चर्चा में क्यों?
हाल ही में ग्लोबल सिटीजन सॉल्यूशंस (Global Citizen Solutions) द्वारा प्रकाशित ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स (Global Passport Index - GPI) 2026 में भारत 197 देशों में 125वें स्थान पर रहा है। पिछले वर्ष की तुलना में भारत एक स्थान नीचे है। यह सूचकांक केवल वीज़ा-मुक्त यात्रा तक सीमित न रहकर गतिशीलता (Mobility), निवेश के अवसर तथा जीवन की गुणवत्ता जैसे व्यापक मानकों के आधार पर देशों के पासपोर्ट का मूल्यांकन करता है।
ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स (GPI) क्या है?
ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स (GPI) विश्व के 197 देशों के पासपोर्ट की वार्षिक रैंकिंग है। पारंपरिक पासपोर्ट सूचकांकों के विपरीत, जो मुख्यतः वीज़ा-मुक्त यात्रा पर आधारित होते हैं, यह सूचकांक अधिक व्यापक दृष्टिकोण अपनाता है।
यह पासपोर्ट का मूल्यांकन निम्नलिखित तीन प्रमुख आयामों पर करता है:
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- उन्नत गतिशीलता (Enhanced Mobility) – 50%
- वीज़ा-मुक्त यात्रा
- यात्रा की सुगमता
- वैश्विक पहुँच
- वीज़ा-मुक्त यात्रा
- निवेश सूचकांक (Investment Index) – 25%
- व्यापार एवं निवेश के अवसर
- कर व्यवस्था (Taxation)
- आर्थिक स्वतंत्रता
- व्यापार एवं निवेश के अवसर
- जीवन गुणवत्ता सूचकांक (Quality of Living Index) – 25%
- स्वास्थ्य सेवाएँ
- शिक्षा
- सुरक्षा
- सामाजिक परिस्थितियाँ
- स्वास्थ्य सेवाएँ
- उन्नत गतिशीलता (Enhanced Mobility) – 50%
इन तीनों आयामों का मूल्यांकन 14 विभिन्न संकेतकों (Indicators) के आधार पर किया जाता है, जो वैश्विक गतिशीलता एवं जीवन स्तर को मापते हैं।
वर्ष 2026 में भारत का प्रदर्शन:
भारत 197 देशों में 125वें स्थान पर रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में एक स्थान की गिरावट दर्शाता है।
प्रमुख तथ्य
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- भारतीय पासपोर्ट धारकों को 26 देशों में वीज़ा-मुक्त अथवा आगमन पर वीज़ा (Visa-on-Arrival) की सुविधा प्राप्त है।
- यात्रा से इतर मानकों में भारत का प्रदर्शन बेहतर रहा:
- निवेश सूचकांक में 94वाँ स्थान (3 स्थान का सुधार)
- जीवन गुणवत्ता सूचकांक में 118वाँ स्थान (11 स्थान का सुधार)
- निवेश सूचकांक में 94वाँ स्थान (3 स्थान का सुधार)
- भारत का समग्र संयुक्त (Composite) स्कोर बढ़कर 45.1 हो गया, जो पिछले पाँच वर्षों का सर्वोच्च स्तर है।
- भारतीय पासपोर्ट धारकों को 26 देशों में वीज़ा-मुक्त अथवा आगमन पर वीज़ा (Visa-on-Arrival) की सुविधा प्राप्त है।
हालाँकि कुछ क्षेत्रों में सुधार हुआ है, फिर भी प्रमुख वैश्विक देशों में सीमित वीज़ा-मुक्त पहुँच के कारण भारत का गतिशीलता (Mobility) स्कोर अपेक्षाकृत कम बना हुआ है।
वैश्विक एवं क्षेत्रीय रुझान:
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- सिंगापुर शीर्ष 20 देशों में शामिल होने वाला एकमात्र एशियाई देश है।
- अन्य प्रमुख एशियाई पासपोर्ट:
- जापान
- दक्षिण कोरिया
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
- हांगकांग
- जापान
- यूरोपीय देशों का शीर्ष 10 में वर्चस्व है, जो उनकी मजबूत वैश्विक गतिशीलता तथा व्यापक राजनयिक समझौतों को दर्शाता है।
- सिंगापुर शीर्ष 20 देशों में शामिल होने वाला एकमात्र एशियाई देश है।
एशिया में भारत की तुलना:
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देश |
रैंक |
|
चीन |
104 |
|
भारत |
125 |
|
भूटान |
132 |
|
श्रीलंका |
141 |
|
नेपाल |
164 |
|
बांग्लादेश |
166 |
भारत इस सूचकांक में एशियाई देशों के बीच 29वें स्थान पर है।
भारत की रैंकिंग कम होने के प्रमुख कारण:
भारत की अपेक्षाकृत निम्न रैंकिंग के पीछे कई संरचनात्मक कारण हैं:
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- विकसित देशों के साथ सीमित वीज़ा-मुक्त यात्रा समझौते
- पश्चिमी देशों की कड़ी आव्रजन (Immigration) नीतियाँ
- आर्थिक एवं सुरक्षा संबंधी कारणों से लगाए जाने वाले वीज़ा प्रतिबंध
- विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कम वैश्विक गतिशीलता (Global Mobility) स्कोर
- विकसित देशों के साथ सीमित वीज़ा-मुक्त यात्रा समझौते
यद्यपि भारत के विश्व के अनेक देशों के साथ मजबूत कूटनीतिक संबंध हैं, फिर भी उनका व्यापक वीज़ा-मुक्त यात्रा सुविधा में अभी तक पर्याप्त रूपांतरण नहीं हो पाया है।
निष्कर्ष:
ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स 2026 में भारत का 125वाँ स्थान वैश्विक गतिशीलता के क्षेत्र में मौजूद चुनौतियों के साथ-साथ निवेश एवं जीवन गुणवत्ता जैसे क्षेत्रों में हो रहे क्रमिक सुधार को भी दर्शाता है। वर्तमान में भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए वीज़ा-मुक्त यात्रा की सुविधा सीमित है, किंतु भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति, वैश्विक प्रभाव तथा सक्रिय कूटनीतिक प्रयास भविष्य में उसकी वैश्विक गतिशीलता और पासपोर्ट की रैंकिंग को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
