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Blog / 01 Jun 2026

जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि भारत के तीसरे CDS बने।

संदर्भ:

हाल ही में एन.एस. राजा सुब्रमणि ने भारत के तीसरे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) तथा सैन्य मामलों के विभाग (Department of Military Affairs - DMA) के सचिव के रूप में पदभार ग्रहण किया।

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के बारे में:

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ भारत का सर्वोच्च सैन्य अधिकारी होता है, जो निम्नलिखित भूमिकाएँ निभाता है:

      • रक्षा मंत्री का मुख्य सैन्य सलाहकार (Principal Military Adviser)
      • चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (COSC) का स्थायी अध्यक्ष।
      • सैन्य मामलों के विभाग (DMA) का सचिव।
      • थल सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच संयुक्तता (Jointness) और एकीकरण (Integration) को बढ़ावा देने वाला अधिकारी।

सीडीएस नागरिक नेतृत्व और सशस्त्र बलों के बीच सेतु का कार्य करता है तथा एकीकृत सैन्य योजना एवं क्षमता विकास को प्रोत्साहित करता है।

भारत में सीडीएस प्रणाली का विकास:

·        कारगिल समीक्षा समिति (1999): कारगिल समीक्षा समिति ने कारगिल युद्ध के बाद सशस्त्र बलों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।

·        मंत्रियों का समूह (2001): सरकार को एक एकल सैन्य सलाहकार (Single-Point Military Adviser) नियुक्त करने की सिफारिश की।

·        नरेश चंद्र समिति (2012): नरेश चंद्र समिति ने उच्च रक्षा प्रबंधन में संस्थागत सुधारों का सुझाव दिया।

·        शेकटकर समिति: शेकटकर समित ने संयुक्तता और सैन्य सुधारों की आवश्यकता को दोहराया।

सीडीएस पद की स्थापना:

    • भारत सरकार द्वारा 2019 में घोषणा।
    • दिसंबर 2019 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृति।
    • बिपिन रावत 1 जनवरी 2020 को भारत के पहले CDS बने।

सीडीएस पद के गठन के उद्देश्य:

संयुक्तता (Jointness) को बढ़ावा देना

      • तीनों सेनाओं के बीच समन्वय बढ़ाना।
      • एकीकृत योजना और संयुक्त अभियानों का विकास।

थिएटर कमांड को प्रोत्साहन

      • सेवा-विशिष्ट कमांडों को एकीकृत थिएटर कमांड में परिवर्तित करना।
      • आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी सामना करना।

संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग

      • खरीद एवं लॉजिस्टिक्स में दोहराव को कम करना।
      • रक्षा व्यय की लागत-प्रभावशीलता बढ़ाना।

स्वदेशी रक्षा उत्पादन को मजबूत करना

      • आत्मनिर्भर भारत के तहत घरेलू निर्माण को बढ़ावा देना।
      • विदेशी सैन्य उपकरणों पर निर्भरता कम करना।

सीडीएस के कार्यालय का महत्व:

रणनीतिक समन्वय

तीनों सेनाओं के बीच संसाधनों के दोहराव (duplication) को कम करता है।
राष्ट्रीय सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए एकीकृत और समन्वित दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है।
एकीकृत थिएटर कमांड

एकीकृत त्रि-सेवा थिएटर कमांडों के निर्माण का प्रमुख प्रेरक है।
थल सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच निर्बाध समन्वय को आसान बनाता है।
आधुनिक बहु-क्षेत्रीय (multi-domain) युद्ध के लिए भारत की तैयारी को मजबूत करता है।

प्राथमिकता आधारित रक्षा अधिग्रहण

पूंजीगत खरीद प्रक्रियाओं की दक्षता में सुधार करता है।
अंतर-सेवा मतभेदों को सुलझाने और महत्वपूर्ण क्षमता आवश्यकताओं को प्राथमिकता देने में मदद करता है।
यह सुनिश्चित करता है कि सैन्य आधुनिकीकरण कार्यक्रम बिना अनावश्यक देरी के लागू हों।

सीडीएस से जुड़े चुनौतियाँ:

अंतर-सेवा प्रतिद्वंद्विता

सेना, नौसेना और वायु सेना के अलग-अलग परिचालन सिद्धांतों, प्राथमिकताओं और आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती है।
निरंतर सहमति-निर्माण और संस्थागत सहयोग की आवश्यकता होती है।

कमांड संरचना में अस्पष्टता

सीडीएस, सेवा प्रमुखों और रक्षा सचिव के बीच जिम्मेदारियों का ओवरलैप निर्णय लेने और कमांड श्रृंखला में अनिश्चितता पैदा कर सकता है।
प्रभावी सैन्य प्रबंधन के लिए भूमिकाओं का स्पष्ट निर्धारण आवश्यक है।

वित्तीय बाधाएँ

थिएटर कमांड की स्थापना और बल पुनर्गठन जैसे बड़े सुधारों के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है।
बजटीय सीमाएँ कार्यान्वयन की गति और दायरे को प्रभावित कर सकती हैं।

 

 

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