हाइपरसोनिक मिसाइल प्रौद्योगिकी
सन्दर्भ:
हाल ही में, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (DRDL) ने हैदराबाद में सक्रिय रूप से शीतित (Actively Cooled) पूर्ण-स्तरीय स्क्रैमजेट कम्बस्टर का दीर्घकालिक सफल परीक्षण किया। यह कम्बस्टर 1,200 सेकंड से अधिक समय तक संचालित हुआ, जो जनवरी 2026 में किए गए 700 सेकंड के पूर्व परीक्षण से अधिक है।
हाइपरसोनिक मिसाइलों के बारे में:
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- हाइपरसोनिक मिसाइलें अत्याधुनिक हथियार हैं, जो मैक 5 से अधिक गति, अर्थात ध्वनि की गति से लगभग पाँच गुना तेज़, से यात्रा करने में सक्षम होती हैं। मिसाइलें अत्यधिक गति और गतिशीलता (मैन्युवरेबिलिटी) के संयोजन के कारण इन्हें रोकना बेहद कठिन होता हैं।
- पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों के विपरीत, जो पूर्वानुमानित मार्ग का अनुसरण करती हैं, हाइपरसोनिक मिसाइलें दिशा बदल सकती हैं और कम ऊँचाई पर उड़ान भर सकती हैं, जिससे रडार और मिसाइल रक्षा प्रणालियों द्वारा इनका पता लगाना कठिन हो जाता है।
- हाइपरसोनिक मिसाइलों का विकास आधुनिक युद्धक रणनीति और वैश्विक सामरिक व्यवस्था को तेजी से बदल रहा है।
- हाइपरसोनिक मिसाइलें अत्याधुनिक हथियार हैं, जो मैक 5 से अधिक गति, अर्थात ध्वनि की गति से लगभग पाँच गुना तेज़, से यात्रा करने में सक्षम होती हैं। मिसाइलें अत्यधिक गति और गतिशीलता (मैन्युवरेबिलिटी) के संयोजन के कारण इन्हें रोकना बेहद कठिन होता हैं।
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हाइपरसोनिक मिसाइलों के प्रकार:
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- हाइपरसोनिक मिसाइलें मुख्यतः दो श्रेणियों में विभाजित किए जाते हैं: हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGVs) और स्क्रैमजेट संचालित हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलें।
- HGVs को रॉकेट की सहायता से प्रक्षेपित किया जाता है, जिसके बाद वे उच्च गति से लक्ष्य की ओर ग्लाइड करते हुए अनिश्चित रूप से दिशा बदल सकते हैं। इसके विपरीत, हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलें स्क्रैमजेट इंजनों द्वारा निरंतर संचालित होती हैं, जो दहन के लिए वायुमंडलीय ऑक्सीजन का उपयोग करती हैं। इससे दीर्घकालिक हाइपरसोनिक उड़ान संभव होती है तथा लंबी दूरी के अभियानों में अधिक ईंधन दक्षता प्राप्त होती है।
- हाइपरसोनिक मिसाइलें मुख्यतः दो श्रेणियों में विभाजित किए जाते हैं: हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGVs) और स्क्रैमजेट संचालित हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलें।
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स्क्रैमजेट इंजन के बारे में:
स्क्रैमजेट (Scramjet) अर्थात “सुपरसोनिक कंबशन रैमजेट” एक उन्नत एयर-ब्रीदिंग इंजन है, जिसमें दहन उस समय होता है जब वायु प्रवाह सुपरसोनिक गति में बना रहता है। पारंपरिक रॉकेटों के विपरीत, स्क्रैमजेट अपने साथ ऑक्सीडाइज़र ले जाने के बजाय वायुमंडलीय ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं, जिससे वे हल्के और अत्यधिक उच्च गति पर अधिक दक्ष बनते हैं।
हालाँकि, ऐसी परिस्थितियों में स्थिर दहन बनाए रखना तकनीकी रूप से अत्यंत चुनौतीपूर्ण होता है। DRDL का सफल परीक्षण इस उन्नत प्रणोदन तकनीक में भारत की बढ़ती विशेषज्ञता को दर्शाता है।
महत्व और सामरिक प्रासंगिकता:
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- 1,200 सेकंड का सफल परीक्षण भारत के हाइपरसोनिक कार्यक्रम के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इस परीक्षण से सक्रिय रूप से शीतित (actively cooled) कम्बस्टर के डिज़ाइन को प्रमाणित किया गया तथा तरल हाइड्रोकार्बन ईंधन और थर्मल बैरियर कोटिंग जैसी स्वदेशी तकनीकों की सफलता को प्रदर्शित किया।
- हाइपरसोनिक तकनीक लंबी दूरी की सटीक प्रहार क्षमता को बढ़ाकर और विदेशी रक्षा प्रणालियों पर निर्भरता कम करके भारत की सामरिक प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती है, जो “आत्मनिर्भर भारत” के लक्ष्य के अनुरूप है।
- 1,200 सेकंड का सफल परीक्षण भारत के हाइपरसोनिक कार्यक्रम के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इस परीक्षण से सक्रिय रूप से शीतित (actively cooled) कम्बस्टर के डिज़ाइन को प्रमाणित किया गया तथा तरल हाइड्रोकार्बन ईंधन और थर्मल बैरियर कोटिंग जैसी स्वदेशी तकनीकों की सफलता को प्रदर्शित किया।
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निष्कर्ष:
अत्यधिक तापमान और उच्च विकास लागत जैसी चुनौतियों के बावजूद, DRDL का यह स्क्रैमजेट परीक्षण एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह भारत को वैश्विक हाइपरसोनिक दौड़ में संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीन जैसे अग्रणी देशों के साथ खड़ा करता है तथा देश की भविष्य की रक्षा तैयारियों को और सुदृढ़ बनाता है।

