संदर्भ:
हाल ही में संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (UNCTAD) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत वर्ष 2025 में विश्व का सबसे बड़ा जहाज पुनर्चक्रण (Ship Recycling) राष्ट्र बनकर उभरा है। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत ने यह लक्ष्य मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030 के निर्धारित लक्ष्य से पाँच वर्ष पहले ही प्राप्त कर लिया है।
पृष्ठभूमि:
-
-
- जहाज पुनर्चक्रण गतिविधियाँ मुख्य रूप से दक्षिण एशिया (भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान) में केंद्रित हैं।
- वैश्विक जहाज पुनर्चक्रण टनभार (Tonnage) का लगभग 85% भारतीय उपमहाद्वीप में होता है।
- वर्ष 2025 में भारत की हिस्सेदारी सबसे अधिक 35.4% रही।
- वैश्विक स्तर पर जहाजों को स्क्रैप करने की प्रक्रिया वृद्ध हो रहे बेड़ों (Ageing Fleets) तथा हरित पुनर्चक्रण के लिए बढ़ते नियामकीय दबाव से प्रेरित है।
- जहाज पुनर्चक्रण गतिविधियाँ मुख्य रूप से दक्षिण एशिया (भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान) में केंद्रित हैं।
-
रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:
-
-
- भारत का वैश्विक नेतृत्व:
- वर्ष 2025 में भारत जहाज पुनर्चक्रण के क्षेत्र में विश्व में प्रथम स्थान पर रहा।
- भारत की हिस्सेदारी 2024 के 30.1% से बढ़कर 2025 में 35.4% हो गई।
- कुल पुनर्चक्रण मात्रा 2.99 मिलियन ग्रॉस टनेज (GT) तक पहुँच गई।
- वर्ष 2025 में भारत जहाज पुनर्चक्रण के क्षेत्र में विश्व में प्रथम स्थान पर रहा।
- मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030 के लक्ष्य की समय से पूर्व प्राप्ति:
- भारत ने मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030 के तहत निर्धारित लक्ष्य को समय से पहले प्राप्त कर लिया।
- यह समुद्री अवसंरचना तथा नियामकीय सुधारों में हुई तीव्र प्रगति को दर्शाता है।
- भारत ने मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030 के तहत निर्धारित लक्ष्य को समय से पहले प्राप्त कर लिया।
- जहाज पुनर्चक्रण गतिविधियों में मजबूत वृद्धि:
- पुनर्चक्रण मात्रा में वर्ष-दर-वर्ष लगभग 60% की वृद्धि दर्ज की गई।
- यह वृद्धि वैश्विक स्तर पर वृद्ध हो रहे जहाज बेड़ों तथा स्क्रैपिंग की बढ़ती मांग के कारण हुई।
- पुनर्चक्रण मात्रा में वर्ष-दर-वर्ष लगभग 60% की वृद्धि दर्ज की गई।
- भारत का वैश्विक नेतृत्व:
-
सरकारी पहल:
-
-
- जहाज पुनर्चक्रण यार्डों के आधुनिकीकरण हेतु ₹53.5 करोड़ की वित्तीय सहायता।
- 115 जहाज पुनर्चक्रण सुविधाओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उन्नत किया गया।
- शिप-ब्रेकिंग क्रेडिट नोट योजना की शुरुआत, जिसके अंतर्गत पुनर्चक्रण से प्राप्त क्रेडिट का उपयोग नए भारतीय निर्मित जहाजों की खरीद में किया जा सकता है।
- अलंग जहाज पुनर्चक्रण क्षमता को बढ़ाकर लगभग 9 मिलियन LDT तक पहुँचाने की योजना।
- भारतीय यार्डों को यूरोपीय संघ (EU) की अनुमोदित पुनर्चक्रण सुविधाओं की सूची में शामिल कराने के प्रयास।
- जहाज पुनर्चक्रण यार्डों के आधुनिकीकरण हेतु ₹53.5 करोड़ की वित्तीय सहायता।
-
नीतिगत सुधारों की भूमिका:
-
-
