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Blog / 14 Oct 2026

2030 तक हेपेटाइटिस B और C को सार्वजनिक स्वास्थ्य के खतरे के रूप में समाप्त करने की भारत की रूपरेखा

संदर्भ:

हाल ही में, भारत ने 2030 तक हेपेटाइटिस B और C को सार्वजनिक स्वास्थ्य के खतरे के रूप में समाप्त करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। WHO की वैश्विक हेपेटाइटिस रिपोर्ट 2024 के अनुसार, भारत में लगभग 2.9 करोड़ लोग हेपेटाइटिस B और 55 लाख लोग हेपेटाइटिस C से पीड़ित हैं। यह वैश्विक रोगभार का 11% से अधिक है। दीर्घकालिक संक्रमण से लिवर सिरोसिस, लिवर फेलियर और कैंसर हो सकता है।

सरकारी पहलें:

      • राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम (NVHCP): स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 2018 में शुरू किया गया यह कार्यक्रम रोकथाम, स्क्रीनिंग, निदान और उपचार के लिए एक व्यापक रूपरेखा प्रदान करता है।
      • सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम: हेपेटाइटिस B का टीकाकरण, जिसमें जन्म के 24 घंटे के भीतर दी जाने वाली खुराक भी शामिल है, संक्रमण और माँ से बच्चे में संक्रमण के प्रसार को रोकने में मदद करता है।
      • सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा संबंधी प्रथाएँ: दान किए गए रक्त की जाँच, सुरक्षित इंजेक्शन प्रथाएँ, परामर्श और संक्रमण-नियंत्रण उपाय संक्रमण के प्रसार को कम करते हैं।
      • राज्य-स्तरीय पहलें: पंजाब का हेपेटाइटिस C राहत कोष (Hepatitis C Relief Fund) निर्धारित सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से निःशुल्क उपचार प्रदान करता है। अक्टूबर 2026 में, पंजाब ने सरकारी नशामुक्ति और पुनर्वास केंद्रों में HIV, हेपेटाइटिस B और हेपेटाइटिस C की एकीकृत स्क्रीनिंग शुरू करने की योजना की भी घोषणा की।

भारत का हेपेटाइटिस B और C उन्मूलन रोडमैप 2030

हालिया घटनाक्रम:

भारतीय नैदानिक अनुसंधान से संकेत मिलता है कि प्रत्यक्ष-क्रियाशील एंटीवायरल दवाओं (Direct-Acting Antivirals) का आठ सप्ताह का उपचार कुछ पात्र हेपेटाइटिस C रोगियों के लिए मानक 12 सप्ताह के उपचार की तुलना में प्रभावी हो सकता है। उपचार की अवधि कम होने से लागत घट सकती है और उपचार का पालन बेहतर हो सकता है। हालाँकि, यह रोगी की नैदानिक पात्रता और स्वीकृत दिशा-निर्देशों पर निर्भर करेगा।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की भूमिका:

AI निम्नलिखित तरीकों से हेपेटाइटिस की देखभाल में बदलाव ला सकता है:

      • शीघ्र पहचान: लक्षित स्क्रीनिंग के लिए उच्च जोखिम वाले समूहों और स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित भौगोलिक क्षेत्रों की पहचान करना।
      • निदान: लिवर की इमेजिंग का विश्लेषण करने और असामान्यताओं की पहचान करने में चिकित्सकों की सहायता करना।
      • रोग निगरानी: रोग के संभावित हॉटस्पॉट का अनुमान लगाना तथा टीकों, दवाओं और नैदानिक किटों के वितरण में सहायता करना।
      • उपचार का पालन: रिमाइंडर भेजना, छूटी हुई अपॉइंटमेंट पर नज़र रखना और रोगियों के नियमित फॉलो-अप में सहायता करना।
      • संसाधनों का अनुकूलन: स्वास्थ्य अधिकारियों को नैदानिक सुविधाओं और विशेषज्ञ सेवाओं की योजना बनाने में सहायता करना।

हालाँकि, AI के प्रभावी उपयोग के लिए विश्वसनीय डेटा, नैदानिक सत्यापन, गोपनीयता सुरक्षा और मानवीय निगरानी आवश्यक हैं।

प्रमुख चुनौतियाँ:

प्रमुख बाधाओं में जागरूकता की कमी, अपर्याप्त स्क्रीनिंग सुविधाएँ, निदान में देरी, स्वास्थ्य सेवाओं तक असमान पहुँच, सामाजिक कलंक, प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी और खंडित रोग निगरानी प्रणालियाँ शामिल हैं। हेपेटाइटिस C के टीके की अनुपलब्धता रोकथाम और शीघ्र उपचार को विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण बनाती है।

आगे की राह:

भारत को किफायती स्क्रीनिंग और उपचार का विस्तार करना चाहिए, हेपेटाइटिस B की जन्म खुराक के टीकाकरण कवरेज में सुधार करना चाहिए, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाना चाहिए और आशा कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाना चाहिए। सामुदायिक जागरूकता, गोपनीय जाँच और भेदभाव रहित स्वास्थ्य सेवाएँ आवश्यक हैं। AI को मजबूत डिजिटल बुनियादी ढाँचे और डेटा संरक्षण के साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों में जिम्मेदारीपूर्वक एकीकृत किया जाना चाहिए।

निष्कर्ष:

2030 तक हेपेटाइटिस B और C को सार्वजनिक स्वास्थ्य के खतरे के रूप में समाप्त करने के लिए रोकथाम-केंद्रित, किफायती और जन-केंद्रित रणनीति की आवश्यकता है। टीकाकरण, शीघ्र निदान, प्रभावी उपचार, सामुदायिक भागीदारी और AI के जिम्मेदार उपयोग को एक साथ अपनाकर SDG लक्ष्य 3.3 की दिशा में प्रगति तेज की जा सकती है और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत किया जा सकता है।

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