संदर्भ:
हाल ही में गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs–MHA) के अंतर्गत कार्यरत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र ने GitHub को निर्देश दिया कि वह बिटचैट नामक विकेंद्रीकृत ब्लूटूथ मेष संदेश सेवा (Bluetooth Mesh Messaging Application) से संबंधित रिपॉज़िटरियों (Repositories) तक सार्वजनिक पहुँच को निष्क्रिय (Disable) कर दे।
बिटचैट क्या है?
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- बिटचैट एक विकेंद्रीकृत (Decentralized) व्यक्ति-से-व्यक्ति (Peer-to-Peer) संदेश प्रेषण अनुप्रयोग है, जो ब्लूटूथ मेष नेटवर्क (Bluetooth Mesh Network) के माध्यम से कार्य करता है। इसके संचालन के लिए न तो इंटरनेट की आवश्यकता होती है और न ही किसी केंद्रीय सर्वर की।
- इसमें उपयोगकर्ताओं को मोबाइल नंबर या अन्य व्यक्तिगत जानकारी देकर पंजीकरण करने की आवश्यकता नहीं होती। नेटवर्क में प्रत्येक उपकरण संदेश भेजने के साथ-साथ उसे आगे पहुँचाने (Relay) का भी कार्य करता है। इस प्रकार संदेश कई निकटवर्ती उपकरणों के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचता है।
- यह व्यवस्था इंटरनेट बंद होने की स्थिति, प्राकृतिक आपदाओं अथवा कमजोर नेटवर्क वाले दूरस्थ क्षेत्रों में भी संचार को संभव बनाती है। इसका उद्देश्य सेंसरशिप से स्वतंत्रता, गोपनीयता की रक्षा तथा संचार अवसंरचना पर निर्भरता को कम करना है।
- बिटचैट एक विकेंद्रीकृत (Decentralized) व्यक्ति-से-व्यक्ति (Peer-to-Peer) संदेश प्रेषण अनुप्रयोग है, जो ब्लूटूथ मेष नेटवर्क (Bluetooth Mesh Network) के माध्यम से कार्य करता है। इसके संचालन के लिए न तो इंटरनेट की आवश्यकता होती है और न ही किसी केंद्रीय सर्वर की।
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सरकार ने इसे हटाने की माँग क्यों की?
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- भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के अनुसार, बिटचैट का गुमनाम और विकेंद्रीकृत संरचना कानून लागू करने वाली एजेंसियों के लिए इन कामों को बहुत मुश्किल बना देता है:
- वैध निगरानी (Lawful Interception) करना,
- उपयोगकर्ताओं की पहचान करना,
- तथा आपराधिक गतिविधियों की जाँच करना
- वैध निगरानी (Lawful Interception) करना,
- सरकार का तर्क है कि ऐसे प्लेटफ़ॉर्म का गलत इस्तेमाल इन कामों के लिए किया जा सकता है:
- अवैध जमावड़े (Unlawful Assemblies) आयोजित करना,
- हिंसक विरोध-प्रदर्शन,
- आतंकवादी गतिविधियाँ,
- संगठित अपराध,
- भ्रामक सूचना (Misinformation) फैलाना,
- भारत की संप्रभुता, सुरक्षा एवं लोक-व्यवस्था के लिए हानिकारक अन्य कार्य।
- अवैध जमावड़े (Unlawful Assemblies) आयोजित करना,
- चूँकि संदेश सीधे निकटवर्ती उपकरणों के बीच आदान-प्रदान होते हैं और कोई केंद्रीय सर्वर नहीं होता, इसलिए सरकार को आशंका है कि विशेषकर इंटरनेट बंदी (Internet Shutdown) के दौरान लोग वैध निगरानी से बच सकते हैं।
- भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के अनुसार, बिटचैट का गुमनाम और विकेंद्रीकृत संरचना कानून लागू करने वाली एजेंसियों के लिए इन कामों को बहुत मुश्किल बना देता है:
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कानूनी आधार:
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- यह निर्देश सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79(3)(ख) तथा सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के नियम 3(1)(घ) के अंतर्गत जारी किया गया।
- धारा 79 के अंतर्गत GitHub जैसे मध्यस्थ (Intermediaries) को सुरक्षित आश्रय (Safe Harbour) का संरक्षण प्राप्त होता है।
- यदि कोई मध्यस्थ सरकारी सूचना मिलने के बाद भी अवैध सामग्री नहीं हटाता, तो वह यह संरक्षण खो सकता है।
- हालांकि, धारा 79 स्वयं किसी सामग्री को अवरुद्ध (Block) करने की शक्ति प्रदान नहीं करती।
- सार्वजनिक पहुँच को अवरुद्ध करने की शक्ति सामान्यतः सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A तथा अवरोधन नियम, 2009 (Blocking Rules, 2009) के अंतर्गत प्रयोग की जाती है। इन प्रावधानों में कारणों का अभिलेखन (Recording of Reasons) तथा समीक्षा की व्यवस्था जैसी प्रक्रियात्मक सुरक्षा भी निर्धारित की गई है।
- यह निर्देश सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79(3)(ख) तथा सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के नियम 3(1)(घ) के अंतर्गत जारी किया गया।
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इस आदेश की आलोचना क्यों हो रही है?
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- इंटरनेट फ़्रीडम फ़ाउंडेशन (Internet Freedom Foundation–IFF) ने इस आदेश की आलोचना करते हुए कहा है कि सरकार ने किसी विशिष्ट अवैध सामग्री की पहचान किए बिना केवल संभावित दुरुपयोग के आधार पर पूरे अनुप्रयोग को निशाना बनाया है।
- IFF ने यह भी कहा है कि यह आदेश उच्चतम न्यायालय द्वारा अनुराधा भसीन बनाम भारत संघ (2020) मामले में प्रतिपादित आनुपातिकता (Proportionality) के सिद्धांत का पालन नहीं करता।
- इस ऐतिहासिक निर्णय में न्यायालय ने कहा था कि—
- इंटरनेट एवं संचार पर लगाए गए प्रतिबंध आवश्यक होने चाहिए,
- आनुपातिक होने चाहिए,
- उनका दायरा सीमित होना चाहिए,
- वे अस्थायी होने चाहिए,
- तथा राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकों के मौलिक अधिकारों के बीच उचित संतुलन बनाए रखना चाहिए।
- इंटरनेट एवं संचार पर लगाए गए प्रतिबंध आवश्यक होने चाहिए,
- इंटरनेट फ़्रीडम फ़ाउंडेशन (Internet Freedom Foundation–IFF) ने इस आदेश की आलोचना करते हुए कहा है कि सरकार ने किसी विशिष्ट अवैध सामग्री की पहचान किए बिना केवल संभावित दुरुपयोग के आधार पर पूरे अनुप्रयोग को निशाना बनाया है।
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निष्कर्ष:
बिटचैट विवाद यह दर्शाता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा, डिजिटल गोपनीयता तथा संचार की स्वतंत्रता के बीच संतुलन स्थापित करना अत्यंत आवश्यक है। भारत को ऐसी पारदर्शी, उत्तरदायी एवं आनुपातिक नियामक व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है, जो एक ओर नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करे और दूसरी ओर उभरती प्रौद्योगिकियों के दुरुपयोग को प्रभावी ढंग से रोक सके।

