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Blog / 09 Jul 2026

तीसरा भारत–ऑस्ट्रेलिया शिखर सम्मेलन 2026: व्यापक रणनीतिक साझेदारी का नया चरण

चर्चा में क्यों?

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने मेलबर्न में भारत–ऑस्ट्रेलिया तृतीय वार्षिक शिखर सम्मेलन (3rd Australia–India Annual Leaders' Summit) में भाग लिया। इस शिखर सम्मेलन ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, महत्त्वपूर्ण खनिज, व्यापार, प्रौद्योगिकी तथा शिक्षा के क्षेत्रों में हुए समझौतों के माध्यम से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को नई गति प्रदान की तथा व्यापक रणनीतिक साझेदारी  को और सुदृढ़ किया।

शिखर सम्मेलन के प्रमुख परिणाम:

रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग:

      • दोनों नेताओं ने रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता को सुदृढ़ करना है।
      • इसके अतिरिक्त, दोनों देशों ने वार्षिक रक्षा मंत्रियों की वार्ता को संस्थागत स्वरूप प्रदान किया तथा समुद्री सुरक्षा सहयोग रोडमैप (Maritime Security Collaboration Roadmap) का शुभारंभ किया, जिससे नौसैनिक सहयोग, समुद्री क्षेत्र जागरूकता (Maritime Domain Awareness) तथा क्षेत्रीय सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा।

आर्थिक एवं व्यापारिक सहयोग:

      • भारत–ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौता (Economic Cooperation and Trade Agreement- ECTA), 2022 के आधार पर दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (Comprehensive Economic Cooperation Agreement- CECA) तथा द्विपक्षीय निवेश संधि (Bilateral Investment Treaty- BIT) पर वार्ता को तेज़ करने पर सहमति व्यक्त की।
      • इसका उद्देश्य व्यापार, निवेश तथा बाजार पहुँच का विस्तार करना और एक संतुलित एवं पारस्परिक रूप से लाभकारी आर्थिक साझेदारी स्थापित करना है।

PM Modi's Australia Visit 2026: 3rd India–Australia Annual Leaders' Summit  - GK Now

ऊर्जा सुरक्षा:

      • इस शिखर सम्मेलन की एक प्रमुख उपलब्धि ऑस्ट्रेलिया–भारत परमाणु सहयोग समझौते  के अंतर्गत प्रशासनिक व्यवस्था का क्रियान्वयन था।
      • इसके माध्यम से अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप ऑस्ट्रेलिया से भारत को दीर्घकालिक यूरेनियम निर्यात का मार्ग प्रशस्त हुआ।
      • ऑस्ट्रेलिया के पास विश्व के ज्ञात यूरेनियम भंडार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है। यह समझौता भारत के 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने के लक्ष्य तथा उसकी स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण (Clean Energy Transition) की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

महत्त्वपूर्ण खनिज साझेदारी:

      • दोनों देशों ने समर्पित महत्त्वपूर्ण खनिज गलियारे (Dedicated Critical Minerals Corridor) का शुभारंभ किया, जिसका उद्देश्य लिथियम, कोबाल्ट, दुर्लभ मृदा तत्व (Rare Earth Elements) तथा अन्य रणनीतिक खनिजों की सुदृढ़ एवं लचीली आपूर्ति शृंखला (Resilient Supply Chains) सुनिश्चित करना है।
      • यह पहल खनिजों के प्रसंस्करण (Processing) एवं परिशोधन (Refining) में संयुक्त निवेश को बढ़ावा देगी तथा इलेक्ट्रिक वाहन, अर्धचालक (Semiconductors), नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों तथा रक्षा विनिर्माण के लिए एकल स्रोत पर निर्भरता को कम करेगी।

प्रौद्योगिकी, शिक्षा एवं नवीकरणीय ऊर्जा:

      • शिखर सम्मेलन के दौरान ऑस्ट्रेलिया–भारत साइबर, महत्त्वपूर्ण प्रौद्योगिकी एवं आपूर्ति शृंखला साझेदारी (Australia–India Partnership on Cyber, Critical Technologies and Supply Chains- AI-PACTS) को क्रियान्वित किया गया।
      • दोनों देशों ने गुजरात स्थित रूफटॉप सोलर प्रशिक्षण अकादमी (Rooftop Solar Training Academy) के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग का विस्तार किया, जिसमें विशेष रूप से महिलाओं एवं युवाओं के कौशल विकास पर बल दिया जाएगा।
      • शिक्षा के क्षेत्र में भी सहयोग को मजबूत करते हुए बेंगलुरु और गुरुग्राम में ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों के नए परिसरों (Campuses) की स्थापना की गई।

निष्कर्ष:

यह शिखर सम्मेलन भारत–ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, महत्त्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, लचीली आपूर्ति शृंखलाओं तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग को नई गति मिलेगी। साथ ही, भारतीय प्रवासी समुदाय (Indian Diaspora), बढ़ते जन-से-जन संपर्क, शैक्षिक सहयोग तथा आर्थिक संबंधों के कारण ऑस्ट्रेलिया, इस क्षेत्र में भारत के सबसे महत्त्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारों में से एक के रूप में उभर रहा है।

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