ग्रेट निकोबार मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना
संदर्भ:
हाल ही में ग्रेट निकोबार मेगा-इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना राजनीतिक और सामरिक चर्चा का विषय बन गई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता ने इसके पर्यावरणीय और जनजातीय प्रभावों को लेकर चिंता व्यक्त की। रक्षा विशेषज्ञों ने इस परियोजना का दृढ़ समर्थन करते हुए इसे भारत की समुद्री सुरक्षा, आर्थिक विकास तथा हिंद महासागर क्षेत्र में मलक्का जलडमरूमध्य के निकट भारत की सामरिक उपस्थिति को मजबूत करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है।
ग्रेट निकोबार मेगा-इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना के बारे में:
₹92,000 करोड़ की ग्रेट निकोबार द्वीप विकास परियोजना अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के कैंपबेल बे में प्रस्तावित है। इस परियोजना में एक ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल, ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, टाउनशिप विकास तथा विद्युत अवसंरचना का निर्माण शामिल राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने सख्त पर्यावरणीय शर्तों के अनुपालन के अधीन इस परियोजना को मंजूरी प्रदान कर दी है।
परियोजना का सामरिक महत्व:
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- रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना महत्वपूर्ण वैश्विक समुद्री मार्गों के निकट स्थित होने के कारण अत्यधिक सामरिक महत्व रखती है। यह मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca) के समीप स्थित है, जो विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों (Maritime Chokepoints) में से एक है। चीन के लगभग 80% तेल आयात तथा उसके व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है।
- सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह परियोजना पूर्वी हिंद महासागर में समुद्री यातायात की निगरानी करने की भारत की क्षमता को मजबूत करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रेट निकोबार में विकसित अवसंरचना भारत की वायु एवं समुद्री क्षेत्रों में डोमेन जागरूकता (Domain Awareness) को काफी बढ़ाएगी और क्षेत्रीय नौसैनिक गतिविधियों की बेहतर निगरानी सुनिश्चित करेगी।
- यह स्थान चीन की बढ़ती समुद्री उपस्थिति और उसकी “स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स” (String of Pearls) रणनीति के संदर्भ में भी भारत को अधिक मजबूत सामरिक स्थिति प्रदान करता है। इस रणनीति के अंतर्गत पाकिस्तान का ग्वादर बंदरगाह, श्रीलंका का हम्बनटोटा बंदरगाह तथा म्यांमार का क्याउकफ्यू बंदरगाह जैसे महत्वपूर्ण बंदरगाह शामिल हैं।
- रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना महत्वपूर्ण वैश्विक समुद्री मार्गों के निकट स्थित होने के कारण अत्यधिक सामरिक महत्व रखती है। यह मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca) के समीप स्थित है, जो विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों (Maritime Chokepoints) में से एक है। चीन के लगभग 80% तेल आयात तथा उसके व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है।
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चिंताएँ और आलोचना:
विपक्षी नेताओं ने इस परियोजना की आलोचना करते हुए इसे निकोबार क्षेत्र के पारिस्थितिक संतुलन और स्वदेशी जनजातीय समुदायों के लिए संभावित खतरा बताया है। चिंताएँ मुख्य रूप से वनों की कटाई, जैव विविधता की हानि तथा जनजातीय विरासत पर पड़ने वाले जोखिमों से संबंधित हैं। पर्यावरणीय संगठनों का भी तर्क है कि बड़े पैमाने पर अवसंरचना विकास से द्वीपों के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
निष्कर्ष:
ग्रेट निकोबार परियोजना पर्यावरणीय चिंताओं, स्वदेशी समुदायों के अधिकारों और राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकताओं के जटिल समन्वय का प्रतिनिधित्व करती है। भारत के लिए यह केवल एक अवसंरचना परियोजना नहीं, बल्कि समुद्री प्रभुत्व और क्षेत्रीय प्रभाव को मजबूत करने हेतु एक सामरिक निवेश है। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पर्यावरणीय संरक्षण और सामरिक आवश्यकताओं के बीच संतुलन किस प्रकार स्थापित किया जाता है, ताकि विकास भारत की दीर्घकालिक हिंद-प्रशांत दृष्टि के अनुरूप सतत एवं सुरक्षा-केंद्रित बना रहे।

