संदर्भ:
हाल ही में वेल्टहंगरहिल्फ़ (Welthungerhilfe) और कंसर्न वर्ल्डवाइड (Concern Worldwide) द्वारा संयुक्त रूप से वैश्विक भुखमरी सूचकांक (Global Hunger Index - GHI) 2026 जारी किया गया है। इस वर्ष की रिपोर्ट की थीम "नो सिक्योरिटी विदाउट फूड सिक्योरिटी" (खाद्य सुरक्षा के बिना कोई सुरक्षा नहीं) रखा गया है।
GHI की कार्यप्रणाली:
ग्लोबल हंगर इंडेक्स की गणना चार मुख्य संकेतकों (Indicators) के आधार पर 0 से 100 के पैमाने पर की जाती है, जहाँ 0 सबसे अच्छा स्कोर (कोई भुखमरी नहीं) और 100 सबसे खराब स्कोर माना जाता है:
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- अल्पपोषण (Undernourishment): अपर्याप्त कैलोरी सेवन वाली जनसंख्या का अनुपात (कुल जनसंख्या का %)।
- चाइल्ड स्टंटिंग (Child Stunting): पाँच वर्ष से कम उम्र के वे बच्चे जिनका कद उनकी उम्र के अनुपात में कम है (क्रोनिक कुपोषण का सूचक)।
- चाइल्ड वेस्टिंग (Child Wasting): पाँच वर्ष से कम उम्र के वे बच्चे जिनका वजन उनके कद के अनुपात में कम है (तीव्र कुपोषण का सूचक)।
- बाल मृत्यु दर (Child Mortality): पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर।
- अल्पपोषण (Undernourishment): अपर्याप्त कैलोरी सेवन वाली जनसंख्या का अनुपात (कुल जनसंख्या का %)।
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वैश्विक परिदृश्य:
GHI 2026 के अनुसार, पिछले दो दशकों में वैश्विक भुखमरी को समाप्त करने की दिशा में जो प्रगति हुई थी, उस प्रवृत्ति में रुकावट आई है और 2018 की तुलना में स्थिति बिगड़ी है। वर्ष 2026 में वैश्विक GHI स्कोर बढ़कर 18.1 हो गया है, जो 2018 में 17.6 था। रिपोर्ट के मुख्य वैश्विक बिंदु निम्नलिखित हैं:
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- क्षेत्रीय असंतुलन: भुखमरी का सबसे गंभीर स्तर अफ्रीका साउथ ऑफ द सहारा और दक्षिण एशिया में दर्ज किया गया है। इन दोनों क्षेत्रों को 'गंभीर' (Serious) श्रेणी में रखा गया है।
- अलार्मिंग स्थिति: दुनिया के 8 देश (यथा सोमालिया, सूडान, यमन, चाड, बुरुंडी, आदि) भुखमरी की 'चिंताजनक' (Alarming) श्रेणी में हैं।
- रिवर्सल के कारण (3C): वैश्विक स्तर पर भुखमरी बढ़ने के पीछे संघर्ष (Conflict), जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और आर्थिक मंदी (Cost of Living) जिम्मेदार है।
- क्षेत्रीय असंतुलन: भुखमरी का सबसे गंभीर स्तर अफ्रीका साउथ ऑफ द सहारा और दक्षिण एशिया में दर्ज किया गया है। इन दोनों क्षेत्रों को 'गंभीर' (Serious) श्रेणी में रखा गया है।
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भारत की स्थिति एवं तुलनात्मक विश्लेषण:
GHI 2026 में भारत 122 देशों में 100वें स्थान पर है। भारत का GHI स्कोर 24.1 है, जो इसे 'गंभीर' (Serious) श्रेणी में रखता है। हालांकि 2006 (स्कोर 37.0) की तुलना में भारत ने दीर्घकालिक सुधार प्रदर्शित किया है, लेकिन वर्तमान प्रगति की गति असंतोषजनक है।
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देश |
2026 GHI स्कोर |
भुखमरी की श्रेणी |
तुलनात्मक स्थिति (भारत के संदर्भ में) |
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नेपाल |
14.5 |
मध्यम (Moderate) |
स्वास्थ्य और पोषण में निरंतर सार्वजनिक निवेश के कारण बेहतर स्थिति में। |
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बांग्लादेश |
19.2 |
मध्यम (Moderate) |
मानव विकास संकेतकों में निरंतर सुधार के कारण भारत से आगे। |
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भारत |
24.1 |
गंभीर (Serious) |
स्टंटिंग में आंशिक सुधार, परंतु वेस्टिंग की स्थिति चिंताजनक। |
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पाकिस्तान |
25.5 |
गंभीर (Serious) |
आर्थिक अस्थिरता और जलवायु झटकों के कारण भारत से पीछे। |
भारत के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ:
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- चाइल्ड वेस्टिंग का उच्च स्तर: भारत में चाइल्ड वेस्टिंग (19%) की दर दुनिया में सबसे अधिक में से एक है। यह दर्शाता है कि अल्पकालिक कुपोषण और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच की कमी अभी भी एक बड़ी बाधा है।
- पोषण की गुणवत्ता (Nutritional Quality): यद्यपि भारत सरकार की राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) और 'प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना' (PM-GKAY) ने कैलोरी की उपलब्धता सुनिश्चित की है, लेकिन आहार में सूक्ष्म पोषक तत्वों (Micronutrients) और प्रोटीन की कमी बनी हुई है।
- नीतिगत कार्यान्वयन में कमियाँ: पोषण अभियान (Poshan Abhiyaan) और सक्षम आंगनवाड़ी जैसी योजनाओं के बावजूद जमीनी स्तर पर डेटा विसंगतियां और बुनियादी ढांचे की कमी एक चुनौती है।
- चाइल्ड वेस्टिंग का उच्च स्तर: भारत में चाइल्ड वेस्टिंग (19%) की दर दुनिया में सबसे अधिक में से एक है। यह दर्शाता है कि अल्पकालिक कुपोषण और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच की कमी अभी भी एक बड़ी बाधा है।
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आगे की राह:
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- खाद्य सुरक्षा से पोषण सुरक्षा की ओर स्थानांतरण: सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में केवल गेहूं-चावल देने के बजाय मोटे अनाजों (Millets), दालों और फोर्टिफाइड चावल को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए।
- समेकित बाल विकास सेवा (ICDS) का सुदृढ़ीकरण: आंगनवाड़ी केंद्रों को आधुनिक संसाधनों से लैस करना और अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (Asha & Anganwadi Workers) का क्षमता निर्माण करना आवश्यक है।
- लाइफ-साइकिल अप्रोच (Life-Cycle Approach): गर्भावस्था से लेकर बच्चे के जन्म के पहले 1000 दिनों तक मातृ पोषण और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।
- जलवायु-अनुकूल कृषि (Climate-Resilient Agriculture): जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए किसानों को सूखे और बाढ़ के प्रति प्रतिरोधी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
- खाद्य सुरक्षा से पोषण सुरक्षा की ओर स्थानांतरण: सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में केवल गेहूं-चावल देने के बजाय मोटे अनाजों (Millets), दालों और फोर्टिफाइड चावल को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए।
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निष्कर्ष:
वैश्विक भुखमरी सूचकांक 2026 भारत के लिए एक नीतिगत चेतावनी है। सतत विकास लक्ष्य-2 (SDG 2: शून्य भुखमरी) को 2030 तक प्राप्त करने के लिए भारत को अपनी सामाजिक-आर्थिक नीतियों में लोक-केंद्रित और बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण अपनाने की तत्काल आवश्यकता है।

