सन्दर्भ:
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गोबरधन को राष्ट्रीय परिपत्र जैव-ऊर्जा योजना (National Circular Bioenergy Scheme) के रूप में स्वीकृति प्रदान की है। इस योजना के लिए 23,731 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसका क्रियान्वयन वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक किया जाएगा। योजना का उद्देश्य संपीड़ित जैव-गैस (Compressed Biogas- CBG) को भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण का प्रमुख आधार बनाना है।
गोबरधन योजना के बारे में:
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- वर्ष 2018 में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत प्रारंभ की गई गोबरधन योजना का उद्देश्य गोबर, फसल अवशेष, नगरीय जैविक अपशिष्ट, प्रेसमड तथा अन्य जैविक अवशेषों को संपीड़ित जैव-गैस (CBG) एवं जैविक उर्वरक में परिवर्तित करना है।
- सतत (SATAT) पहल, बाजार विकास सहायता (Market Development Assistance- MDA), बायोमास संकलन मशीनरी (Biomass Aggregation Machinery- BAM) तथा राष्ट्रीय जैव-ऊर्जा कार्यक्रम जैसी पहलों के आधार पर इस संशोधित योजना का उद्देश्य एक समेकित परिपत्र जैव-अर्थव्यवस्था (Circular Bioeconomy) का विकास करना है।
- वर्ष 2018 में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत प्रारंभ की गई गोबरधन योजना का उद्देश्य गोबर, फसल अवशेष, नगरीय जैविक अपशिष्ट, प्रेसमड तथा अन्य जैविक अवशेषों को संपीड़ित जैव-गैस (CBG) एवं जैविक उर्वरक में परिवर्तित करना है।
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राष्ट्रीय परिपत्र जैव-ऊर्जा योजना की प्रमुख विशेषताएँ:
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- समेकित संपीड़ित जैव-गैस (CBG) मूल्य शृंखला: योजना का संचालन पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) द्वारा किया जाएगा। इसके अंतर्गत कच्चे जैविक पदार्थ (Feedstock) के संग्रहण, उत्पादन, भंडारण, परिवहन तथा विपणन के लिए एकीकृत व्यवस्था विकसित की जाएगी।
- सुनिश्चित क्रय व्यवस्था (Assured Offtake): सिटी गैस वितरण (CGD) कंपनियाँ अनिवार्य संपीड़ित जैव-गैस दायित्व (CBG Obligation- CBGO) की पूर्ति हेतु CBG का क्रय करेंगी। यह दायित्व 2026-27 में 3%, 2027-28 में 4% तथा 2028-29 से 5% निर्धारित किया गया है।
- स्थिर मूल्य निर्धारण: उत्पादकों को आय की सुनिश्चितता प्रदान करने हेतु सरकार द्वारा 2,110 रुपये प्रति एमएमबीटीयू (MMBTU) का प्रशासित मूल्य निर्धारित किया गया है, जिसकी न्यूनतम 10 वर्ष की मूल्य स्थिरता सुनिश्चित की जाएगी।
- पूंजीगत एवं ऋण सहायता: नवीन (Greenfield) परियोजनाओं को स्थापित क्षमता के प्रति टन प्रतिदिन (TPD) पर अधिकतम 2 करोड़ रुपये तक की पूंजीगत सहायता प्रदान की जाएगी। साथ ही, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए विशेष ऋण गारंटी तंत्र स्थापित किया जाएगा, जिससे वित्तीय संसाधनों तक उनकी पहुँच सुदृढ़ हो सके।
- पाइपलाइन अवसंरचना का विकास: योजना के अंतर्गत CBG संयंत्रों को सिटी गैस वितरण नेटवर्क से जोड़ने हेतु पाइपलाइन अवसंरचना का विकास किया जाएगा, जिससे गैस का कुशल परिवहन एवं वितरण सुनिश्चित हो सके।
- CBG पारितंत्र चुनौती कोष: इस कोष के माध्यम से कच्चे जैविक पदार्थों का मानचित्रण, प्रौद्योगिकी अंगीकरण, जिला-स्तरीय योजना निर्माण, जैविक उर्वरकों के मूल्य संवर्धन तथा क्षमता निर्माण को प्रोत्साहित किया जाएगा।
- समेकित संपीड़ित जैव-गैस (CBG) मूल्य शृंखला: योजना का संचालन पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) द्वारा किया जाएगा। इसके अंतर्गत कच्चे जैविक पदार्थ (Feedstock) के संग्रहण, उत्पादन, भंडारण, परिवहन तथा विपणन के लिए एकीकृत व्यवस्था विकसित की जाएगी।
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महत्त्व:
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- इस योजना का उद्देश्य देश में संपीड़ित जैव-गैस (CBG) के उत्पादन में लगभग दस गुना वृद्धि करना, आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करना तथा भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ बनाना है। साथ ही, यह परिपत्र अर्थव्यवस्था (Circular Economy) की स्थापना को गति प्रदान करेगी।
- यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, किसानों को जैविक अवशेषों की आपूर्ति के माध्यम से अतिरिक्त आय, वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन, हरितगृह गैसों के उत्सर्जन में कमी तथा जैविक उर्वरकों के उत्पादन को प्रोत्साहित करेगी। इसके अतिरिक्त, यह नेट-ज़ीरो, आत्मनिर्भर भारत, अपशिष्ट से संपदा (Waste-to-Wealth) तथा सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति में भी सहायक सिद्ध होगी।
- इस योजना का उद्देश्य देश में संपीड़ित जैव-गैस (CBG) के उत्पादन में लगभग दस गुना वृद्धि करना, आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करना तथा भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ बनाना है। साथ ही, यह परिपत्र अर्थव्यवस्था (Circular Economy) की स्थापना को गति प्रदान करेगी।
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चुनौतियाँ:
जैविक कच्चे पदार्थों का प्रभावी संकलन, उच्च प्रारंभिक निवेश, पाइपलाइन संपर्क का विस्तार, आधुनिक प्रौद्योगिकी का व्यापक उपयोग तथा विभिन्न हितधारकों के मध्य प्रभावी समन्वय योजना के सफल क्रियान्वयन की प्रमुख चुनौतियाँ हैं। इसके अतिरिक्त, परियोजनाओं की वित्तीय व्यवहार्यता सुनिश्चित करना तथा निजी क्षेत्र की दीर्घकालिक भागीदारी बनाए रखना भी अत्यंत आवश्यक होगा।
निष्कर्ष:
राष्ट्रीय परिपत्र जैव-ऊर्जा योजना भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा में एक महत्त्वपूर्ण पहल है, जो कृषि एवं जैविक अपशिष्ट को ऊर्जा तथा आय के सतत स्रोत में परिवर्तित करने का मार्ग प्रशस्त करती है। संपीड़ित जैव-गैस (CBG) पारितंत्र को सुदृढ़ बनाकर यह योजना ऊर्जा सुरक्षा को सशक्त करने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने तथा पर्यावरण-अनुकूल एवं सतत विकास को प्रोत्साहित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

