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Blog / 11 Jun 2026

हिन्दू कुश हिमालय: शुष्क होता मानसून, बढ़ते संकट

संदर्भ:

हाल ही में, 'इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट' और 'इंस्टीट्यूट ऑफ एटमॉस्फेरिक फिजिक्स' ने संयुक्त रूप से " हिंदू कुश हिमालय मॉनसून आउटलुक 2026" रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में हिंदू कुश हिमालय (HKH) क्षेत्र में मॉनसून के कमजोर या कम बारिश वाला रहने का अनुमान लगाया गया है।

रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष:

        • हिंदू कुश हिमालय मॉनसून आउटलुक 2026 के अनुसार अल नीनो (El Niño) की स्थिति दक्षिण एशियाई मॉनसून को कमजोर कर सकती है, जिससे बारिश कम हो सकती है। सामान्य से अधिक तापमान के कारण गर्मी का तनाव और पानी की कमी बढ़ने की आशंका है।
        • शीतकाल में हिमपात का अल्प स्थायित्व मौसमी जल-संचयन को कम कर देता है, जिससे मानसूनी वर्षा तथा भूजल पर निर्भरता और अधिक बढ़ जाती है। यद्यपि समग्र रूप से शुष्क परिस्थितियों की सम्भावना है, तथापि अल्प अवधि की तीव्र वर्षा की घटनाएँ इस क्षेत्र में बाढ़ तथा भूस्खलन को जन्म दे सकती हैं।

Hotter, drier Hindu Kush Himalaya monsoon likely in 2026, ICIMOD warns of  dual threat of droughts and flash floods

हिंदू कुश हिमालय (HKH) क्षेत्र के बारे में:

        • हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र आठ देशों, अफ़गानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, चीन, भारत, म्यांमार, नेपाल और पाकिस्तान में 3,500 किलोमीटर तक फैला हुआ है।
        • इसे "एशिया का वॉटर टावर" कहा जाता है। ध्रुवीय क्षेत्रों के बाहर यहाँ बर्फ़ का सबसे बड़ा भंडार है और यह गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु जैसी प्रमुख नदियों को पानी देता है, जिससे लगभग 1.9 अरब लोगों को जीवन मिलता है।

कमज़ोर मॉनसून के कारण:

अल नीनो की स्थिति (जिसमें प्रशांत महासागर का पानी गर्म हो जाता है) मॉनसून को कमज़ोर करने वाला मुख्य कारण है। उत्तरी गोलार्ध में सामान्य से कम बर्फ़बारी भी बारिश कम होने की एक वजह है। हालाँकि, 'पॉज़िटिव इंडियन ओशन डाइपोल' (IOD) की स्थिति इन प्रभावों को कुछ हद तक कम कर सकती है, लेकिन इसे लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।

पर्यावरण से जुड़ी चिंताएँ क्या हैं?

हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र दुनिया के औसत तापमान की तुलना में लगभग दोगुनी तेज़ी से गर्म हो रहा है, जिससे ग्लेशियर तेज़ी से पिघल रहे हैं और ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOFs) का ख़तरा बढ़ रहा है। लंबे समय में ग्लेशियर के नुकसान से पानी की सुरक्षा पर ख़तरा पैदा हो सकता है, भले ही थोड़े समय के लिए नदियों में पानी का बहाव बढ़ जाए। यह क्षेत्र जैव-विविधता से भरपूर है और पर्यावरण के लिहाज़ से बहुत संवेदनशील भी है।

भारत के लिए इसका क्या महत्व है?

भारत खेती, पनबिजली और पीने के पानी के लिए HKH क्षेत्र से निकलने वाली नदियों पर बहुत ज़्यादा निर्भर है। मॉनसून के पैटर्न में बदलाव और ग्लेशियर के पिघलने का सीधा असर पानी की उपलब्धता और आपदा के जोखिम पर पड़ता है, इसलिए जलवायु के अनुसार ढलना और जल प्रबंधन बहुत ज़रूरी हो जाता है।

निष्कर्ष:

हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में मॉनसून के दौरान कम बारिश होने से जलवायु से जुड़े जोखिम कम नहीं होते हैं। बढ़ता तापमान, ग्लेशियर का पीछे हटना और बहुत ज़्यादा बारिश की घटनाएं पानी की सुरक्षा और लोगों की आजीविका के लिए लगातार ख़तरा बनी हुई हैं, जिसके लिए मज़बूत तैयारी और आपसी सहयोग की ज़रूरत है।

 

 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

हिंदू कुश हिमालय मॉनसून आउटलुक 2026 क्या है?

यह 'इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट' और 'इंस्टीट्यूट ऑफ एटमॉस्फेरिक फिजिक्स' की एक रिपोर्ट है, जिसमें हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में कमजोर या कम बारिश वाले मॉनसून का अनुमान लगाया गया है।

2026 का मॉनसून कमजोर क्यों रहने की उम्मीद है?

इसके मुख्य कारणों में अल-नीनो (El Niño) की संभावित स्थिति, सामान्य से कम बर्फबारी और समुद्र-वायुमंडल के बीच होने वाली प्रक्रियाओं (जैसे इंडियन ओशन डाइपोल) में बदलाव शामिल हैं।

HKH क्षेत्र एशिया के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

यह 8 देशों में 3,500 किलोमीटर तक फैला है और इसे "एशिया का वॉटर टावर" कहा जाता है। यह गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु जैसी प्रमुख नदियों को पानी देता है और लगभग 1.9 अरब लोगों की जरूरतों को पूरा करता है।

क्या कम बारिश वाले मॉनसून से भी आपदाएं आ सकती हैं?

हाँ। कम बारिश के बावजूद, कम समय में बहुत तेज बारिश से बाढ़, भूस्खलन और ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOFs) जैसी आपदाएं आ सकती हैं।

भारत के लिए इसका क्या महत्व है?

भारत खेती, पीने के पानी और पनबिजली के लिए काफी हद तक HKH नदी प्रणालियों पर निर्भर है, इसलिए मॉनसून में बदलाव और ग्लेशियरों के पिघलने का सीधा असर पानी की सुरक्षा और आपदा के जोखिम पर पड़ता है।

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