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Blog / 12 Feb 2026

सरकार ने नए सोशल मीडिया नियमों को अधिसूचित किया

संदर्भ:

हाल ही में, भारत सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में संशोधनों को अधिसूचित किया है। ये नियम एआई-जनित सामग्री (AI content) पर अनिवार्य रूप से लेबल लगाने की शुरुआत करते हैं और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए अवैध सामग्री को हटाने की समय-सीमा को पिछले 36 घंटों से घटाकर तीन घंटे कर देते हैं।

प्रमुख विशेषताएँ:

      • एआई कंटेंट लेबलिंग: प्लेटफॉर्म्स के लिए सभी AI-जनित या सिंथेटिक सामग्री (जिसमें डीपफेक भी शामिल है) पर स्पष्ट रूप से लेबल लगाना अनिवार्य है। ये लेबल दिखाई देने चाहिए और उन्हें हटाया या छिपाया नहीं जा सकता।
      • तीन घंटे के भीतर सामग्री हटाना: फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और X जैसे प्लेटफॉर्म्स को चिन्हित की गई अवैध सामग्री को तीन घंटे के भीतर हटाना होगा। गैर-सहमति वाली निजी छवियों (NCII) या हानिकारक डीपफेक के लिए दो घंटे की समय-सीमा लागू होगी।

उपयोगकर्ता घोषणाएँ और मेटाडेटा:

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अब उपयोगकर्ताओं के लिए यह अनिवार्य कर सकते हैं कि वे एआई -जनित सामग्री की स्व-घोषणा  करें। इसके सत्यापन हेतु प्लेटफॉर्म स्वचालित उपकरणों का प्रयोग करेंगे। यदि कोई प्लेटफॉर्म इन नियमों का पालन सुनिश्चित करने में विफल रहता है, तो वह सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के अंतर्गत प्राप्त 'सेफ हार्बर' (विधिक सुरक्षा कवच) खो देगा। इसका सीधा अर्थ है कि प्लेटफॉर्म पर मौजूद किसी भी अवैध सामग्री के लिए वह कंपनी स्वयं कानूनी रूप से उत्तरदायी होगी।

एआई/सिंथेटिक सामग्री की परिभाषा:

सिंथेटिक जनरेटेड इंफॉर्मेशन (SGI) में कोई भी ऑडियो, विज़ुअल या ऑडियो-विज़ुअल सामग्री शामिल है जिसे AI का उपयोग करके बनाया या बदला गया है और जो वास्तविक प्रतीत होती है। सामान्य संपादन और शैक्षिक दृष्टांतों को इससे छूट दी गई है।

अनुपालन और जवाबदेही:

      • प्लेटफॉर्म्स के लिए अनिवार्य है कि वे:
        • एआई -जनित सामग्री पर मेटाडेटा और स्पष्ट दिखने वाले लेबल एम्बेड करें।
        • निर्धारित समय-सीमा के भीतर सामग्री हटाने के नियमों का सख्ती से पालन करें।
        • उपयोगकर्ताओं को कम से कम हर तीन महीने में एक बार AI उपकरणों के दुरुपयोग पर दंड के बारे में चेतावनी दें।
        • अनुपालन न करने की स्थिति में कानूनी दायित्व (Legal liability) बन सकता है, क्योंकि मध्यस्थ अपनी 'सेफ हार्बर' सुरक्षा खो सकते हैं।

औचित्य:

इन नियमों का प्राथमिक उद्देश्य डीपफेक और एआई-जनित भ्रामक सूचनाओं की बढ़ती व्यापकता को नियंत्रित करना है। ऐसी सामग्रियाँ सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ सकती हैं, व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को आघात पहुँचा सकती हैं और वित्तीय धोखाधड़ी का आधार बन सकती हैं। सरकार डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहती है।

चिंताएँ और आलोचना:

      • परिचालन संबंधी कठिनाइयाँ: अत्यंत कम समय-सीमा (तीन घंटे) के कारण प्लेटफॉर्म्स द्वारा जल्दबाजी में वैध सूचनाओं को भी हटाया जा सकता है, जो 'ओवर-सेंसरशिप' की स्थिति पैदा कर सकता है।
      • अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: स्वचालित उपकरणों द्वारा सामग्री हटाने से नागरिकों के मौलिक अधिकारों और उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका व्यक्त की गई है।

डिजिटल शासन के लिए महत्व:

    • ​​ये संशोधन डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में भारत की अग्रणी भूमिका को रेखांकित करते हैं। यह कदम स्पष्ट करता है कि भारत उभरती तकनीकों को विनियमित करने और नागरिकों की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

निष्कर्ष:

नए नियम, जो प्रमुख एआई लेबलिंग और सख्त समय-सीमा को जोड़ते हैं, डिजिटल विनियमन में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देते हैं। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करते हुए गलत सूचनाओं को रोकने में इनका कार्यान्वयन कितना प्रभावी रहता है।