IMF रैंकिंग में भारत की गिरावट
सन्दर्भ:
हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा जारी 'वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक' के अनुसार, भारत नॉमिनल जीडीपी के मामले में विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से छठे स्थान पर आ गया है। भारत अमेरिका, चीन, जर्मनी, जापान और ब्रिटेन के बाद छठे स्थान पर है। हालांकि, यह गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था की मौलिक कमजोरी से अधिक 'सांख्यिकीय समायोजन' और 'मुद्रा विनिमय दरों' का परिणाम है।
गिरावट के प्रमुख कारक:
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- मुद्रा विनिमय दर और रुपये का अवमूल्यन: चूँकि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) अर्थव्यवस्थाओं की तुलना 'अमेरिकी डॉलर' के नॉमिनल मूल्यों पर करता है, इसलिए विनिमय दर (Exchange Rate) निर्णायक भूमिका निभाती है। डॉलर के मुकाबले रुपये के मूल्य में आई भारी गिरावट ने वैश्विक बाजार में भारतीय जीडीपी के 'डॉलर मूल्य' को कम कर दिया, जिससे रैंकिंग प्रभावित हुई।
- आधार वर्ष संशोधन: फरवरी 2026 में भारत ने जीडीपी गणना का आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 किया। आर्थिक सुधारों की प्रक्रिया में यह आवश्यक था ताकि डेटा वर्तमान उपभोग और उत्पादन पैटर्न को दर्शा सके। हालांकि, इस सांख्यिकीय बदलाव के कारण नॉमिनल जीडीपी के अनुमानों में लगभग 3.5% का 'डाउनवर्ड करेक्शन' देखा गया, जिसने तात्कालिक रूप से रैंकिंग को नीचे किया।
- वैश्विक मांग और मुद्रास्फीति का प्रभाव: विकसित देशों (विशेषकर यूके और जर्मनी) में मुद्रास्फीति के ऊंचे स्तर ने उनकी नॉमिनल जीडीपी को कृत्रिम रूप से बढ़ाया है, जबकि भारत ने अपनी मुद्रास्फीति को तुलनात्मक रूप से नियंत्रित रखा है। नॉमिनल जीडीपी में महंगाई शामिल होती है, जिसका लाभ इस बार यूरोपीय देशों को मिला।
- वैश्विक आर्थिक मंदी: वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन की बाधाओं और भू-राजनीतिक तनाव (जैसे यूक्रेन या पश्चिम एशिया संकट) के कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हुई, जिससे भारत के राजकोषीय घाटे और मुद्रास्फीति पर दबाव पड़ा।
- मुद्रा विनिमय दर और रुपये का अवमूल्यन: चूँकि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) अर्थव्यवस्थाओं की तुलना 'अमेरिकी डॉलर' के नॉमिनल मूल्यों पर करता है, इसलिए विनिमय दर (Exchange Rate) निर्णायक भूमिका निभाती है। डॉलर के मुकाबले रुपये के मूल्य में आई भारी गिरावट ने वैश्विक बाजार में भारतीय जीडीपी के 'डॉलर मूल्य' को कम कर दिया, जिससे रैंकिंग प्रभावित हुई।
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भारतीय अर्थव्यवस्था की लचीली संरचना (Resilience Structure):
रैंकिंग में गिरावट के बावजूद, भारत के पास कई सकारात्मक पहलू हैं जो इसे 'ग्लोबल ब्राइट स्पॉट' बनाए रखते हैं:
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- विकास दर: भारत 6.5% की विकास दर के साथ अब भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है।
- क्रय शक्ति समता (PPP): यदि जीडीपी की तुलना क्रय शक्ति समता (Purchasing Power Parity- PPP) के आधार पर की जाए, तो भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
- बुनियादी ढांचा और डिजिटल सुधार: 'गति शक्ति' और 'डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे' (DPI) में निवेश ने उत्पादन लागत को कम करने और दक्षता बढ़ाने में मदद की है।
- विकास दर: भारत 6.5% की विकास दर के साथ अब भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है।
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आगे की राह:
भारत को अपनी रैंकिंग सुधारने और सतत विकास के लिए निम्नलिखित क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना होगा:
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- रुपये की स्थिरता: विदेशी मुद्रा भंडार का प्रभावी प्रबंधन और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) को आकर्षित करना।
- निर्यात संवर्धन: केवल घरेलू उपभोग पर निर्भर रहने के बजाय निर्यात-उन्मुख विकास (Export-led growth) को बढ़ावा देना।
- विनिर्माण क्षेत्र (PLI Scheme): विनिर्माण क्षेत्र की जीडीपी में हिस्सेदारी को 25% तक ले जाना।
- कौशल विकास: जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) का लाभ उठाने के लिए युवाओं को कुशल बनाना।
- रुपये की स्थिरता: विदेशी मुद्रा भंडार का प्रभावी प्रबंधन और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) को आकर्षित करना।
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निष्कर्ष:
IMF रैंकिंग में गिरावट वास्तविक आर्थिक कमजोरी का संकेत नहीं, बल्कि विनिमय दर और सांख्यिकीय मापन से उत्पन्न प्रभाव का परिणाम है।। आईएमएफ के अनुमान स्वयं बताते हैं कि भारत 2027 तक पुन: चौथे और 2031 तक तीसरे स्थान पर पहुँच जाएगा। भारत का लक्ष्य केवल जीडीपी की दौड़ में आगे निकलना नहीं, बल्कि समावेशी विकास और $5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को धरातल पर उतारना होना चाहिए।

