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Blog / 20 Mar 2026

बाल मृत्यु दर कम करने में भारत की प्रगति: रुझान और आँकड़े

संदर्भ:

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की इंटर-एजेंसी ग्रुप फॉर चाइल्ड मॉर्टैलिटी एस्टिमेशन (UNIGME) ने अपनी रिपोर्ट बाल मृत्यु दर में स्तर और रुझान (Levels and Trends in Child Mortality)" (2025) जारी की। इस रिपोर्ट में बच्चों के जीवन संरक्षण में वैश्विक स्तर पर हुई महत्वपूर्ण उपलब्धियों और कुछ नए चिंताजनक रुझानों को उजागर किया गया है।

बाल मृत्यु दर के बारे में:

बाल मृत्यु का अर्थ है जब किसी बच्चे की मृत्यु पांच साल की उम्र से पहले हो जाती है। इसे सामान्यतः प्रति 1,000 जीवित जन्म पर मापा जाता है और इसे 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर (U5MR) कहा जाता है। यह किसी देश की जीवन-स्तर, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पोषण की स्थिति का एक महत्वपूर्ण संकेतक है।

मुख्य निष्कर्ष:

विश्व स्तर पर अनुमानित 4.9 मिलियन बच्चे 2024 में पांच साल की उम्र से पहले मर गए, जिनमें 2.3 मिलियन नवजात शिशु शामिल हैं। हालांकि यह पिछले दशकों की तुलना में काफी कमी दर्शाता है।

India’s Progress in Reducing Child Mortality

भारत की उपलब्धियाँ:

पिछले तीन दशकों में भारत ने बाल मृत्यु दर में उल्लेखनीय सुधार किया है। रिपोर्ट के अनुसार:

      • वर्ष 1990 में प्रति 1,000 जीवित जन्म पर 127 बच्चों की मृत्यु होती थी, जो 2024 में घटकर 27 हो गई।
      • नवजात शिशु मृत्यु दर 1990 में 57 थी, जो 2024 में 17 रह गई।

यह सुधार सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना और सेवाओं में निरंतर और व्यवस्थित प्रयास का परिणाम है। भारत ने दक्षिण एशियाई क्षेत्र में बाल मृत्यु दर कम करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

सफलता के मुख्य कारण:

      • अस्पताल में प्रसव का विस्तार, जिससे जन्म के समय जोखिम कम हुआ।
      • टीकाकरण कवरेज बढ़ाना, जिससे बचपन की बीमारियों से सुरक्षा मिली।
      • ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली को मजबूत करना।
      • स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के मातृ और शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित करना।

जननी सुरक्षा योजना, मिशन इंद्रधनुष और नवजात शिशु देखभाल में सुधार जैसी पहलों ने जन्म से पहले और जन्म के बाद के जोखिमों को कम करने में मदद की। ये प्रयास दर्शाते हैं कि नीतियों की निरंतरता और लक्षित हस्तक्षेप किस प्रकार दीर्घकालिक स्वास्थ्य परिणाम दे सकते हैं।

वैश्विक रुझान:

वैश्विक प्रगति के बावजूद, यह रिपोर्ट बाल मृत्यु दर को कम करने की गति में एक चिंताजनक कमी उजागर करती है। जहाँ वर्ष 2000 के बाद से पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में आधे से अधिक की गिरावट आई है, वहीं वर्ष 2015 के बाद से इस गिरावट की गति 60% से भी अधिक धीमी हो गई है।

प्रमुख चुनौतियाँ:

      • पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की कुल मौतों में से लगभग आधी मौतें नवजात शिशुओं की होती हैं।
      • इन मौतों को जिन कारणों को रोका जा सकता है, वे ही प्रमुख कारण बने हुए हैं, जिनमें संक्रमण और जन्म के समय होने वाली जटिलताएँ शामिल हैं।
      • क्षेत्रीय असमानताएँ बहुत अधिक हैं; उप-सहारा अफ्रीका में विश्व स्तर पर पांच साल से कम उम्र की मौतों का 58% हिस्सा है।

निष्कर्ष:

शिशु मृत्यु दर को कम करने में भारत की प्रगति सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता है, विशेष रूप से ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर प्रगति धीमी है। पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों और नवजात शिशुओं की मृत्यु दर में आई भारी गिरावट, लगातार किए गए नीतिगत प्रयासों, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और लक्षित हस्तक्षेपों के प्रभाव को दर्शाती है।