संदर्भ:
हाल ही में, विश्व बैंक की रिपोर्ट India and Artificial Intelligence: Seizing the Development Opportunity (भारत और कृत्रिम बुद्धिमत्ता: विकास के अवसरों का लाभ उठाना) में भारत को AI की तैयारी के मामले में उभरते बाजारों के शीर्ष 10 देशों में शामिल किया गया है। भारत की प्रमुख शक्तियों में बड़ा तकनीकी कार्यबल, एक सुस्थापित IT क्षेत्र और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) शामिल हैं। हालाँकि, कंप्यूटिंग अवसंरचना, वित्तपोषण और AI को अपनाने के क्षेत्र में मौजूद कमियाँ इसकी संभावनाओं को सीमित कर रही हैं।
रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:
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- बढ़ता निवेश: निजी क्षेत्र में AI निवेश वर्ष 2024 के 1.2 अरब डॉलर से बढ़कर वर्ष 2025 में 4.1 अरब डॉलर हो गया।
- बढ़ते रोजगार: वैश्विक क्षमता केंद्रों (GCCs) में कार्यरत पेशेवरों की संख्या वर्ष 2024 के 19 लाख से बढ़कर वर्ष 2025 में 23.6 लाख हो गई।
- AI को अपनाना: लगभग 23% भारतीय कंपनियों ने AI का उपयोग करने की सूचना दी, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका में यह आँकड़ा लगभग 43% था।
- अवसंरचना संबंधी कमी: वर्ष 2025 में वैश्विक स्तर पर स्थापित डेटा सेंटर क्षमता में भारत की हिस्सेदारी लगभग 1% थी।
- रोजगार पर प्रभाव: भारत में लगभग 22% रोजगार AI से अत्यधिक प्रभावित होने की संभावना वाले क्षेत्र में हैं, हालाँकि AI के संपर्क में आने का अर्थ आवश्यक रूप से नौकरियों का समाप्त होना नहीं है।
- बढ़ता निवेश: निजी क्षेत्र में AI निवेश वर्ष 2024 के 1.2 अरब डॉलर से बढ़कर वर्ष 2025 में 4.1 अरब डॉलर हो गया।
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कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) क्या है?
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- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) उन तकनीकों को संदर्भित करती है, जो मशीनों को मानवीय बुद्धिमत्ता से जुड़े कार्य करने में सक्षम बनाती हैं। इनमें सीखना, तर्क करना, भाषा प्रसंस्करण और निर्णय लेना शामिल हैं।
- एक सामान्य-उद्देश्य वाली तकनीक के रूप में, AI उत्पादकता में सुधार कर सकती है, विशेष कौशलों तक पहुँच बढ़ा सकती है तथा स्वास्थ्य सेवा, कृषि, शिक्षा, विनिर्माण और वित्त जैसे क्षेत्रों में बदलाव ला सकती है।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) उन तकनीकों को संदर्भित करती है, जो मशीनों को मानवीय बुद्धिमत्ता से जुड़े कार्य करने में सक्षम बनाती हैं। इनमें सीखना, तर्क करना, भाषा प्रसंस्करण और निर्णय लेना शामिल हैं।
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AI के क्षेत्र में भारत के लाभ:
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- डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना: आधार, UPI, डिजिलॉकर और अकाउंट एग्रीगेटर व्यापक स्तर पर AI अनुप्रयोगों के विकास के लिए डिजिटल आधार प्रदान करते हैं।
- मानव पूंजी: भारत का विशाल इंजीनियरिंग कार्यबल और IT सेवा उद्योग सॉफ्टवेयर विकास, डेटा विश्लेषण तथा AI के कार्यान्वयन में सहयोग करते हैं।
- घरेलू बाजार: भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप AI समाधान विकसित करने के अवसर प्रदान करती है।
- सरकारी पहलें: IndiaAI मिशन, भाषिणी (BHASHINI) और AI4Bharat AI अवसंरचना, भाषा प्रौद्योगिकियों, डेटासेट, अनुसंधान और कौशल विकास को समर्थन देते हैं।
- डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना: आधार, UPI, डिजिलॉकर और अकाउंट एग्रीगेटर व्यापक स्तर पर AI अनुप्रयोगों के विकास के लिए डिजिटल आधार प्रदान करते हैं।
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प्रमुख चुनौतियाँ:
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- अवसंरचना की कमी: किफायती कंप्यूटिंग सुविधाओं, डेटा सेंटर क्षमता और विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति की सीमित उपलब्धता।
- असमान अपनाना: छोटे उद्यमों और अनौपचारिक व्यवसायों को वित्तीय तथा तकनीकी बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
- कौशल की कमी: विशेष AI शोधकर्ताओं और पेशेवरों की कमी।
- डेटा संबंधी सीमाएँ: उच्च गुणवत्ता वाले और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप डेटासेट की अपर्याप्त उपलब्धता।
- रोजगार संबंधी चिंताएँ: AI विभिन्न व्यवसायों के स्वरूप को बदल सकता है, कुछ कार्यों का स्थान ले सकता है और कौशल-आधारित असमानताओं को बढ़ा सकता है।
- नैतिक जोखिम: पक्षपात, निजता का उल्लंघन, गलत सूचना और जवाबदेही का अभाव।
- अवसंरचना की कमी: किफायती कंप्यूटिंग सुविधाओं, डेटा सेंटर क्षमता और विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति की सीमित उपलब्धता।
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आगे की राह:
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- भारत को किफायती क्लाउड कंप्यूटिंग सुविधाओं का विस्तार करना चाहिए, ब्रॉडबैंड और विद्युत अवसंरचना को मजबूत बनाना चाहिए, AI साक्षरता को बढ़ावा देना चाहिए तथा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को लक्षित सहायता प्रदान करनी चाहिए।
- मजबूत निजता सुरक्षा उपायों के साथ सार्वजनिक क्षेत्र के डेटा को अधिक सुलभ बनाया जाना चाहिए। निवेश में बहुभाषी AI, स्वास्थ्य सेवा, कृषि और वंचित समुदायों के लिए कम लागत वाले समाधानों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
- जिम्मेदार कार्यान्वयन के लिए जोखिम-आधारित विनियमन, AI सुरक्षा मूल्यांकन, श्रमिकों के पुनः कौशल विकास और संस्थागत क्षमता को मजबूत करना आवश्यक है।
- भारत को किफायती क्लाउड कंप्यूटिंग सुविधाओं का विस्तार करना चाहिए, ब्रॉडबैंड और विद्युत अवसंरचना को मजबूत बनाना चाहिए, AI साक्षरता को बढ़ावा देना चाहिए तथा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को लक्षित सहायता प्रदान करनी चाहिए।
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निष्कर्ष:
भारत में अपनी तकनीकी प्रतिभा, डिजिटल अवसंरचना और घरेलू बाजार का समन्वय करके AI के क्षेत्र में एक प्रमुख नवाचारकर्ता बनने की क्षमता है। प्राथमिकता अवसंरचना संबंधी कमियों को दूर करने, समावेशी रूप से AI को अपनाने को बढ़ावा देने तथा विश्वसनीय और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप AI प्रणालियाँ विकसित करने पर होनी चाहिए, ताकि आर्थिक विकास और सामाजिक प्रगति को समर्थन मिल सके।

