संदर्भ:
हाल ही में, राजस्थान के जैसलमेर स्थित डेजर्ट नेशनल पार्क (Desert National Park) में दो कैप्टिव-ब्रेड नर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIBs) को जंगल में छोड़ा गया। यह प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के तहत पुनः जंगलीकरण (Rewilding) चरण की शुरुआत का प्रतीक है।
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के बारे में:
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- ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) दुनिया के सबसे भारी उड़ने वाले पक्षियों में से एक है और मुख्य रूप से भारत के शुष्क एवं अर्ध-शुष्क घासभूमि पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ा हुआ है। यह एक स्थलीय और दिवाचर पक्षी है तथा इसे स्थानीय रूप से गोडावण/गोडावन के नाम से जाना जाता है।
- राजस्थान का थार मरुस्थल इसकी बची हुई सबसे बड़ी आबादी का आश्रय स्थल है, विशेष रूप से जैसलमेर और बाड़मेर के आसपास। गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश में इसकी छोटी और बिखरी हुई आबादियाँ पाई जाती हैं।
- GIB घासभूमि पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक फ्लैगशिप और संकेतक प्रजाति (Indicator Species) है। इसलिए इसका संरक्षण केवल इस प्रजाति के लिए ही नहीं, बल्कि भारत की संवेदनशील घासभूमि जैव-विविधता के संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण है।
- ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) दुनिया के सबसे भारी उड़ने वाले पक्षियों में से एक है और मुख्य रूप से भारत के शुष्क एवं अर्ध-शुष्क घासभूमि पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ा हुआ है। यह एक स्थलीय और दिवाचर पक्षी है तथा इसे स्थानीय रूप से गोडावण/गोडावन के नाम से जाना जाता है।
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प्रमुख प्रारंभिक परीक्षा तथ्य:
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- वैज्ञानिक नाम: आर्डियोटिस नाइग्रिसेप्स (Ardeotis nigriceps)
- कुल: ओटिडिडे (Otididae)
- स्थानीय नाम: गोडावण/गोडावन
- IUCN: अति संकटग्रस्त (Critically Endangered)
- वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: अनुसूची-I
- CITES: परिशिष्ट-I
- CMS: परिशिष्ट-I
- राजकीय पक्षी: राजस्थान
- प्रमुख आवास: शुष्क एवं अर्ध-शुष्क घासभूमियाँ
- वैज्ञानिक नाम: आर्डियोटिस नाइग्रिसेप्स (Ardeotis nigriceps)
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यह क्यों महत्वपूर्ण है?
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- ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (Ardeotis nigriceps) एक अति संकटग्रस्त (Critically Endangered) पक्षी है और भारत की सबसे अधिक खतरे वाली प्रजातियों में से एक है। इसकी जंगली आबादी केवल लगभग 110–150 पक्षियों की होने का अनुमान है। राजस्थान का थार क्षेत्र इसका सबसे महत्वपूर्ण बचा हुआ आवास है। वर्ष 2026 के एक आकलन में राजस्थान में लगभग 130 GIBs होने का अनुमान लगाया गया, साथ ही यह भी बताया गया कि अब यह प्रजाति अपने पूर्व के आवास के केवल एक छोटे हिस्से तक सीमित रह गई है।
- हालिया रिलीज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत के संरक्षण-प्रजनन कार्यक्रम के तहत कैप्टिव-ब्रेड GIBs को उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ने का पहला पायलट प्रयास है। वैज्ञानिक इन पक्षियों की निगरानी करेंगे ताकि उनके जीवित रहने, व्यवहार, आवास के उपयोग और अंततः जंगल में प्रजनन करने की क्षमता का आकलन किया जा सके। इस प्रक्रिया से प्राप्त अनुभव भविष्य में किए जाने वाले रिलीज कार्यक्रमों को बेहतर बनाने में मदद करेगा।
- ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (Ardeotis nigriceps) एक अति संकटग्रस्त (Critically Endangered) पक्षी है और भारत की सबसे अधिक खतरे वाली प्रजातियों में से एक है। इसकी जंगली आबादी केवल लगभग 110–150 पक्षियों की होने का अनुमान है। राजस्थान का थार क्षेत्र इसका सबसे महत्वपूर्ण बचा हुआ आवास है। वर्ष 2026 के एक आकलन में राजस्थान में लगभग 130 GIBs होने का अनुमान लगाया गया, साथ ही यह भी बताया गया कि अब यह प्रजाति अपने पूर्व के आवास के केवल एक छोटे हिस्से तक सीमित रह गई है।
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प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के बारे में:
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- यह संरक्षण कार्यक्रम पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC), राजस्थान वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें इंटरनेशनल फंड फॉर हौबारा कंजर्वेशन की तकनीकी सहायता और नेशनल CAMPA से वित्तीय सहयोग प्राप्त है।
- जैसलमेर में स्थित सैम और रामदेवरा के कैप्टिव-ब्रीडिंग केंद्रों ने इस कार्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जून 2026 तक कैप्टिव आबादी बढ़कर 94 पक्षियों तक पहुँच गई थी। कैप्टिव-ब्रीडिंग के चौथे वर्ष में 26 चूजे पैदा हुए।
- यह संरक्षण कार्यक्रम पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC), राजस्थान वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें इंटरनेशनल फंड फॉर हौबारा कंजर्वेशन की तकनीकी सहायता और नेशनल CAMPA से वित्तीय सहयोग प्राप्त है।
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प्रमुख खतरे:
इस प्रजाति के सामने कई गंभीर खतरे हैं:
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- घासभूमि के आवास का नुकसान और विखंडन
- ऊपर से गुजरने वाली विद्युत पारेषण लाइनों से टकराव
- सौर और पवन ऊर्जा अवसंरचना का विस्तार
- अंडों और चूजों का शिकार
- मानव गतिविधियों से उत्पन्न व्यवधान और अवसंरचना का विकास
- विद्युत लाइनों से टकराव विशेष रूप से गंभीर खतरा है, क्योंकि GIBs की सामने की ओर देखने की क्षमता सीमित होती है और उड़ान के दौरान वे ऊपर से गुजरने वाले विद्युत तारों को पहचान नहीं पाते हैं।
- घासभूमि के आवास का नुकसान और विखंडन
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निष्कर्ष:
दो कैप्टिव-ब्रेड ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को जंगल में छोड़ा जाना भारत के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह कैद में प्रजाति को संरक्षित करने से आगे बढ़कर जंगल में उसकी व्यवहार्य आबादी को पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। दीर्घकालिक सफलता के लिए भारत को वैज्ञानिक पुनः जंगलीकरण, घासभूमि संरक्षण, विद्युत लाइनों से होने वाले टकराव को कम करने और लैंडस्केप स्तर पर संरक्षण जैसे उपायों को एक साथ लागू करना होगा।

