होम > Blog

Blog / 17 Sep 2026

भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स 2025

संदर्भ:

हाल ही में, नीति आयोग ने WRI India के सहयोग से विकसित भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स (IEMI) 2025 जारी किया। यह अपनी तरह का पहला सूचकांक है, जो भारत के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की प्रगति का मूल्यांकन करता है, जिसमें नीति कार्यान्वयन, EV अपनाने, चार्जिंग बुनियादी ढाँचे और नवाचार को शामिल किया गया है।

इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स (IEMI) के बारे में:

      • इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स (IEMI) एक समग्र सूचकांक है, जो 16 प्रदर्शन संकेतकों पर आधारित है और इन्हें तीन विषयगत क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है:
        • परिवहन विद्युतीकरण प्रगति – 50%
        • चार्जिंग बुनियादी ढाँचा तैयारी – 30%
        • EV अनुसंधान और नवाचार स्थिति – 20%
      • स्कोर त्रैमासिक आकलनों के परिणामों का उपयोग करके वार्षिक रूप से अपडेट किए जाते हैं, जिससे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विकसित हो रहे ई-मोबिलिटी इकोसिस्टम की तुलना संभव होती है।

India Electric Mobility Index 2025

प्रमुख निष्कर्ष:

      • समग्र स्कोर 10 से 84 के बीच रहे, जबकि औसत स्कोर 40 रहा।
      • दिल्ली ने 84 के स्कोर के साथ सूचकांक में शीर्ष स्थान प्राप्त किया।
      • महाराष्ट्र 78 के साथ दूसरे स्थान पर रहा।
      • कर्नाटक 73 के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
      • गोवा ने उल्लेखनीय सुधार करते हुए पाँचवाँ स्थान प्राप्त किया।
      • मध्य प्रदेश 23वें स्थान से सुधार कर 7वें स्थान पर पहुँच गया।
      • बड़े राज्यों में, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश को अग्रणी के रूप में वर्गीकृत किया गया, जबकि छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, बिहार, केरल, झारखंड, पंजाब और गुजरात को उभरते प्रदर्शनकर्ता के रूप में वर्गीकृत किया गया।

विषयगत क्षेत्रों में प्रदर्शन:

      • परिवहन विद्युतीकरण: दिल्ली, चंडीगढ़ और महाराष्ट्र शीर्ष प्रदर्शनकर्ता रहे, जो अधिक मजबूत EV अपनाने और उपभोक्ता मांग को दर्शाता है।
      • चार्जिंग बुनियादी ढाँचा: कर्नाटक ने 97 के उच्चतम स्कोर के साथ शीर्ष स्थान प्राप्त किया, जिसके बाद गोवा (92) और महाराष्ट्र (91) रहे। इस श्रेणी में चार्जर की उपलब्धता, सब्सिडी, बिजली की पहुँच और भवन संबंधी नियमों को ध्यान में रखा जाता है।
      • अनुसंधान और नवाचार: दिल्ली ने 94 के स्कोर के साथ नेतृत्व किया, जो EV स्टार्टअप्स, R&D और पेटेंट में उसके प्रदर्शन को दर्शाता है।

भारत के EV संक्रमण की स्थिति:

      • भारत में EV 2018 में 0.5% से बढ़कर 2025–26 में 8.25% हो गई। भारतीय सड़कों पर 8.7 मिलियन से अधिक EV वाहन मौजूद थे, जबकि 2025–26 के दौरान लगभग 2.5 मिलियन EV पंजीकृत किए गए।
      • इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों ने नए पंजीकरण में सबसे बड़ी हिस्सेदारी बनाई, जबकि इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों में भी महत्वपूर्ण स्तर पर अपनाया जाना दर्ज किया गया। इलेक्ट्रिक बसों और वाणिज्यिक इलेक्ट्रिक वाहनों की तैनाती में भी वृद्धि हो रही है।

प्रमुख चुनौतियाँ:

      • अपर्याप्त चार्जिंग बुनियादी ढाँचा
      • क्षेत्रों के बीच असमान बुनियादी ढाँचा
      • बिखरी हुई बस्तियाँ
      • प्रारंभिक अवस्था में EV नवाचार इकोसिस्टम
      • EV की उच्च प्रारंभिक लागत
      • बैटरी और महत्वपूर्ण खनिजों पर निर्भरता
      • रीसाइक्लिंग और सुरक्षित बैटरी निपटान की आवश्यकता

सरकारी पहल:

महत्वपूर्ण उपायों में PLI-Auto, e-AMRIT, PM E-DRIVE और PM-eBus Sewa– भुगतान सुरक्षा तंत्र योजना (Payment Security Mechanism Scheme) शामिल हैं। इन पहलों का उद्देश्य EV अपनाने, घरेलू विनिर्माण, चार्जिंग बुनियादी ढाँचे और इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना है।

आगे की राह:

भारत को इंटरऑपरेबल और भौगोलिक रूप से वितरित चार्जिंग नेटवर्क विकसित करने, घरेलू बैटरी और घटक विनिर्माण को बढ़ावा देने, R&D को मजबूत करने, मजबूत बैटरी-रीसाइक्लिंग प्रणालियाँ स्थापित करने और पूर्वानुमेय दीर्घकालिक नीतिगत समर्थन प्रदान करने की आवश्यकता है। सार्वजनिक परिवहन और वाणिज्यिक बेड़े के अधिक विद्युतीकरण से महत्वपूर्ण पर्यावरणीय लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं।

निष्कर्ष:

इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स (IEMI) भारत के इलेक्ट्रिक मोबिलिटी संक्रमण को ट्रैक करने के लिए एक उपयोगी राज्य-स्तरीय साक्ष्य-आधारित ढाँचा प्रदान करता है। हालांकि, भारत के व्यापक EV और जलवायु उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए केवल अधिक EV बिक्री ही नहीं, बल्कि विश्वसनीय चार्जिंग बुनियादी ढाँचा, घरेलू विनिर्माण, तकनीकी नवाचार और टिकाऊ बैटरी इकोसिस्टम भी आवश्यक होंगे।

 

Aliganj Gomti Nagar Prayagraj