संदर्भ:
हाल ही में भारत सरकार ने उर्वरक (अकार्बनिक, कार्बनिक या मिश्रित) (नियंत्रण) आदेश, 1985 के तहत निर्जल अमोनिया (NH₃) के निर्माण एवं कृषि में प्रत्यक्ष उपयोग को 23 जुलाई 2026 से प्रारंभ तीन वर्ष की परीक्षण अवधि के लिए स्वीकृति प्रदान की है।
प्रमुख बिंदु:
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- कृषि उपयोग के लिए कम-से-कम 82% नाइट्रोजन युक्त निर्जल अमोनिया को मंजूरी दी गई है।
- पारंपरिक यूरिया में केवल 46% नाइट्रोजन होती है, जबकि निर्जल अमोनिया अधिक सघन (Concentrated) नाइट्रोजन स्रोत है।
- भारत प्रतिवर्ष लगभग 300 लाख टन यूरिया का उत्पादन करता है, फिर भी घरेलू मांग पूरी करने के लिए लगभग 100 लाख टन यूरिया का आयात करता है।
- यह नीति भारत के ग्रीन अमोनिया और ग्रीन यूरिया को बढ़ावा देने के प्रयासों के अनुरूप है।
- इसका उद्देश्य आयातित यूरिया पर निर्भरता कम करना, नाइट्रोजन उपयोग दक्षता (Nitrogen Use Efficiency - NUE) बढ़ाना तथा ग्रीन अमोनिया को टिकाऊ उर्वरक के रूप में प्रोत्साहित करना है।
- यदि यह पहल सफल रहती है, तो संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के बाद कृषि में निर्जल अमोनिया का प्रत्यक्ष उपयोग करने वाला भारत विश्व का चौथा देश बन जाएगा।
- कृषि उपयोग के लिए कम-से-कम 82% नाइट्रोजन युक्त निर्जल अमोनिया को मंजूरी दी गई है।
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निर्जल अमोनिया क्या है?
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- निर्जल अमोनिया, अमोनिया (NH₃) का शुद्ध एवं जल-रहित रूप है। सामान्य तापमान पर यह तीव्र गंध वाली गैस होती है, लेकिन उच्च दाब (High Pressure) में इसे द्रव (Liquid) के रूप में संग्रहित एवं परिवहन किया जाता है।
- यह सबसे अधिक सघन नाइट्रोजन उर्वरक है, जिसमें लगभग 82% नाइट्रोजन होती है। यूरिया के विपरीत इसे विशेष उपकरणों की सहायता से मिट्टी की सतह के नीचे इंजेक्ट किया जाता है, जहाँ यह मिट्टी की नमी के साथ अभिक्रिया करके अमोनियम (NH₄⁺) बनाता है, जिसे पौधे आसानी से अवशोषित कर लेते हैं।
- निर्जल अमोनिया, अमोनिया (NH₃) का शुद्ध एवं जल-रहित रूप है। सामान्य तापमान पर यह तीव्र गंध वाली गैस होती है, लेकिन उच्च दाब (High Pressure) में इसे द्रव (Liquid) के रूप में संग्रहित एवं परिवहन किया जाता है।
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महत्व:
इस स्वीकृति से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होंगे:
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- उच्च नाइट्रोजन उपयोग दक्षता (Nitrogen Use Efficiency - NUE)।
- आयातित यूरिया एवं प्राकृतिक गैस पर निर्भरता में कमी, जिससे उर्वरक सुरक्षा मजबूत होगी।
- यूरिया उत्पादन लागत घटने से उर्वरक सब्सिडी का बोझ कम होगा।
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) को ग्रीन अमोनिया के उत्पादन एवं उपयोग के माध्यम से बढ़ावा मिलेगा।
- सतत कृषि (Sustainable Agriculture) को प्रोत्साहन मिलेगा तथा आत्मनिर्भर भारत के उर्वरक क्षेत्र के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।
- उच्च नाइट्रोजन उपयोग दक्षता (Nitrogen Use Efficiency - NUE)।
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चुनौतियाँ:
हालाँकि इसके अनेक लाभ हैं, लेकिन व्यापक स्तर पर अपनाने में कई चुनौतियाँ मौजूद हैं:
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- अवसंरचना (Infrastructure) की कमी: भारत में पर्याप्त भंडारण, परिवहन एवं अमोनिया इंजेक्शन उपकरण उपलब्ध नहीं हैं।
- सुरक्षा जोखिम: निर्जल अमोनिया एक विषैली एवं संक्षारक (Corrosive) गैस है, जिसके सुरक्षित उपयोग के लिए कठोर सुरक्षा मानकों की आवश्यकता होती है।
- जटिल उपयोग प्रक्रिया: यूरिया की तरह इसे सीधे नहीं डाला जा सकता; इसे मिट्टी के भीतर इंजेक्ट करना आवश्यक होता है।
- छोटे एवं बिखरे हुए कृषि जोत: भारत में छोटे खेत होने के कारण साझा मशीनरी एवं संस्थागत सहयोग के बिना इसका उपयोग कठिन हो सकता है।
- उच्च निवेश लागत: बड़े स्तर के ग्रीन अमोनिया संयंत्र की स्थापना के लिए लगभग ₹13,000–15,000 करोड़ का निवेश आवश्यक है।
- अवसंरचना (Infrastructure) की कमी: भारत में पर्याप्त भंडारण, परिवहन एवं अमोनिया इंजेक्शन उपकरण उपलब्ध नहीं हैं।
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निष्कर्ष:
निर्जल अमोनिया को मंजूरी भारत की उर्वरक नीति में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन का संकेत है। यह निर्णय नाइट्रोजन उपयोग दक्षता बढ़ाने, यूरिया आयात पर निर्भरता कम करने तथा ग्रीन हाइड्रोजन एवं ग्रीन अमोनिया को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, इसकी सफलता मजबूत अवसंरचना, प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था तथा किसानों में व्यापक जागरूकता पर निर्भर करेगी, जिससे इसका सुरक्षित, टिकाऊ एवं प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

