संदर्भ:
हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री ने इंडोनेशिया की राजकीय यात्रा की, जिसके दौरान दोनों देशों ने अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership - CSP) को और गहरा करने के लिए एक संयुक्त वक्तव्य अपनाया।
भारत–इंडोनेशिया द्विपक्षीय संबंध:
भारत और इंडोनेशिया के बीच 2018 में स्थापित व्यापक रणनीतिक साझेदारी है, जो सदियों पुराने सभ्यतागत, सांस्कृतिक और समुद्री संबंधों पर आधारित है। यह संबंध राजनीतिक संवाद, रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश, डिजिटल अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, अंतरिक्ष, शिक्षा, संस्कृति और क्षेत्रीय सहयोग जैसे क्षेत्रों को शामिल करता है।
भारत–इंडोनेशिया शिखर सम्मेलन के प्रमुख परिणाम
राजनीतिक और रणनीतिक सहयोग:
दोनों देशों ने नियमित शिखर बैठकों को संस्थागत रूप देने और संयुक्त आयोग बैठक (Joint Commission Meeting), विदेश कार्यालय परामर्श (Foreign Office Consultations) तथा संसदीय आदान-प्रदान जैसे मौजूदा तंत्रों को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की।
बेहतर रणनीतिक समन्वय के लिए थिंक टैंक, शैक्षणिक संस्थानों और नीति विशेषज्ञों के बीच सहयोग को भी बढ़ाया जाएगा।
रक्षा और समुद्री सुरक्षा:
भारत और इंडोनेशिया ने निम्नलिखित क्षेत्रों में रक्षा सहयोग का विस्तार किया:
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- ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली
- हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें
- संयुक्त सैन्य अभ्यास
- रक्षा प्रौद्योगिकी सहयोग
- जल सर्वेक्षण (Hydrography) और समुद्री क्षेत्र जागरूकता (Maritime Domain Awareness - MDA)
- ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली
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इंडोनेशिया भारत के गुरुग्राम स्थित IFC-IOR (Information Fusion Centre – Indian Ocean Region) में एक अंतरराष्ट्रीय संपर्क अधिकारी तैनात करेगा, जिससे समुद्री सूचना साझाकरण और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
आतंकवाद-रोधी और साइबर सुरक्षा सहयोग:
दोनों देशों ने आतंकवाद के प्रति शून्य-सहिष्णुता (Zero Tolerance) का दृष्टिकोण अपनाया और आतंकवाद के वित्तपोषण, हिंसक उग्रवाद तथा ऑनलाइन कट्टरपंथ के खिलाफ सहयोग करने पर सहमति जताई।
साइबर सहयोग में डिजिटल फोरेंसिक, CERT सहयोग और महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
व्यापार, निवेश और महत्वपूर्ण खनिज:
भारत और इंडोनेशिया ने बाजार पहुंच में सुधार और व्यापार बाधाओं को कम करने के लिए ASEAN–भारत वस्तु व्यापार समझौते (ASEAN–India Trade in Goods Agreement - AITIGA) की समीक्षा को शीघ्र पूरा करने की प्रतिबद्धता जताई।
दोनों देशों ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और बैंक इंडोनेशिया के बीच स्थानीय मुद्रा लेनदेन (Local Currency Transactions) को बढ़ावा दिया।
महत्वपूर्ण खनिजों, दुर्लभ मृदा तत्वों (Rare Earths) और इस्पात आपूर्ति श्रृंखला में सहयोग को मजबूत किया गया। SAIL और PT Krakatau Steel के बीच संयुक्त उद्यम के माध्यम से स्टेनलेस स्टील उत्पादन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की संभावनाओं का पता लगाया जाएगा।
ऊर्जा, कृषि और डिजिटल संपर्क:
दोनों देशों ने निम्नलिखित क्षेत्रों में सहयोग करने पर सहमति व्यक्त की:
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- हरित हाइड्रोजन
- एलएनजी (LNG)
- सौर ऊर्जा
- जैव ऊर्जा
- कृषि
- खाद्य सुरक्षा
- उर्वरक क्षेत्र
- हरित हाइड्रोजन
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भारत सबांग बंदरगाह के विकास में सहयोग करेगा, जबकि दोनों देश अंडमान–आचेह संपर्क को मजबूत करेंगे।
डिजिटल सहयोग के अंतर्गत भारत के ONDC ढांचे पर आधारित इंडोनेशिया ओपन नेटवर्क (Indonesia Open Network - ION) की शुरुआत और सीमा-पार QR भुगतान प्रणाली में प्रगति शामिल है।
विज्ञान, संस्कृति और शिक्षा:
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- भारत और इंडोनेशिया ने ISRO और BRIN के बीच सहयोग का विस्तार किया है। इसमें इंडोनेशिया के बियाक ट्रैकिंग स्टेशन के माध्यम से भारत के गगनयान मिशन के लिए सहयोग भी शामिल है।
- दोनों देश कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), परमाणु ऊर्जा और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्रों में भी सहयोग जारी रखेंगे।
- भारत यूनेस्को द्वारा सूचीबद्ध प्रम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण और पुनर्स्थापन में सहयोग करेगा। वर्ष 2026–27 को टैगोर–देवंतारा वर्ष के रूप में मनाया जाएगा।
- भारत और इंडोनेशिया ने ISRO और BRIN के बीच सहयोग का विस्तार किया है। इसमें इंडोनेशिया के बियाक ट्रैकिंग स्टेशन के माध्यम से भारत के गगनयान मिशन के लिए सहयोग भी शामिल है।
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भारत के लिए रणनीतिक महत्व:
भारत–इंडोनेशिया साझेदारी भारत की एक्ट ईस्ट नीति (Act East Policy) और हिंद-प्रशांत दृष्टिकोण को मजबूत करती है।
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- सबांग बंदरगाह मलक्का जलडमरूमध्य के निकट भारत की समुद्री उपस्थिति को बढ़ाता है।
- ब्रह्मोस निर्यात भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहित करता है।
- इंडोनेशिया के निकेल भंडार भारत के इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और बैटरी उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- UPI और ONDC का विस्तार भारत के डिजिटल नेतृत्व को बढ़ावा देता है।
- सबांग बंदरगाह मलक्का जलडमरूमध्य के निकट भारत की समुद्री उपस्थिति को बढ़ाता है।
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चुनौतियाँ:
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- इंडोनेशिया रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखता है और चीन के साथ सीधे टकराव से बचता है।
- बाजार पहुंच संबंधी बाधाओं के कारण व्यापार असंतुलन बना हुआ है।
- बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में नियामकीय और पर्यावरणीय देरी आती है।
- रक्षा प्रौद्योगिकी के एकीकरण में सुरक्षा संबंधी चिंताओं का सावधानीपूर्वक समाधान आवश्यक है।
- इंडोनेशिया रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखता है और चीन के साथ सीधे टकराव से बचता है।
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निष्कर्ष:
भारत–इंडोनेशिया संबंध हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता का एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। समुद्री सहयोग, रक्षा साझेदारी, महत्वपूर्ण खनिज सुरक्षा और डिजिटल नवाचार को एक साथ आगे बढ़ाकर दोनों देश एक सुरक्षित और समृद्ध क्षेत्रीय व्यवस्था के निर्माण में योगदान दे सकते हैं। यह साझेदारी भारत के विकसित भारत 2047 विजन और इंडोनेशिया के Indonesia Emas 2045 रोडमैप के अनुरूप है।

