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Blog / 22 Jan 2026

अंटार्कटिक पेंगुइन पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव

संदर्भ:

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और ऑक्सफोर्ड ब्रूक्स विश्वविद्यालय द्वारा किए गए दस वर्षों के अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ है कि तेज़ी से बढ़ते तापमान के कारण अंटार्कटिक पेंगुइन अपने प्रजनन मौसम की शुरुआत पहले की तुलना में काफी जल्दी कर रहे हैं। एडेली (Adelie), चिनस्ट्रैप (Chinstrap) और जेंटू (Gentoo) पेंगुइन अब दस वर्ष पहले की अपेक्षा लगभग 24 दिन पहले घोंसला बनाना शुरू कर चुके हैं। यह व्यवहारिक अनुकूलन उन्हें बढ़ते तापमान के अनुरूप ढलने में सहायक है, किंतु इसके परिणामस्वरूप भोजन की समय पर उपलब्धता में असंतुलन उत्पन्न हो सकता है, जिससे उनकी आबादी की स्थिरता पर गंभीर खतरा उत्पन्न होने की आशंका है। पेंगुइन को संकेतक प्रजातिमाना जाता है, क्योंकि उनके व्यवहार में होने वाले परिवर्तन अंटार्कटिका के संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र में हो रहे व्यापक बदलावों को दर्शाते हैं।

अंटार्कटिक पेंगुइनों के बारे में:

      • पेंगुइन न उड़ सकने वाले समुद्री पक्षी हैं, जो ध्रुवीय समुद्री पर्यावरण के अनुरूप पूरी तरह अनुकूलित हैं। एडेली, चिनस्ट्रैप और जेंटू पेंगुइन मुख्य रूप से अंटार्कटिक प्रायद्वीप तथा उसके आसपास के द्वीपों में पाए जाते हैं। इनका प्रमुख भोजन क्रिल (krill), मछलियाँ और स्क्विड (squid) होता है।
      • इनका प्रजनन चक्र उस समय से जुड़ा होता है जब समुद्र में भोजन सबसे अधिक उपलब्ध होता है। समुद्री बर्फ के फैलाव और बर्फ पिघलने के समय में बदलाव इनके घोंसला बनाने की सफलता और बच्चों के जीवित रहने पर प्रत्यक्ष प्रभाव डालता है।

Impact of Climate Change on Antarctic Penguins

अध्ययन में क्या पाया गया?

        • जेंटू पेंगुइन औसतन 13 दिन पहले प्रजनन कर रहे हैं और कुछ कॉलोनियों में यह बदलाव 24 दिन तक का है।
        • एडेली और चिनस्ट्रैप पेंगुइन लगभग 10 दिन पहले प्रजनन शुरू कर रहे हैं।
        • यह बदलाव किसी भी पक्षी प्रजाति में अब तक दर्ज किया गया सबसे तेज़ मौसमी (प्रजनन समय से जुड़ा) परिवर्तन है।
      • प्रजनन स्थलों पर स्थानीय तापमान हर साल लगभग 0.3 डिग्री सेल्सियस बढ़ रहा है, जो अंटार्कटिका के औसत तापमान वृद्धि से लगभग चार गुना अधिक है। इससे बर्फ जल्दी पिघलती है और पर्यावरणीय संकेत बदल जाते हैं।

पेंगुइन समय पूर्व प्रजनन क्यों कर रहे हैं?

      • तेज़ी से बढ़ता तापमान, बर्फ के जल्दी पिघलने और समुद्री बर्फ के जल्दी हटने का कारण बन रहा है, जिससे घोंसला बनाने की जगहें मौसम की शुरुआत में ही खुल जाती हैं। तापमान और बर्फ की स्थिति जैसे पर्यावरणीय संकेत पेंगुइनों के प्रजनन समय को तय करते हैं।
      • हालांकि जल्दी प्रजनन करना उन्हें गर्म होते वातावरण के साथ तालमेल बिठाने में मदद करता है, लेकिन भोजन की उपलब्धता के साथ तालमेल बिगड़ने का खतरा बना रहता है।

पारिस्थितिक प्रभाव:

      • मौसमी असंतुलन: पेंगुइन के बच्चे ऐसे समय पैदा हो सकते हैं जब क्रिल की संख्या अपने चरम पर न हो, जिससे उनके जीवित रहने की संभावना कम हो जाती है।
      • लाभ और नुकसान: जेंटू पेंगुइन गर्म परिस्थितियों से कुछ हद तक लाभ उठा सकते हैं, जबकि एडेली और चिनस्ट्रैप पेंगुइन, जो समुद्री बर्फ पर अधिक निर्भर हैं, उनकी आबादी में गिरावट देखी जा सकती है।
      • बढ़ती प्रतिस्पर्धा: प्रजनन मौसम के एक-दूसरे से टकराने के कारण भोजन और घोंसला बनाने की जगह के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।

नीति और संरक्षण का महत्व:

      • पेंगुइन अंटार्कटिक पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण संकेतक हैं। उनके प्रजनन समय में हो रहे बदलाव यह दिखाते हैं कि अब तुरंत निम्न कदम उठाने की ज़रूरत है, जैसे:
        • पेंगुइन आबादी और उनके भोजन स्रोतों की लंबे समय तक निगरानी।
        • संरक्षण योजनाओं में मौसमी बदलाव से जुड़े आँकड़ों को शामिल करना।
        • वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन को कम करने के प्रयास, ताकि आगे होने वाले नुकसान को रोका जा सके।

निष्कर्ष:

अंटार्कटिक पेंगुइनों का पहले प्रजनन करना जलवायु परिवर्तन के प्रति एक महत्वपूर्ण अनुकूलन है, लेकिन इसके साथ गंभीर पारिस्थितिक जोखिम भी जुड़े हुए हैं। भोजन और प्रजनन समय के बीच असंतुलन, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और कुछ प्रजातियों की घटती आबादी यह दिखाती है कि मजबूत मानी जाने वाली प्रजातियाँ भी खतरे में हैं। यह स्थिति तत्काल संरक्षण कदमों और वैश्विक जलवायु कार्रवाई की आवश्यकता को साफ़ तौर पर सामने रखती है।