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Blog / 26 Aug 2025

जीएसटी में व्यापक बदलाव पर मंत्रिसमूह की रिपोर्ट

संदर्भ:

हाल ही में जीएसटी परिषद द्वारा गठित मंत्रिसमूह (जीओएम) ने भारत के जीएसटी दर ढांचे में व्यापक बदलाव से संबंधित केंद्र सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है, जिसमें 12% और 28% के स्लैब को समाप्त करने की सिफारिश की गई है। यह प्रस्ताव अब अंतिम अनुमोदन के लिए जीएसटी परिषद के पास भेजा जाएगा।

प्रमुख सिफारिशें:

·        दो-स्लैब संरचना: केवल 5% (योग्यता श्रेणी) और 18% (मानक श्रेणी) की दरें बरकरार रखी जाएंगी।

·        विशेष 40% स्लैब: तंबाकू और ऑनलाइन गेमिंग जैसी विलासिता की वस्तुओं पर लागू होगा।

·        स्लैब युक्तिकरण: 12% दर वाले ब्रैकेट की 99% वस्तुओं को 5% पर और 90% वस्तुओं को 28% से घटाकर 18% पर स्थानांतरित करने की सिफारिश।

रणनीतिक निहितार्थ:

·        उपभोक्ता राहत: पैकेज्ड खाद्य पदार्थों और घरेलू सामान जैसी दैनिक आवश्यक वस्तुओं पर कर का बोझ कम होगा।

·        आर्थिक प्रोत्साहन: दिवाली से पहले मांग में वृद्धि और वैश्विक चुनौतियों से निपटने में मदद मिलने की सम्भावना है।

·        सरलीकृत कराधान: अनुपालन लागत और वर्गीकरण संबंधी विवादों में कमी लाता है, तथा प्रशासनिक दक्षता में सुधार करता है।

gst reforms in india

मंत्रिसमूह की भूमिका और कार्यप्रणाली:

  • मंत्रिसमूह (जीओएम), जीएसटी परिषद द्वारा विशेष रूप से गठित एक पैनल है, जिसका उद्देश्य जटिल विषयों का विश्लेषण करना, संबंधित हितधारकों से परामर्श करना तथा नीतिगत सुझाव प्रदान करना होता है।
  • बिहार के उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में दरों के युक्तिकरण पर गठित जीओएम में पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, केरल, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गोवा जैसे राज्यों के वित्त मंत्री शामिल हैं।
  • हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने व्यापक जीएसटी सुधारों के केंद्र के प्रस्ताव पर पैनल को जानकारी दी।

जीएसटी के विषय में:

  • GST एक व्यापक, बहु-चरणीय, और गंतव्य-आधारित अप्रत्यक्ष कर है, जो पूरे भारत में वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर लागू होता है।
  • 1 जुलाई 2017 को लागू हुआ GST भारत के कर ढांचे को सरल बनाने के उद्देश्य से लाया गया था। इसने कई अप्रत्यक्ष करों को प्रतिस्थापित किया और एक मूल्य वर्धित कर प्रणाली के रूप में कार्य करता है, जो दोहरे मॉडल (CGST + SGST / IGST) पर आधारित है। इसकी दरों का निर्धारण GST परिषद द्वारा किया जाता है।
  • GST ने उत्पाद शुल्क, VAT और सेवा कर जैसे विभिन्न करों को एकीकृत कर, एक एकल कर प्रणाली प्रदान की, जिससेएक राष्ट्र, एक करकी अवधारणा को सुदृढ़ किया गया।

संवैधानिक समर्थन:

  • संविधान संशोधन: 101वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2016
  • लागू तिथि: 1 जुलाई 2017
  • प्रावधान: केंद्र और राज्य दोनों को GST लगाने का अधिकार

प्रमुख उपलब्धियाँ:

  • वित्त वर्ष 2024–25 में GST ने ₹22.08 लाख करोड़ का अब तक का सर्वाधिक संग्रह दर्ज किया। 1.51 करोड़ से अधिक सक्रिय करदाता, बढ़ती औपचारिकता को दर्शाते हैं।
  • ई-वे बिल, ई-इनवॉइसिंग और ICEGATE एकीकरण जैसे डिजिटल उपकरणों ने अनुपालन और रिफंड प्रक्रियाओं में सुधार किया है।
  • व्यवसायों के लिए GST ने बहुविध करों को समाप्त किया, रसद लागत को कम किया और आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुव्यवस्थित किया।

चुनौतियाँ:

  • लाभों के बावजूद, GST को जटिल कर स्लैब, उलटे शुल्क ढांचे और पेट्रोलियम एवं अल्कोहल को कर दायरे से बाहर रखने जैसी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
  • GST अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) कई राज्यों में निष्क्रिय बना हुआ है, जिससे विवाद समाधान में देरी हो रही है।
  • प्रक्रियात्मक अस्पष्टताएं और नियमों में बार-बार होने वाले परिवर्तन अनुपालन को प्रभावित करते हैं।

निष्कर्ष:

मंत्रिसमूह की रिपोर्ट "जीएसटी 2.0" की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें एक सरल और विकासोन्मुख कर प्रणाली का प्रस्ताव है। यदि जीएसटी परिषद इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो ये सुधार व्यापार में आसानी बढ़ाएंगे और आत्मनिर्भर भारत के तहत उपभोग-आधारित आर्थिक पुनरुद्धार में योगदान देंगे।

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