संदर्भ:
हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनिसेफ (UNICEF) की रिपोर्टों के माध्यम से चेतावनी दी है कि घटते वित्तीय समर्थन, संघर्षों, गलत सूचनाओं और स्वास्थ्य सेवाओं के वितरण में अंतराल के कारण वैश्विक टीकाकरण प्रणाली कमजोरी के संकेत दिखा रही है।
वैश्विक टीकाकरण प्रणाली के बारे में:
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- वैश्विक टीकाकरण प्रणाली अंतरराष्ट्रीय संगठनों, सरकारों और स्वास्थ्य गठबंधनों का एक सहयोगी नेटवर्क है, जो जीवन रक्षक टीकों तक सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कार्य करता है। यह खसरा, पोलियो और एचपीवी सहित 14 से अधिक प्रमुख बीमारियों की रोकथाम के लिए दिशानिर्देश, तकनीकी सहायता और संसाधन प्रदान करता है। इस प्रणाली का नेतृत्व निम्नलिखित संगठनों द्वारा किया जाता है:
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)
- यूनिसेफ (UNICEF)
- गावी, द वैक्सीन अलायंस (Gavi, the Vaccine Alliance)
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)
- वैश्विक टीकाकरण प्रणाली अंतरराष्ट्रीय संगठनों, सरकारों और स्वास्थ्य गठबंधनों का एक सहयोगी नेटवर्क है, जो जीवन रक्षक टीकों तक सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कार्य करता है। यह खसरा, पोलियो और एचपीवी सहित 14 से अधिक प्रमुख बीमारियों की रोकथाम के लिए दिशानिर्देश, तकनीकी सहायता और संसाधन प्रदान करता है। इस प्रणाली का नेतृत्व निम्नलिखित संगठनों द्वारा किया जाता है:
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प्रमुख रूपरेखाएं:
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- टीकाकरण एजेंडा 2030 (IA2030): यह एक वैश्विक रणनीति है, जिसका उद्देश्य समान रूप से टीकों की पहुंच सुनिश्चित करना, टीकाकरण में आई रुकावटों से उबरना और इस दशक के दौरान 5 करोड़ से अधिक लोगों के जीवन को बचाना है।
- विस्तारित टीकाकरण कार्यक्रम (EPI): बचपन की बीमारियों पर केंद्रित ईपीआई (EPI) का विस्तार अब विभिन्न आयु समूहों, जिनमें किशोर और वयस्क भी शामिल हैं, के लिए 13 प्रमुख बीमारियों के खिलाफ टीकाकरण की सिफारिशें प्रदान करने तक हो गया है।
- टीकाकरण एजेंडा 2030 (IA2030): यह एक वैश्विक रणनीति है, जिसका उद्देश्य समान रूप से टीकों की पहुंच सुनिश्चित करना, टीकाकरण में आई रुकावटों से उबरना और इस दशक के दौरान 5 करोड़ से अधिक लोगों के जीवन को बचाना है।
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रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:
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- 2025 में वैश्विक स्तर पर 90% शिशुओं (लगभग 11.6 करोड़ बच्चों) को डीटीपी (DTP) टीके की कम से कम एक खुराक मिली, जबकि 85% ने सभी तीन खुराकें पूरी कीं।
- वैश्विक टीकाकरण कवरेज में थोड़ा सुधार हुआ, लेकिन यह अभी भी 2019 के कोविड-19 से पहले के स्तर से नीचे है।
- लगभग 1.35 करोड़ बच्चे जीरो-डोज़ (zero-dose) बच्चे थे, जिन्हें अपने पहले वर्ष में कोई टीका नहीं मिला।
- लगभग 73 लाख शिशुओं को डीटीपी की पहली खुराक मिली, लेकिन वे खसरे के पहले टीके की खुराक से चूक गए, जो टीकाकरण कार्यक्रमों को पूरा करने में मौजूद अंतराल को दर्शाता है।
- वैश्विक खसरा टीकाकरण कवरेज अभी भी अपर्याप्त है:
- 84% को पहली खुराक मिली।
- 77% को दूसरी खुराक मिली।
- प्रकोपों को रोकने के लिए 95% कवरेज आवश्यक है।
- 84% को पहली खुराक मिली।
- 2025 में 57 देशों ने खसरे के बड़े प्रकोपों की सूचना दी, साथ ही डिप्थीरिया और हैजा के मामलों में भी वृद्धि हुई।
- घटता हुआ वित्त पोषण और कमजोर निगरानी प्रणालियां भविष्य के टीकाकरण कार्यक्रमों के लिए जोखिम पैदा कर रही हैं।
- 2025 में वैश्विक स्तर पर 90% शिशुओं (लगभग 11.6 करोड़ बच्चों) को डीटीपी (DTP) टीके की कम से कम एक खुराक मिली, जबकि 85% ने सभी तीन खुराकें पूरी कीं।
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संकट के पीछे कारण:
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- संघर्ष और विस्थापन: युद्ध और मानवीय संकट स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित करते हैं, बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाते हैं और बच्चों को टीकाकरण कार्यक्रमों तक पहुंचने से रोकते हैं।
- वित्त पोषण की कमी: घटती अंतरराष्ट्रीय सहायता और वित्तीय बाधाएं टीकों की खरीद, कोल्ड-चेन प्रणालियों, स्वास्थ्य कर्मियों और रोग निगरानी को प्रभावित करती हैं।
- गलत सूचना और टीकों को लेकर हिचकिचाहट: टीकों की सुरक्षा के संबंध में गलत जानकारी ने जनता के विश्वास को कम किया है और टीकाकरण में कमी में योगदान दिया है, विशेष रूप से खसरे के टीकाकरण में।
- कमजोर निगरानी प्रणालियां: रोग निगरानी क्षमता में कमी ने प्रकोपों का शीघ्र पता लगाने की क्षमता को प्रभावित किया है। 2025 में केवल 18 राष्ट्रीय टीकाकरण सर्वेक्षण प्रस्तुत किए गए, जबकि पहले यह संख्या 50 थी।
- संघर्ष और विस्थापन: युद्ध और मानवीय संकट स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित करते हैं, बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाते हैं और बच्चों को टीकाकरण कार्यक्रमों तक पहुंचने से रोकते हैं।
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भारत के टीकाकरण प्रयास:
भारत ने सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) लागू किया है, जो दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण कार्यक्रमों में से एक है। मिशन इंद्रधनुष जैसी पहलों का उद्देश्य कम टीकाकरण वाले क्षेत्रों में बच्चों और गर्भवती महिलाओं के बीच कवरेज में सुधार करना है। कोविड-19 के दौरान विकसित डिजिटल प्लेटफॉर्मों ने भी टीका प्रबंधन को मजबूत किया है।
निष्कर्ष:
संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी इस बात को उजागर करती है कि टीकाकरण में हुई प्रगति को स्वाभाविक रूप से सुनिश्चित नहीं माना जा सकता। जबकि वैश्विक टीकाकरण कवरेज में सुधार हुआ है, संघर्ष, वित्तीय बाधाएं और गलत सूचनाएं स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करती हैं। टीकाकरण प्रणालियों को मजबूत करना SDG 3 (अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण) प्राप्त करने और प्रत्येक बच्चे के लिए जीवन रक्षक टीकों तक समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।

