संदर्भ:
हाल ही में, उत्तराखंड के राज्य पक्षी हिमालयी मोनाल ने वैज्ञानिकों का ध्यान आकर्षित किया है। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय (HBGU) के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए दो पाँच-वर्षीय अध्ययनों में मानवजनित शोर और जलवायु परिवर्तन के कारण इसके व्यवहार तथा उपयुक्त आवास पर पड़ने वाले उभरते प्रभावों को रेखांकित किया गया है।
हिमालयी मोनाल के बारे में:
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- हिमालयी मोनाल (Lophophorus impejanus) एक आकर्षक हिमालयी तीतर और भूमि पर रहने वाला पक्षी है, जो हिमालयी क्षेत्र में पाया जाता है। इसका वितरण जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और सिक्किम सहित विभिन्न हिमालयी क्षेत्रों में है।
- यह सामान्यतः उप-अल्पाइन एवं अल्पाइन क्षेत्रों, ओक मिश्रित वनों, शंकुधारी वनों, रोडोडेंड्रॉन झाड़ियों तथा पर्वतीय घासभूमियों में पाया जाता है। शोध के अनुसार यह लगभग 2,400–4,500 मीटर की ऊँचाई तक पाया जा सकता है और मौसम के अनुसार ऊँचाई बदलता है।
- राज्य पक्षी: उत्तराखंड
- IUCN स्थिति: लीस्ट कंसर्न (Least Concern)
- आवास: हिमालयी वन, अल्पाइन घास के मैदान और उच्च ऊँचाई वाले पारिस्थितिकी तंत्र
- वितरण: हिमालयी क्षेत्र
- राज्य पक्षी: उत्तराखंड
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मानवजनित शोर का प्रभाव:
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- शोधकर्ताओं ने केदारनाथ कस्तूरी मृग अभयारण्य के दो क्षेत्रों में मोनाल की आबादी की तुलना की:
- मदमहेश्वर घाटी: अपेक्षाकृत शांत और कम मानवीय हस्तक्षेप वाला क्षेत्र, जहाँ सड़कें नहीं हैं।
- चोपता घाटी: यहाँ पर्यटन, तीर्थयात्रा, यातायात और मानवीय गतिविधियाँ अधिक हैं।
- मदमहेश्वर घाटी: अपेक्षाकृत शांत और कम मानवीय हस्तक्षेप वाला क्षेत्र, जहाँ सड़कें नहीं हैं।
- निष्क्रिय ध्वनिक निगरानी (Passive Acoustic Monitoring) के माध्यम से शोधकर्ताओं ने अलग-अलग मौसमों में मोनाल की सैकड़ों आवाज़ों को रिकॉर्ड किया। पाया गया कि अधिक शोर वाले चोपता घाटी में मोनाल अपेक्षाकृत शांत क्षेत्रों में रहने वाले पक्षियों की तुलना में अधिक आवृत्ति (Higher Frequency) और अधिक तीव्रता (Higher Amplitude) वाली आवाज़ों का उपयोग कर रहे थे।
- यह दर्शाता है कि मोनाल शोर वाले वातावरण के अनुसार अपनी ध्वनि में अनुकूलन या परिवर्तन करने की क्षमता रखता है।
- शोधकर्ताओं ने केदारनाथ कस्तूरी मृग अभयारण्य के दो क्षेत्रों में मोनाल की आबादी की तुलना की:
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यह क्यों महत्वपूर्ण है?
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- मोनाल की आवाज़ें संचार, सामाजिक व्यवहार और प्रजनन के लिए महत्वपूर्ण होती हैं। नर मोनाल की प्रजनन संबंधी आवाज़ें मादाओं को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। बढ़ता हुआ मानवजनित शोर संभावित रूप से ध्वनि अवरोध (Acoustic Masking) पैदा कर सकता है, जिससे पक्षियों के बीच संचार अधिक कठिन हो सकता है।
- हालाँकि, शोधकर्ताओं ने अभी तक यह स्थापित नहीं किया है कि आवाज़ों में होने वाले इन परिवर्तनों के कारण प्रजनन सफलता में प्रत्यक्ष कमी आ रही है।
- मोनाल की आवाज़ें संचार, सामाजिक व्यवहार और प्रजनन के लिए महत्वपूर्ण होती हैं। नर मोनाल की प्रजनन संबंधी आवाज़ें मादाओं को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। बढ़ता हुआ मानवजनित शोर संभावित रूप से ध्वनि अवरोध (Acoustic Masking) पैदा कर सकता है, जिससे पक्षियों के बीच संचार अधिक कठिन हो सकता है।
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निष्कर्ष:
हिमालयी मोनाल का उदाहरण यह दर्शाता है कि संरक्षण केवल किसी प्रजाति की संख्या में गिरावट को रोकने तक सीमित नहीं होना चाहिए। ध्वनि प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन के कारण आवास में बदलाव और आवास विखंडन किसी प्रजाति के संकटग्रस्त होने से पहले ही उसके व्यवहार तथा पारिस्थितिक संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए, हिमालयी जैव विविधता के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए पर्यटन गतिविधियों का उचित प्रबंधन करने के साथ-साथ प्राकृतिक आवासों और उनके बीच संपर्क (Habitat Connectivity) को बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।

