संदर्भ:
हाल ही में, फ्रांस में बढ़ती जीवन-यापन लागत, सार्वजनिक सेवाओं की बिगड़ती स्थिति और आर्थिक कठिनाइयों के विरोध में व्यापक प्रदर्शन हो रहे हैं। राजनीतिक बिखराव और 2027 के राष्ट्रपति चुनाव के निकट आने के कारण इस संकट ने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार पर दबाव और बढ़ा दिया है।
फ्रांस की प्रमुख आर्थिक समस्याएँ:
-
-
- उच्च राजकोषीय घाटा और सार्वजनिक ऋण: वर्ष 2025 में फ्रांस का राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 5.1% था, जबकि सार्वजनिक ऋण GDP के 115.5% तक पहुँच गया। सरकार के राजस्व की तुलना में लगातार अधिक खर्च होने के कारण उसे उधार लेना पड़ता है। इससे ब्याज भुगतान बढ़ता है और सार्वजनिक सेवाओं के लिए उपलब्ध धन कम हो जाता है।
- धीमी आर्थिक वृद्धि: वर्ष 2023 से फ्रांस की औसत आर्थिक वृद्धि लगभग 1.4% रही है। धीमी आर्थिक वृद्धि से कर राजस्व बढ़ाने की क्षमता सीमित होती है और सार्वजनिक ऋण को कम करना अधिक कठिन हो जाता है।
- बढ़ता पेंशन व्यय: फ्रांस की जनसंख्या में वृद्ध लोगों की हिस्सेदारी बढ़ रही है। लोग अधिक समय तक जीवित रह रहे हैं, जिससे पेंशन संबंधी दायित्व भी बढ़ रहे हैं। सरकार द्वारा सेवानिवृत्ति की आयु 62 वर्ष से बढ़ाकर 64 वर्ष करने के प्रस्ताव का व्यापक विरोध हुआ है। पेंशन पर बढ़ते खर्च से शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और बुनियादी ढाँचे पर होने वाले व्यय पर भी दबाव पड़ता है।
- जीवन-यापन लागत का संकट: जीवन-यापन की बढ़ती लागत और सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में गिरावट की आशंकाओं ने लोगों में असंतोष बढ़ाया है। इसका प्रभाव विशेष रूप से छात्रों और श्रमिकों पर पड़ा है। केवल आर्थिक वृद्धि होने से यह सुनिश्चित नहीं होता कि सभी नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार होगा।
- उच्च राजकोषीय घाटा और सार्वजनिक ऋण: वर्ष 2025 में फ्रांस का राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 5.1% था, जबकि सार्वजनिक ऋण GDP के 115.5% तक पहुँच गया। सरकार के राजस्व की तुलना में लगातार अधिक खर्च होने के कारण उसे उधार लेना पड़ता है। इससे ब्याज भुगतान बढ़ता है और सार्वजनिक सेवाओं के लिए उपलब्ध धन कम हो जाता है।
-
संकट के राजनीतिक आयाम:
दक्षिणपंथी अतिवादी शक्तियों, वामपंथी दलों और मध्यमार्गी राजनीतिक शक्तियों के बीच बढ़ते ध्रुवीकरण ने राजकोषीय सुधारों को जटिल बना दिया है। विभाजित संसद के कारण कराधान, पेंशन सुधार और सरकारी खर्च में कटौती जैसे मुद्दों पर सहमति बनाना कठिन हो गया है। परिणामस्वरूप, राजनीतिक अस्थिरता आर्थिक अनिश्चितता बढ़ाती है और निजी निवेश को हतोत्साहित कर सकती है।
फ्रांस अनिश्चितकाल तक उधार क्यों नहीं ले सकता?
