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Blog / 14 Jan 2026

ग्रीनलैंड का भू-राजनीतिक महत्व

संदर्भ:

हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आर्कटिक क्षेत्र में चीन और रूस के प्रभाव को रोकने के उद्देश्य से ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की बात करने से डेनमार्क के प्रभुत्व वाला यह विशाल आर्कटिक द्वीप, अपनी रणनीतिक लोकेशन और भरपूर प्राकृतिक संसाधनों की वजह से दुनिया भर में भू-राजनीतिक का केंद्र बिंदु बन गया है।

ग्रीनलैंड का महत्व:

        • विशाल प्राकृतिक संसाधन:
          • ग्रीनलैंड भूवैज्ञानिक रूप से दुर्लभ खनिज तत्वों, लिथियम, ग्रेफाइट, यूरेनियम तथा संभावित रूप से तेल और गैस से समृद्ध है। ये संसाधन हरित प्रौद्योगिकी, रक्षा उद्योग और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
          • ऐसा अनुमान है कि ग्रीनलैंड में लगभग पंद्रह लाख टन दुर्लभ खनिज तत्व हो सकते हैं, जिससे यह विश्व के प्रमुख महत्वपूर्ण खनिज भंडारों में से एक है, हालाँकि अभी तक कोई व्यावसायिक खनन गतिविधि शुरू नहीं हुई है।
        • आर्कटिक जलवायु और पहुँच
          • जलवायु परिवर्तन के कारण विशाल बर्फ की परतें तेजी से पिघल रही हैं, जिससे चट्टानी सतहें आंशिक रूप से उजागर हो रही हैं।
          • बर्फ पिघलने के साथ इससे खनिज संसाधनों तक पहुँच आसान हो सकती है और नए आर्कटिक समुद्री मार्ग खुल सकते हैं, जिससे वैश्विक व्यापार के स्वरूप में परिवर्तन संभव है।
        • रणनीतिक स्थिति
          • ग्रीनलैंड उत्तर अमेरिका और यूरोप के बीच एक अत्यंत महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक स्थान पर स्थित है। यह आर्कटिक क्षेत्र की उत्तरी रक्षा व्यवस्था का एक प्रमुख आधार है और महत्वपूर्ण वायु तथा समुद्री मार्गों के निकट स्थित है। यह क्षेत्र नाटो की प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों और समुद्री निगरानी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण भी है।

Why Greenland matters in Global Geopolitics - Global Defense News - GSDN

संसाधनों का दोहन कठिन क्यों है?

        • संसाधन क्षमता होने के बावजूद ग्रीनलैंड में उनके दोहन के सामने गंभीर बाधाएँ हैं:
          • अत्यंत कठोर जलवायु: द्वीप का अधिकांश भाग मोटी बर्फ की चादरों से ढका है और तापमान शून्य से चालीस डिग्री नीचे तक चला जाता है, जिससे खनन गतिविधियों की अवधि और व्यवहारिकता बहुत सीमित हो जाती है।
          • कमज़ोर आधारभूत संरचना: सड़कों का अभाव, सीमित बंदरगाह सुविधाएँ और रेल संपर्क न होने के कारण परिवहन, आपूर्ति व्यवस्था और निर्माण कार्य अत्यंत कठिन हो जाते हैं।
          • उच्च लागत और तकनीकी बाधाएँ: जटिल भूगर्भीय संरचना, जैसे कठोर चट्टानों में फँसे दुर्लभ खनिज तत्व, खनन लागत को बढ़ा देती है।इसके अतिरिक्त, कड़े पर्यावरणीय नियम और स्थानीय समुदायों का विरोध भी विकास प्रयासों को जटिल बनाते हैं।
        • इन सभी कारणों से, बड़े अनुमानित भंडार होने के बावजूद ग्रीनलैंड में अब तक बड़े पैमाने पर दुर्लभ खनिजों का खनन या तेल उत्पादन शुरू नहीं हो पाया है।

अमेरिका की रणनीतिक रुचि:

        • सुरक्षा संबंधी कारण: ग्रीनलैंड पर अमेरिका का प्रभाव बढ़ने से आर्कटिक क्षेत्र में रूसी और चीनी गतिविधियों के विरुद्ध रक्षा क्षमताएँ मजबूत होंगी। हालाँकि, पिटुफिक अंतरिक्ष अड्डा के माध्यम से संयुक्त राज्य अमेरिका पहले से ही वहाँ सैन्य उपस्थिति बनाए हुए है।
        • दुर्लभ खनिज और आपूर्ति व्यवस्था: अमेरिका दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति में चीन के प्रभुत्व से निर्भरता कम करना चाहता है, और इस दीर्घकालिक रणनीति में ग्रीनलैंड के खनिज भंडार महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
        • भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा: विश्लेषकों के अनुसार, ग्रीनलैंड में अमेरिकी रुचि आर्कटिक क्षेत्र के रणनीतिक स्थान और संसाधनों पर नियंत्रण के लिए महाशक्तियों के बीच चल रही व्यापक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा है।

वैश्विक राजनीति पर प्रभाव:

        • महाशक्ति प्रतिस्पर्धा: चीन, रूस, अमेरिका और यूरोपीय संघ आर्कटिक कूटनीति और अन्वेषण में तेजी से सक्रिय हो रहे हैं, जिससे यह क्षेत्र रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का नया मंच बनता जा रहा है।
        • ऊर्जा और प्रौद्योगिकी बाज़ार: ग्रीनलैंड के दुर्लभ खनिजों और अन्य संसाधनों तक पहुँच इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा निर्माण से जुड़ी वैश्विक आपूर्ति व्यवस्थाओं को नया स्वरूप दे सकती है।
        • पर्यावरणीय चिंताएँ: जहाँ जलवायु परिवर्तन आर्कटिक क्षेत्र को अधिक सुलभ बना रहा है, वहीं यह नाज़ुक पारिस्थितिकी तंत्र और वहाँ रहने वाले मूल निवासियों के लिए दीर्घकालिक जोखिम भी उत्पन्न कर रहा हैं।