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Blog / 19 Oct 2026

खगोलविदों ने हरे-सफेद बौने तारे WD J1330+6435 की खोज की

संदर्भ:

हाल ही में खगोलविदों ने एक ऐसे तारे की पहचान की है, जो असामान्य रूप से पीले-हरे रंग की चमक बिखेरता है। इस तारे का नाम WD J1330+6435 है। यह एक सफेद बौना (White Dwarf) है। इसकी वायुमंडलीय परतों में मौजूद सोडियम और हीलियम के बीच होने वाली अंतःक्रिया के कारण यह असामान्य रंग दिखाई देता है। इस खोज से पता चलता है कि परमाणुओं के व्यवहार और प्रकाश के अध्ययन से ब्रह्मांड की कई अनोखी घटनाओं को समझा जा सकता है।

सफेद बौना क्या है?

      • सफेद बौना एक अत्यंत सघन और गर्म तारकीय अवशेष है, जो सूर्य जैसे कम या मध्यम द्रव्यमान वाले तारे के परमाणु ईंधन समाप्त होने और अपनी बाहरी परतों को छोड़ देने के बाद बचता है। इसका निर्माण तब होता है, जब तारा विकसित होकर लाल दानव (Red Giant) बन जाता है और अपने बाहरी पदार्थ को अंतरिक्ष में उत्सर्जित कर देता है। इस प्रक्रिया में अक्सर एक ग्रहीय नीहारिका (Planetary Nebula) का निर्माण होता है।
      • सफेद बौने का द्रव्यमान सामान्यतः सूर्य के द्रव्यमान के बराबर होता है, लेकिन इसका आकार पृथ्वी के समान होता है। इस कारण यह ब्रह्मांड की सबसे सघन वस्तुओं में से एक है। यह परमाणु संलयन (Nuclear Fusion) के माध्यम से ऊर्जा उत्पन्न नहीं करता है। इसके बजाय, यह इलेक्ट्रॉन अपभ्रष्टता दाब (Electron Degeneracy Pressure) के कारण गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में और अधिक संकुचित होने से बचा रहता है। यह दाब पाउली अपवर्जन सिद्धांत (Pauli Exclusion Principle) का परिणाम है।
      • चंद्रशेखर सीमा (Chandrasekhar Limit), जो सूर्य के द्रव्यमान की लगभग 1.4 गुना है, उस अधिकतम द्रव्यमान को दर्शाती है जिसे एक सफेद बौना स्थिर अवस्था में सहन कर सकता है। इस सीमा से अधिक द्रव्यमान होने पर, उपयुक्त परिस्थितियों में, यह टाइप Ia सुपरनोवा (Type Ia Supernova) विस्फोट को जन्म दे सकता है। अरबों वर्षों में सफेद बौना धीरे-धीरे ठंडा होता जाता है और सैद्धांतिक रूप से अंततः काला बौना (Black Dwarf) बन सकता है। हालाँकि, ब्रह्मांड की आयु अभी इतनी अधिक नहीं हुई है कि कोई काला बौना बन पाया हो।

The cool white dwarf WDJ1330+6435 has accreted sodium-rich rocky material from its planetary system into its atmosphere. The immense atmospheric density causes the sodium to absorb light over a broad range of yellow, orange, and red wavelengths, giving the WDJ1330+6435 a ghostly green appearance (left). The cool white dwarf WDJ0902+2010 has a deep convection zone within its helium dominated outer envelope. The convection zone has reached the white dwarf core, lifting interior carbon to the surface, and forming carbon molecules. These C2 molecules strongly absorb light across the optical range, including blue, green, and yellow wavelengths, resulting in WDJ0902+2010 appearing pink to the human eye (right)

यह तारा हरा क्यों दिखाई देता है?

वायुमंडल में अत्यधिक घनत्व की परिस्थितियों के कारण सोडियम और हीलियम के बीच होने वाली अंतःक्रिया सोडियम के प्रकाश-अवशोषण स्पेक्ट्रम को बदल देती है। पीली, नारंगी और लाल रंग की कुछ तरंगदैर्घ्यों का अधिक अवशोषण होने से तारा पीले-हरे रंग का दिखाई देता है। स्पेक्ट्रोस्कोपी की सहायता से वैज्ञानिक तारों के वायुमंडल में मौजूद तत्त्वों की पहचान करते हैं और उनके विकास की प्रक्रिया को समझते हैं।

अन्य तारकीय अवशेष:

      • न्यूट्रॉन तारा: न्यूट्रॉन तारे का निर्माण तब होता है, जब पर्याप्त द्रव्यमान वाले तारे का क्रोड (Core) संकुचित होकर ढह जाता है। यह प्रक्रिया सामान्यतः सुपरनोवा विस्फोट के दौरान होती है। इस प्रक्रिया में प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन मिलकर न्यूट्रॉन का निर्माण करते हैं। एक न्यूट्रॉन तारे में सूर्य से भी अधिक द्रव्यमान लगभग 20 किलोमीटर व्यास वाले क्षेत्र में समाहित हो सकता है। पल्सर (Pulsar) नियमित अंतराल पर विकिरण की किरणें उत्सर्जित करते हैं, जबकि मैग्नेटर (Magnetar) में अत्यंत शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र पाया जाता है।
      • ब्लैक होल: ब्लैक होल का निर्माण तब होता है, जब किसी तारे का क्रोड इतना अधिक संकुचित होकर ढह जाता है कि न्यूट्रॉन तारे के पदार्थ का दाब भी उसे स्थिर रखने में सक्षम नहीं होता। ब्लैक होल के घटना क्षितिज (Event Horizon) के भीतर पलायन वेग प्रकाश की गति से अधिक होता है। श्वार्ज़शिल्ड त्रिज्या (Schwarzschild Radius) एक ऐसे ब्लैक होल के घटना क्षितिज की त्रिज्या को दर्शाती है, जो घूर्णन नहीं करता और जिस पर कोई विद्युत आवेश नहीं होता।

तुलना:

विशेषता

सफेद बौना

न्यूट्रॉन तारा

ब्लैक होल

सहारा देने वाला बल या दाब

इलेक्ट्रॉन अपभ्रष्टता दाब

न्यूट्रॉन तारे के पदार्थ का दाब

पारंपरिक मॉडल में कोई ज्ञात दाब गुरुत्वीय संकुचन को नहीं रोक पाता

अनुमानित आकार

पृथ्वी के आकार के समान

शहर के आकार के समान

घटना क्षितिज द्वारा परिभाषित

प्रमुख अवधारणा

चंद्रशेखर सीमा

टोलमैन-ओपेनहाइमर-वोल्कॉफ (TOV) सीमा

घटना क्षितिज

निष्कर्ष:

हरे रंग की आभा वाला यह सफेद बौना दर्शाता है कि स्थापित भौतिक नियम भी ब्रह्मांड में अप्रत्याशित घटनाओं को जन्म दे सकते हैं। यह खोज तारों के जीवन चक्र और उनके विकास की प्रक्रिया के बारे में हमारी समझ को और व्यापक बनाती है।

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