-
-
- सार्वजनिक ऋण बढ़ने से सरकार के लिए उधार लेने की लागत बढ़ सकती है, क्योंकि निवेशक संभावित जोखिमों की भरपाई के लिए अधिक ब्याज की माँग करते हैं। ब्याज भुगतान बढ़ने से सरकार के पास अन्य आवश्यक कार्यों के लिए उपलब्ध वित्तीय संसाधन कम हो जाते हैं। इससे उत्पादक क्षेत्रों पर होने वाला खर्च भी प्रभावित हो सकता है।
- इसके अतिरिक्त, यूरो क्षेत्र के सदस्य होने के कारण फ्रांस स्वतंत्र रूप से अपनी मुद्रा जारी नहीं कर सकता। उसकी मौद्रिक नीति का संचालन यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ECB) करता है।
- सार्वजनिक ऋण बढ़ने से सरकार के लिए उधार लेने की लागत बढ़ सकती है, क्योंकि निवेशक संभावित जोखिमों की भरपाई के लिए अधिक ब्याज की माँग करते हैं। ब्याज भुगतान बढ़ने से सरकार के पास अन्य आवश्यक कार्यों के लिए उपलब्ध वित्तीय संसाधन कम हो जाते हैं। इससे उत्पादक क्षेत्रों पर होने वाला खर्च भी प्रभावित हो सकता है।
-
यूरोपीय संघ पर प्रभाव:
फ्रांस की आर्थिक कठिनाइयाँ यूरो क्षेत्र की वित्तीय स्थिरता, निवेशकों के विश्वास और यूरोपीय संघ के राजकोषीय नियमों के अनुपालन को प्रभावित कर सकती हैं। यह संकट राष्ट्रीय स्तर पर राजकोषीय नीतियाँ निर्धारित करने की स्वतंत्रता और साझा मौद्रिक नीति के बीच मौजूद तनाव को भी उजागर करता है।
भारत का दृष्टिकोण:
-
-
- भारत और फ्रांस ने वर्ष 1998 में रणनीतिक साझेदारी स्थापित की थी। फरवरी 2026 में इस संबंध को विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी (Special Global Strategic Partnership) का दर्जा दिया गया। दोनों देशों के बीच रक्षा, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, प्रौद्योगिकी और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग होता है।
- रक्षा सहयोग: फ्रांस राफेल लड़ाकू विमानों सहित रक्षा उपकरणों का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता है। फ्रांस में किसी भी संकट का भारत की सुरक्षा पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
- नागरिक परमाणु ऊर्जा: प्रस्तावित जैतापुर परमाणु ऊर्जा परियोजना सहित दोनों देशों के बीच सहयोग भारत की ऊर्जा सुरक्षा और कम कार्बन उत्सर्जन वाले विकास को बढ़ावा देता है। फ्रांस की राजकोषीय कठिनाइयों का परियोजना की लागत या समय-सीमा पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसके लिए परियोजना-विशिष्ट साक्ष्यों की आवश्यकता है।
- व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी: आर्थिक अनिश्चितता व्यावसायिक निर्णयों और निवेश को प्रभावित कर सकती है। भारत को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, घरेलू मूल्य संवर्धन और विविध आर्थिक साझेदारियों को प्रोत्साहित करना चाहिए।
- हिंद-प्रशांत और रणनीतिक स्वायत्तता: फ्रांस समुद्री सुरक्षा और बहुध्रुवीय अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की दिशा में भारत के प्रयासों का एक महत्त्वपूर्ण साझेदार है। दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक सहयोग बनाए रखने के लिए फ्रांस की स्थिरता महत्त्वपूर्ण है।
- भारत और फ्रांस ने वर्ष 1998 में रणनीतिक साझेदारी स्थापित की थी। फरवरी 2026 में इस संबंध को विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी (Special Global Strategic Partnership) का दर्जा दिया गया। दोनों देशों के बीच रक्षा, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, प्रौद्योगिकी और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग होता है।
-
भारत के लिए सीख:
-
-
- राजकोषीय अनुशासन: मध्यम अवधि में राजकोषीय समेकन के लिए एक विश्वसनीय योजना बनाए रखना।
- कल्याणकारी सुधार: आवश्यक सामाजिक सुरक्षा को कमजोर किए बिना सरकारी खर्च की दक्षता में सुधार करना।
- पेंशन की स्थिरता: बढ़ती आयु वाली जनसंख्या की चुनौतियों के लिए तैयारी करना और दीर्घकालिक पेंशन वित्तपोषण को मजबूत बनाना।
- लोकतांत्रिक परामर्श: सुधारों के बारे में पारदर्शिता बनाए रखना और संबंधित हितधारकों से परामर्श करना।
- आर्थिक लचीलापन: विनिर्माण, रोजगार, उत्पादकता और कर आधार का विस्तार करना।
- राजकोषीय अनुशासन: मध्यम अवधि में राजकोषीय समेकन के लिए एक विश्वसनीय योजना बनाए रखना।
-

