान संबंध:
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- भारत और जापान के संबंध एशिया की सबसे स्थिर, विश्वसनीय और दूरदर्शी साझेदारियों में से एक माने जाते हैं। इन्हें अक्सर "हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सबसे स्वाभाविक रणनीतिक साझेदारी" कहा जाता है। यह संबंध लोकतांत्रिक मूल्यों, विधि के शासन (Rule of Law) तथा मुक्त एवं खुले हिंद-प्रशांत (FOIP) की साझा अवधारणा पर आधारित हैं।
- ऐतिहासिक रूप से दोनों देशों के संबंधों की शुरुआत बौद्ध धर्म के माध्यम से प्राचीन सांस्कृतिक संपर्कों से हुई। आधुनिक काल में यह संबंध 1952 की शांति संधि, 2000 की वैश्विक साझेदारी (Global Partnership) तथा 2014 की विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी (Special Strategic and Global Partnership) जैसे महत्वपूर्ण पड़ावों से गुजरते हुए निरंतर मजबूत हुए हैं। वार्षिक शिखर सम्मेलनों ने इन संबंधों को और गहराई प्रदान की है।
- दोनों देशों के बीच रक्षा, अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी और अवसंरचना जैसे अनेक क्षेत्रों में व्यापक सहयोग है। भारत और जापान JIMEX तथा Malabar जैसे संयुक्त सैन्य अभ्यासों में भाग लेते हैं तथा रक्षा प्रौद्योगिकी एवं समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में भी मिलकर कार्य कर रहे हैं।
- जापान भारत के प्रमुख निवेशकों में से एक है और मुंबई–अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल, मेट्रो रेल परियोजनाओं तथा अन्य आधारभूत संरचना परियोजनाओं में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वर्तमान में सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), स्वच्छ ऊर्जा तथा महत्त्वपूर्ण खनिज जैसे नए क्षेत्रों में भी सहयोग तेजी से बढ़ रहा है।
- इसके अतिरिक्त दोनों देश क्वाड, संयुक्त राष्ट्र सुधार तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय पहलों में भी घनिष्ठ सहयोग कर रहे हैं।
- यद्यपि व्यापारिक बाधाएँ तथा कुछ अवसंरचना परियोजनाओं में विलंब जैसी चुनौतियाँ मौजूद हैं, फिर भी रणनीतिक विश्वास, साझा हितों तथा क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति समान दृष्टिकोण के कारण भारत–जापान साझेदारी निरंतर सुदृढ़ होती जा रही है।
- भारत और जापान के संबंध एशिया की सबसे स्थिर, विश्वसनीय और दूरदर्शी साझेदारियों में से एक माने जाते हैं। इन्हें अक्सर "हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सबसे स्वाभाविक रणनीतिक साझेदारी" कहा जाता है। यह संबंध लोकतांत्रिक मूल्यों, विधि के शासन (Rule of Law) तथा मुक्त एवं खुले हिंद-प्रशांत (FOIP) की साझा अवधारणा पर आधारित हैं।
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निष्कर्ष:
भारत–जापान 16वाँ वार्षिक शिखर सम्मेलन इस बात का संकेत है कि दोनों देशों के संबंध अब केवल विकास सहयोग तक सीमित नहीं रहे, बल्कि वे भविष्य-केंद्रित रणनीतिक गठबंधन का स्वरूप ग्रहण कर चुके हैं। रक्षा, प्रौद्योगिकी, अवसंरचना, ऊर्जा तथा हिंद-प्रशांत सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग भारत और जापान को नियम-आधारित, स्थिर एवं बहुध्रुवीय क्षेत्रीय व्यवस्था के प्रमुख निर्माता के रूप में स्थापित कर रहा है।

