होम > Blog

Blog / 20 Jun 2026

भारत में हीटवेव के कारण सतही ओज़ोन प्रदूषण में गंभीर वृद्धि

संदर्भ:

हाल ही में क्लीन एयर (Clean Air) पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि भारत में गंभीर हीटवेव (लू) के कारण भू-स्तरीय (सतही) ओज़ोन प्रदूषण में तीव्र वृद्धि हुई है। केवल वर्ष 2024 में ही, अध्ययन के अनुसार भारत में हीटवेव-प्रेरित ओज़ोन प्रदूषण से जुड़े 830 से अधिक लोगों की मृत्यु हुई।

भू-स्तरीय (सतही) ओज़ोन क्या है?

ओज़ोन (O) दो रूपों में पाई जाती है:

समतापमंडलीय ओज़ोन (पृथ्वी से 15–50 किमी ऊपर)

o   ओज़ोन परत का निर्माण करती है।

o   पृथ्वी को हानिकारक पराबैंगनी (UV) विकिरण से बचाती है।

o   प्राकृतिक "सूर्य कवच" (Sunshield) के रूप में कार्य करती है।

भू-स्तरीय (क्षोभमंडलीय) ओज़ोन

o एक हानिकारक वायु प्रदूषक है।
o यह सीधे उत्सर्जित नहीं होती, बल्कि निम्नलिखित तत्वों से जुड़ी प्रकाश-रासायनिक (Photochemical) अभिक्रियाओं के माध्यम से बनती है:

·        नाइट्रोजन ऑक्साइड (NO)

·        वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (VOCs)

·        सूर्य का प्रकाश और उच्च तापमान

इस प्रकार, ऊपरी वायुमंडल में पाई जाने वाली संरक्षणकारी ओज़ोन के विपरीत, भू-स्तरीय ओज़ोन एक द्वितीयक प्रदूषक (Secondary Pollutant) है, जिसका मानव स्वास्थ्य और पारिस्थितिक तंत्र पर विषाक्त प्रभाव पड़ता है।

Heatwaves Trigger Severe Surface Ozone Pollution in India

अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष:

हीटवेव से ओज़ोन स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि होती है

उच्च तापमान ओज़ोन बनाने वाली रासायनिक अभिक्रियाओं को तेज कर देता है।
हीटवेव वाले दिनों में ओज़ोन की सांद्रता में तीव्र वृद्धि होती है।
भारत के विभिन्न क्षेत्रों में इसका स्तर अक्सर सुरक्षित सीमा से अधिक हो जाता है।

भारत में पहले से ही असुरक्षित आधारभूत प्रदूषण स्तर

सुरक्षित स्तर: लगभग 30 पार्ट्स पर बिलियन (ppb) (लगभग 60 µg/m³)
भारत का पृष्ठभूमि स्तर: लगभग 50–55 ppb, जो पहले से ही अधिक है।
हीटवेव के दौरान यह स्तर और बढ़ जाता है तथा अक्सर WHO के दिशा-निर्देशों से अधिक हो जाता है।

क्षेत्रीय हॉटस्पॉट

उत्तर-पश्चिम भारत और इंडो-गंगा मैदान (IGP) में ओज़ोन की सांद्रता सबसे अधिक पाई गई।
इन क्षेत्रों में निम्नलिखित कारकों का संयोजन पाया जाता है:

o उच्च प्रदूषण भार
o सघन जनसंख्या
o हीटवेव की तीव्रता

हीटवेव ओज़ोन सांद्रता को क्यों बढ़ाती है?

हीटवेव प्रदूषण के लिए एक रासायनिक प्रवर्धक (Chemical Amplifier) के रूप में कार्य करती है, जिसके कारण:

उच्च तापमान में प्रकाश-रासायनिक अभिक्रियाएँ तेजी से होती हैं।
सूर्य के तीव्र प्रकाश से ओज़ोन निर्माण बढ़ता है।
वायुमंडलीय स्थिरता (Atmospheric Stagnation) प्रदूषकों के फैलाव को कम कर देती है।
शहरी क्षेत्रों से निकलने वाले NO
और VOCs ओज़ोन निर्माण के अग्रदूत (Precursors) के रूप में कार्य करते हैं।
जलवायु परिवर्तन के कारण अत्यधिक गर्मी की घटनाओं की आवृत्ति बढ़ रही है।

व्यापक प्रभाव:

      • जलवायुवायु प्रदूषण संबंध (Climate–Air Pollution Nexus): हीटवेव और ओज़ोन प्रदूषण एक-दूसरे को सुदृढ़ करते हैं, जिससे एक संयुक्त खतरा (Compound Hazard) उत्पन्न होता है और मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है।
      • कृषि को नुकसान: भू-स्तरीय ओज़ोन पौधों के ऊतकों को क्षति पहुँचाकर तथा प्रकाश-संश्लेषण की प्रक्रिया को कम करके फसल उत्पादन घटाती है।
      • शहरी संवेदनशीलता: उत्तरी भारत के अत्यधिक प्रदूषित शहरी समूह (Urban Clusters) गर्मी और विषाक्त वायु, दोनों के दोहरे दबाव का सामना कर रहे हैं।

नीतिगत सुझाव:

इस उभरते हुए खतरे से निपटने के लिए अध्ययन में निम्नलिखित उपायों पर बल दिया गया है:

हीटवेव के दौरान वास्तविक समय (Real-time) में ओज़ोन की निगरानी।
हीटवेव स्वास्थ्य चेतावनियों (IMD एवं CPCB) में ओज़ोन को शामिल करना।
परिवहन और उद्योगों से होने वाले NO
तथा VOC उत्सर्जन में कमी लाना।
गर्मी की तीव्रता कम करने हेतु शहरी हरित क्षेत्र (Urban Green Cover) का विस्तार।
एकीकृत हीटवायु प्रदूषण प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (Early Warning System) का विकास।

निष्कर्ष:

अध्ययन स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि हीटवेव केवल तापीय (Thermal) खतरे नहीं हैं, बल्कि वे विषाक्त वायु प्रदूषण की घटनाओं, विशेष रूप से भू-स्तरीय ओज़ोन निर्माण, को भी बढ़ावा देती हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण हीटवेव की आवृत्ति और तीव्रता दोनों में वृद्धि हो रही है। ऐसे में यदि शमन (Mitigation) उपायों को तत्काल और प्रभावी रूप से सुदृढ़ नहीं किया गया, तो भारत को गर्मी और वायु प्रदूषण के संयुक्त दबाव का बढ़ता हुआ बोझ झेलना पड़ सकता है।

 

Aliganj Gomti Nagar Prayagraj