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Blog / 15 May 2026

सोना और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाने का निर्णय

सोना और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाने का निर्णय

संदर्भ:

हाल ही में भारत सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क को 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया है। यह निर्णय विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच लिया गया है। वित्त मंत्रालय ने इस बदलाव को सामाजिक कल्याण अधिभार (और कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर  में संशोधन के माध्यम से अधिसूचित किया है।

सोने पर आयात शुल्क बढ़ाने के कारण:

      • यह निर्णय कई बाहरी आर्थिक और रणनीतिक दबावों को दर्शाता है। भारत इस समय बढ़ते आयात बिल के कारण, विशेषकर ऊर्जा और अन्य वस्तुओं के आयात में वृद्धि के चलते,  विदेशी मुद्रा दबाव का सामना कर रहा है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित किया है, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जुड़े जोखिमों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है।
      • साथ ही, भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तरों तक कमजोर हुआ है। ऐसी स्थिति में सरकार का उद्देश्य गैर-आवश्यक आयात जैसे सोना-चांदी को नियंत्रित करना और विदेशी मुद्रा को महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे कच्चा तेल, उर्वरक, रक्षा उपकरण और औद्योगिक कच्चे माल के लिए सुरक्षित रखना है।

Government Raised Import Duty on Gold and Silver

आयात शुल्क के बारे में:

आयात शुल्क वह कर (Tax) है, जिसे सरकार विदेशों से देश में लाई जाने वाली वस्तुओं पर लगाती है। इसके कई उद्देश्य होते हैं, जैसे:

      • घरेलू उद्योगों की सुरक्षा करना
      • आयात और व्यापार संतुलन को नियंत्रित करना
      • सरकार के लिए राजस्व उत्पन्न करना
      • विदेशी मुद्रा भंडार का संरक्षण करना

भारत में कानूनी ढांचा:

      • भारत में आयात शुल्क मुख्य रूप से सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 (Customs Act, 1962) और सीमा शुल्क टैरिफ अधिनियम, 1975 (Customs Tariff Act, 1975) के अंतर्गत नियंत्रित किया जाता है। ये कानून आयातित और निर्यातित वस्तुओं पर सीमा शुल्क लगाने, उसका आकलन, संग्रहण और छूट प्रदान करने की व्यवस्था तय करते हैं।
      • वित्त मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) सीमा शुल्क कानूनों के प्रशासन, तस्करी रोकने और शुल्कों की उचित वसूली सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है।

भारत में आयात शुल्क के प्रकार:

भारत वस्तुओं की प्रकृति और नीतिगत उद्देश्यों के आधार पर विभिन्न प्रकार के सीमा शुल्क लगाता है:

      • बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD): सीमा शुल्क अधिनियम के तहत आयातित वस्तुओं पर लगाया जाने वाला मूल शुल्क।
      • सामाजिक कल्याण अधिभार (SWS): सीमा शुल्क पर लगाया जाने वाला अतिरिक्त अधिभार।
      • कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर (AIDC): कृषि अवसंरचना को समर्थन देने के लिए कुछ विशेष आयातों पर लगाया जाने वाला उपकर।
      • एंटी-डंपिंग ड्यूटी: घरेलू उद्योगों को अत्यधिक सस्ते और अनुचित आयात से बचाने के लिए लगाया जाने वाला शुल्क।
      • सेफगार्ड ड्यूटी: आयात में अचानक वृद्धि से घरेलू उद्योगों की सुरक्षा के लिए लगाया जाने वाला शुल्क।

कीमतों और उपभोक्ताओं पर प्रभाव:

      • आयात शुल्क बढ़ने से सोना और चांदी की घरेलू कीमतों में वृद्धि होने की संभावना है, क्योंकि आयात लागत (landed cost) बढ़ जाएगी। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, विशेषकर आभूषण और बुलियन बाजारों में, जहाँ यह अतिरिक्त लागत ग्राहकों तक पहुंचाई जाएगी।
      • घोषणा के बाद घरेलू बाजार में कीमतों में तुरंत उछाल देखा गया, जो बाजार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। यह कदम वर्ष 2024–25 के बजट निर्णय के विपरीत है, जिसमें सरकार ने आयात शुल्क को 15% से घटाकर 6% किया था।

निष्कर्ष:

सोने पर आयात शुल्क में वृद्धि वैश्विक अनिश्चितता के बीच बाहरी क्षेत्र (external sector) के प्रबंधन की एक व्यापक रणनीति को दर्शाती है। अल्पकाल में इससे उपभोक्ताओं के लिए सोना महंगा हो जाएगा, लेकिन इस नीति का उद्देश्य भारत की विदेशी मुद्रा स्थिति को मजबूत करना, रुपये को स्थिर करना और भू-राजनीतिक तथा ऊर्जा बाजार की अस्थिरता के दौरान आवश्यक आयातों के लिए पर्याप्त संसाधन सुनिश्चित करना है।

 

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