- जहाजों का पुनर्चक्रण अधिनियम, 2019 (Recycling of Ships Act, 2019) का कार्यान्वयन।
- जहाजों के सुरक्षित एवं पर्यावरण-अनुकूल पुनर्चक्रण हेतु हांगकांग अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के अनुरूप नीतियों का समायोजन।
- भारत ने वर्ष 2019 में इस कन्वेंशन का अनुमोदन (Ratification) किया था।
- जहाजों का पुनर्चक्रण अधिनियम, 2019 (Recycling of Ships Act, 2019) का कार्यान्वयन।
-
अवसंरचना सुदृढ़ीकरण:
-
-
- अलंग–सोसिया जहाज पुनर्चक्रण यार्ड (गुजरात) की प्रमुख भूमिका।
- यह विश्व का सबसे बड़ा जहाज पुनर्चक्रण केंद्र है।
- पर्यावरणीय अनुपालन तथा सुरक्षा मानकों में निरंतर सुधार किए जा रहे हैं।
- अलंग–सोसिया जहाज पुनर्चक्रण यार्ड (गुजरात) की प्रमुख भूमिका।
-
महत्त्व:
-
-
- आर्थिक महत्त्व:
- भारत की ब्लू इकोनॉमी तथा समुद्री विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती प्रदान करता है।
- अवसंरचना और उद्योगों के लिए पुनर्चक्रित इस्पात (Recycled Steel) की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करता है।
- तटीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करता है।
- भारत की ब्लू इकोनॉमी तथा समुद्री विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती प्रदान करता है।
- रणनीतिक महत्त्व:
- भारत को एक वैश्विक समुद्री केंद्र (Global Maritime Hub) के रूप में स्थापित करता है।
- वैश्विक शिपिंग जीवनचक्र प्रबंधन में भारत की भूमिका को सुदृढ़ करता है।
- Maritime India Vision 2030 के दीर्घकालिक लक्ष्यों को समर्थन प्रदान करता है।
- भारत को एक वैश्विक समुद्री केंद्र (Global Maritime Hub) के रूप में स्थापित करता है।
- पर्यावरणीय महत्त्व:
- सामग्री पुनर्प्राप्ति (Material Recovery) के माध्यम से परिपत्र अर्थव्यवस्था (Circular Economy) को बढ़ावा देता है।
- प्राथमिक इस्पात उत्पादन पर निर्भरता को कम करता है।
- हरित एवं विनियमित जहाज पुनर्चक्रण प्रथाओं को प्रोत्साहित करता है।
- सामग्री पुनर्प्राप्ति (Material Recovery) के माध्यम से परिपत्र अर्थव्यवस्था (Circular Economy) को बढ़ावा देता है।
- आर्थिक महत्त्व:
-
चुनौतियाँ:
-
-
- व्यावसायिक सुरक्षा (Occupational Safety) और श्रमिक कल्याण से जुड़ी चिंताएँ।
- तटीय पारिस्थितिक तंत्रों पर पर्यावरणीय जोखिम।
- लागत लाभ के कारण बांग्लादेश और पाकिस्तान से प्रतिस्पर्धा।
- हरित एवं यंत्रीकृत पुनर्चक्रण अवसंरचना के विस्तार की आवश्यकता।
- अपशिष्ट प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित कमियाँ।
- व्यावसायिक सुरक्षा (Occupational Safety) और श्रमिक कल्याण से जुड़ी चिंताएँ।
-
निष्कर्ष:
वर्ष 2025 में विश्व के सबसे बड़े जहाज पुनर्चक्रण राष्ट्र के रूप में भारत का उभरना उसकी समुद्री प्रगति का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह उपलब्धि नीतिगत सुधारों, अवसंरचनात्मक उन्नयन तथा वैश्विक सतत विकास मानकों के अनुरूप किए गए प्रयासों को दर्शाती है। भविष्य में इस स्थिति को बनाए रखने के लिए आर्थिक विकास, पर्यावरण संरक्षण तथा श्रमिक सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करना आवश्यक होगा, ताकि दीर्घकालिक सतत विकास सुनिश्चित किया जा सके।

