संदर्भ:
हाल ही में एन.एस. राजा सुब्रमणि ने भारत के तीसरे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) तथा सैन्य मामलों के विभाग (Department of Military Affairs - DMA) के सचिव के रूप में पदभार ग्रहण किया।
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के बारे में:
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ भारत का सर्वोच्च सैन्य अधिकारी होता है, जो निम्नलिखित भूमिकाएँ निभाता है:
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- रक्षा मंत्री का मुख्य सैन्य सलाहकार (Principal Military Adviser)।
- चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (COSC) का स्थायी अध्यक्ष।
- सैन्य मामलों के विभाग (DMA) का सचिव।
- थल सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच संयुक्तता (Jointness) और एकीकरण (Integration) को बढ़ावा देने वाला अधिकारी।
- रक्षा मंत्री का मुख्य सैन्य सलाहकार (Principal Military Adviser)।
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सीडीएस नागरिक नेतृत्व और सशस्त्र बलों के बीच सेतु का कार्य करता है तथा एकीकृत सैन्य योजना एवं क्षमता विकास को प्रोत्साहित करता है।
भारत में सीडीएस प्रणाली का विकास:
· कारगिल समीक्षा समिति (1999): कारगिल समीक्षा समिति ने कारगिल युद्ध के बाद सशस्त्र बलों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।
· मंत्रियों का समूह (2001): सरकार को एक एकल सैन्य सलाहकार (Single-Point Military Adviser) नियुक्त करने की सिफारिश की।
· नरेश चंद्र समिति (2012): नरेश चंद्र समिति ने उच्च रक्षा प्रबंधन में संस्थागत सुधारों का सुझाव दिया।
· शेकटकर समिति: शेकटकर समित ने संयुक्तता और सैन्य सुधारों की आवश्यकता को दोहराया।
सीडीएस पद की स्थापना:
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- भारत सरकार द्वारा 2019 में घोषणा।
- दिसंबर 2019 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृति।
- बिपिन रावत 1 जनवरी 2020 को भारत के पहले CDS बने।
- भारत सरकार द्वारा 2019 में घोषणा।
सीडीएस पद के गठन के उद्देश्य:
संयुक्तता (Jointness) को बढ़ावा देना
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- तीनों सेनाओं के बीच समन्वय बढ़ाना।
- एकीकृत योजना और संयुक्त अभियानों का विकास।
- तीनों सेनाओं के बीच समन्वय बढ़ाना।
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थिएटर कमांड को प्रोत्साहन
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- सेवा-विशिष्ट कमांडों को एकीकृत थिएटर कमांड में परिवर्तित करना।
- आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी सामना करना।
- सेवा-विशिष्ट कमांडों को एकीकृत थिएटर कमांड में परिवर्तित करना।
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संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग
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- खरीद एवं लॉजिस्टिक्स में दोहराव को कम करना।
- रक्षा व्यय की लागत-प्रभावशीलता बढ़ाना।
- खरीद एवं लॉजिस्टिक्स में दोहराव को कम करना।
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स्वदेशी रक्षा उत्पादन को मजबूत करना
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- आत्मनिर्भर भारत के तहत घरेलू निर्माण को बढ़ावा देना।
- विदेशी सैन्य उपकरणों पर निर्भरता कम करना।
- आत्मनिर्भर भारत के तहत घरेलू निर्माण को बढ़ावा देना।
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सीडीएस के कार्यालय का महत्व:
रणनीतिक समन्वय
• तीनों सेनाओं के बीच संसाधनों के दोहराव (duplication) को कम करता है।
• राष्ट्रीय सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए एकीकृत और समन्वित दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है।
एकीकृत थिएटर कमांड
• एकीकृत त्रि-सेवा थिएटर कमांडों के निर्माण का प्रमुख प्रेरक है।
• थल सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच निर्बाध समन्वय को आसान बनाता है।
• आधुनिक बहु-क्षेत्रीय (multi-domain) युद्ध के लिए भारत की तैयारी को मजबूत करता है।
प्राथमिकता आधारित रक्षा अधिग्रहण
• पूंजीगत खरीद प्रक्रियाओं की दक्षता में सुधार करता है।
• अंतर-सेवा मतभेदों को सुलझाने और महत्वपूर्ण क्षमता आवश्यकताओं को प्राथमिकता देने में मदद करता है।
• यह सुनिश्चित करता है कि सैन्य आधुनिकीकरण कार्यक्रम बिना अनावश्यक देरी के लागू हों।
सीडीएस से जुड़े चुनौतियाँ:
अंतर-सेवा प्रतिद्वंद्विता
• सेना, नौसेना और वायु सेना के अलग-अलग परिचालन सिद्धांतों, प्राथमिकताओं और आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती है।
• निरंतर सहमति-निर्माण और संस्थागत सहयोग की आवश्यकता होती है।
कमांड संरचना में अस्पष्टता
• सीडीएस, सेवा प्रमुखों और रक्षा सचिव के बीच जिम्मेदारियों का ओवरलैप निर्णय लेने और कमांड श्रृंखला में अनिश्चितता पैदा कर सकता है।
• प्रभावी सैन्य प्रबंधन के लिए भूमिकाओं का स्पष्ट निर्धारण आवश्यक है।
वित्तीय बाधाएँ
• थिएटर कमांड की स्थापना और बल पुनर्गठन जैसे बड़े सुधारों के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है।
• बजटीय सीमाएँ कार्यान्वयन की गति और दायरे को प्रभावित कर सकती हैं।

