संदर्भ:
16 जनवरी 2026 को भारत सरकार ने अनधिकृत ऑनलाइन सट्टेबाज़ी और जुए के विरुद्ध एक निर्णायक कार्रवाई करते हुए 242 अवैध वेबसाइटों और लिंक को प्रतिबंधित किया है। इसके साथ ही, ऑनलाइन गेमिंग के संवर्धन और विनियमन अधिनियम, 2025 के प्रभावी होने के बाद से अब तक लगभग 7,800 अवैध ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक या निष्क्रिय किया जा चुका है। यह कार्रवाई भारत सरकार द्वारा अवैध ऑनलाइन गतिविधियों पर सख़्त नियंत्रण के उद्देश्य से की गई है।
कानूनी पृष्ठभूमि:
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- यह कार्रवाई ऑनलाइन गेमिंग के संवर्धन और विनियमन अधिनियम, 2025 के लागू होने के पश्चात की गई है। यह अधिनियम संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित होने तथा अगस्त 2025 में राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त करने के बाद विधिवत लागू हुआ।
- इस अधिनियम के अंतर्गत रियल मनी गेमिंग (अर्थात ऐसे सभी ऑनलाइन खेल जिनमें किसी भी रूप में धन की हिस्सेदारी शामिल होती है, चाहे खेल का परिणाम कौशल पर आधारित हो, भाग्य पर आधारित हो अथवा दोनों के संयोजन पर) भारत में पूर्णतः निषिद्ध घोषित किया गया है। इसके साथ ही ऐसे प्लेटफॉर्म्स से संबंधित विज्ञापनों तथा उनसे जुड़े वित्तीय लेन-देन पर भी प्रतिबंध लगाया गया है, और सक्षम प्राधिकारियों को उल्लंघन की स्थिति में कठोर प्रवर्तन कार्रवाई करने का अधिकार प्रदान किया गया है।
- इसके अतिरिक्त, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A सरकार अथवा उसके द्वारा अधिकृत एजेंसियों को राष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन वाली ऑनलाइन सामग्री तक सार्वजनिक पहुंच को अवरुद्ध करने का वैधानिक अधिकार प्रदान करती है, जिसके अंतर्गत सट्टेबाज़ी और जुए से संबंधित वेबसाइटें तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म भी शामिल हैं।
- यह कार्रवाई ऑनलाइन गेमिंग के संवर्धन और विनियमन अधिनियम, 2025 के लागू होने के पश्चात की गई है। यह अधिनियम संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित होने तथा अगस्त 2025 में राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त करने के बाद विधिवत लागू हुआ।
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कार्रवाई के पीछे तर्क:
सरकार ने इस सख़्त नीति को कई आधारों पर उचित ठहराया है:
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- उपभोक्ता संरक्षण: रियल मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म्स से वित्तीय नुकसान, लत और सामाजिक समस्याएं जुड़ी पाई गई हैं, विशेषकर युवाओं और संवेदनशील वर्गों में।
- सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा: विभिन्न रिपोर्टों और आधिकारिक बयानों में यह सामने आया है कि अनियंत्रित गेमिंग अनुभवों के कारण लोगों में लत, मानसिक तनाव और गंभीर परेशानियां बढ़ रही हैं।
- नियामक कमियां: कई अवैध प्लेटफॉर्म विदेशी या अपंजीकृत होते हैं, जो जीएसटी और भारतीय कानूनों के दायरे से बाहर रहते हैं। इससे धन शोधन, अवैध धन हस्तांतरण और उपभोक्ता शिकायत निवारण से जुड़ी गंभीर समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
- घरेलू बचत और परिवारों की सुरक्षा: नीति निर्माताओं और अन्य हितधारकों ने इस बात पर चिंता जताई है कि जोखिम भरे ऑनलाइन सट्टेबाज़ी प्लेटफॉर्म्स के कारण परिवार अपनी जमा पूंजी खो रहे हैं और आर्थिक अस्थिरता बढ़ रही है।
- उपभोक्ता संरक्षण: रियल मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म्स से वित्तीय नुकसान, लत और सामाजिक समस्याएं जुड़ी पाई गई हैं, विशेषकर युवाओं और संवेदनशील वर्गों में।
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नियमन से जुड़ी चुनौतियां:
इन कड़ी कार्रवाइयों के बावजूद, ऑनलाइन अवैध सट्टेबाज़ी और जुए पर नियंत्रण कई संरचनात्मक और तकनीकी चुनौतियों का सामना कर रहा है:
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- यूआरएल बदलना और बचाव रणनीतियां: अवैध संचालक बार-बार डोमेन नाम और होस्टिंग स्थान बदलते रहते हैं, जिससे उन्हें ब्लॉक करना एक निरंतर और जटिल प्रक्रिया बन जाता है।
- विदेशी क्षेत्राधिकार: बड़ी संख्या में प्लेटफॉर्म भारत से बाहर संचालित होते हैं, जिससे कानूनी कार्रवाई और डिजिटल निगरानी कठिन हो जाती है।
- वित्तीय लेन-देन: “म्यूल” खातों और डिजिटल वॉलेट्स के माध्यम से धन को तेज़ी से देश से बाहर भेज दिया जाता है, जिससे धन शोधन और वित्तीय नियंत्रण से जुड़ी चुनौतियां बढ़ जाती हैं।
- यूआरएल बदलना और बचाव रणनीतियां: अवैध संचालक बार-बार डोमेन नाम और होस्टिंग स्थान बदलते रहते हैं, जिससे उन्हें ब्लॉक करना एक निरंतर और जटिल प्रक्रिया बन जाता है।
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निष्कर्ष:
242 अवैध ऑनलाइन सट्टेबाज़ी और जुआ वेबसाइटों को ब्लॉक किया जाना, ऑनलाइन गेमिंग अधिनियम, 2025 के तहत एक महत्वपूर्ण प्रवर्तन कार्रवाई है। यह सरकार की उस व्यापक रणनीति को दर्शाता है जिसका उद्देश्य वित्तीय नुकसान, लत और सामाजिक दुष्प्रभावों पर नियंत्रण करना है। हालांकि, अवैध और विदेशी प्लेटफॉर्म्स की निरंतर मौजूदगी यह स्पष्ट करती है कि डिजिटल शासन के क्षेत्र में चुनौतियां बनी हुई हैं। इनसे निपटने के लिए निरंतर प्रवर्तन, विभिन्न क्षेत्रों के बीच सहयोग और तकनीकी विकास के साथ संतुलित एवं नवोन्मेषी नियामक तंत्र की आवश्यकता होगी।

