संदर्भ:
हाल ही में, विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) द्वारा जारी वैश्विक नवाचार सूचकांक (Global Innovation Index—GII) 2026 में भारत 139 अर्थव्यवस्थाओं में 38वें स्थान पर है। भारत निम्न-मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्थाओं तथा मध्य और दक्षिण एशिया में प्रथम स्थान पर है। यह उपलब्धि भारत की डिजिटल सेवाओं, उद्यमिता और तकनीकी विकास की क्षमता को दर्शाती है। हालांकि, अनुसंधान एवं विकास में निवेश तथा संस्थागत क्षमताओं को मजबूत करने की आवश्यकता बनी हुई है।
वैश्विक नवाचार सूचकांक क्या है?
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- वैश्विक नवाचार सूचकांक नवाचार के क्षेत्र में विभिन्न देशों के प्रदर्शन का आकलन करने वाला एक प्रमुख सूचकांक है। इसकी शुरुआत वर्ष 2007 में हुई थी। वर्ष 2026 इसका 19वाँ संस्करण है।
- यह सूचकांक लगभग 80 संकेतकों के आधार पर देशों का मूल्यांकन करता है। इसके दो प्रमुख उप-सूचकांक हैं:
- नवाचार निवेश (Innovation Inputs): संस्थान, मानव पूंजी एवं अनुसंधान, बुनियादी ढाँचा, बाजार की परिष्कृतता और व्यावसायिक परिष्कृतता।
- नवाचार परिणाम (Innovation Outputs): ज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संबंधी परिणाम तथा रचनात्मक परिणाम।
- इन दोनों उप-सूचकांकों को समान भार दिया जाता है। इस प्रकार यह सूचकांक केवल नवाचार के लिए उपलब्ध संसाधनों को नहीं, बल्कि उनसे प्राप्त वास्तविक परिणामों को भी मापता है।
- वैश्विक नवाचार सूचकांक नवाचार के क्षेत्र में विभिन्न देशों के प्रदर्शन का आकलन करने वाला एक प्रमुख सूचकांक है। इसकी शुरुआत वर्ष 2007 में हुई थी। वर्ष 2026 इसका 19वाँ संस्करण है।
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GII 2026 के प्रमुख निष्कर्ष:
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- वैश्विक स्तर पर स्विट्जरलैंड प्रथम, स्वीडन द्वितीय और अमेरिका तृतीय स्थान पर हैं। दक्षिण कोरिया चौथे तथा सिंगापुर पाँचवें स्थान पर हैं। चीन दसवें स्थान पर बना हुआ है।
- भारत की स्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय है, क्योंकि वह सीमित संसाधनों के बावजूद नवाचार के परिणामों में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। वर्ष 2026 में भारत नवाचार निवेश में 49वें और नवाचार परिणामों में 25वें स्थान पर है। इससे पता चलता है कि भारत उपलब्ध संसाधनों को आर्थिक एवं तकनीकी उपलब्धियों में बदलने की क्षमता रखता है।
- वैश्विक स्तर पर स्विट्जरलैंड प्रथम, स्वीडन द्वितीय और अमेरिका तृतीय स्थान पर हैं। दक्षिण कोरिया चौथे तथा सिंगापुर पाँचवें स्थान पर हैं। चीन दसवें स्थान पर बना हुआ है।
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भारत की प्रमुख उपलब्धियाँ:
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- डिजिटल सेवाएँ: भारत ICT सेवाओं के निर्यात में विश्व में प्रथम स्थान पर है। इससे वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका मजबूत हुई है।
- स्टार्टअप एवं निवेश: भारत देर के चरण के वेंचर कैपिटल सौदों में चौथे स्थान पर है, जो नवाचार आधारित उद्यमों के विकास की संभावनाओं को दर्शाता है।
- क्षेत्रीय नेतृत्व: भारत मध्य एवं दक्षिण एशिया में प्रथम स्थान पर है और निम्न-मध्यम आय वाली 36 अर्थव्यवस्थाओं में भी शीर्ष स्थान रखता है।
- नवाचार आधारित विकास: डिजिटल सेवाओं, सॉफ्टवेयर, उद्यमिता और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की क्षमताएँ उसके नवाचार परिणामों को मजबूत कर रही हैं।
- डिजिटल सेवाएँ: भारत ICT सेवाओं के निर्यात में विश्व में प्रथम स्थान पर है। इससे वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका मजबूत हुई है।
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भारत के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ:
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- अनुसंधान एवं विकास में निवेश: वैज्ञानिक अनुसंधान और नई तकनीकों के विकास के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता है।
- शिक्षा और उद्योग में समन्वय: विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और निजी कंपनियों के बीच सहयोग को बढ़ाना आवश्यक है।
- नवाचार का व्यावसायीकरण: प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकों को उपयोगी उत्पादों और बड़े पैमाने के उद्योगों में बदलने की प्रक्रिया को सरल बनाना होगा।
- बुनियादी ढाँचे की कमी: उच्चस्तरीय अनुसंधान सुविधाओं, तकनीकी उपकरणों और नवाचार केंद्रों तक समान पहुँच सुनिश्चित करना जरूरी है।
- क्षेत्रीय असमानता: नवाचार गतिविधियों को कुछ प्रमुख शहरों तक सीमित रखने के बजाय छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँचाना होगा।
- अनुसंधान एवं विकास में निवेश: वैज्ञानिक अनुसंधान और नई तकनीकों के विकास के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता है।
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आगे की राह:
भारत को नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था बनाने के लिए निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:
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- अनुसंधान एवं विकास में सार्वजनिक तथा निजी निवेश बढ़ाया जाए।
- विश्वविद्यालयों में उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप अनुसंधान और कौशल विकास को प्रोत्साहित किया जाए।
- स्टार्टअप को वित्तीय सहायता, तकनीकी मार्गदर्शन और बौद्धिक संपदा अधिकारों के संरक्षण की सुविधाएँ दी जाएँ।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, जैव प्रौद्योगिकी और स्वच्छ ऊर्जा जैसे उभरते क्षेत्रों में स्वदेशी तकनीकों का विकास किया जाए।
- टियर-2 और टियर-3 शहरों में नवाचार केंद्र, इन्क्यूबेशन हब तथा अनुसंधान संस्थान विकसित किए जाएँ।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति, स्टार्टअप इंडिया और अटल इनोवेशन मिशन जैसी पहलों को अनुसंधान एवं व्यावसायिक आवश्यकताओं से बेहतर ढंग से जोड़ा जाए।
- अनुसंधान एवं विकास में सार्वजनिक तथा निजी निवेश बढ़ाया जाए।
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निष्कर्ष:
वैश्विक नवाचार सूचकांक 2026 में भारत की स्थिति उसकी तकनीकी क्षमता और उद्यमशीलता की प्रगति को दर्शाती है। हालाँकि, नवाचार परिणामों और निवेश के बीच मौजूद अंतर को कम करना आवश्यक है। भारत को केवल डिजिटल सेवाओं का प्रमुख निर्यातक बनने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि मौलिक अनुसंधान, स्वदेशी तकनीक और उच्च मूल्यवर्धित विनिर्माण में भी नेतृत्व विकसित करना चाहिए। इससे आत्मनिर्भर भारत, विकसित भारत @2047 और समावेशी आर्थिक विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।

