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Blog / 04 Jun 2026

फ्लेक्स फ्यूल वाहन और एथेनॉल मिश्रण: ऊर्जा सुरक्षा

संदर्भ:

हाल ही में नई दिल्ली में भारत की एक मोटर निर्माता कंपनी हीरो मोटोकॉर्प (Hero MotoCorp) ने भारत की पहली फ्लेक्स-फ्यूल मोटरसाइकिलें लॉन्च की हैं। E20 से E85 तक के एथेनॉल मिश्रणों के अनुकूल, ये मोटरसाइकिलें मास-मार्केट फ्लेक्स-फ्यूल मोबिलिटी में भारत के प्रवेश का प्रतीक हैं।

फ्लेक्स फ्यूल वाहनों (FFVs) के बारे में:

फ्लेक्स फ्यूल वाहन ऐसे ऑटोमोबाइल हैं जो पेट्रोल, एथेनॉल या दोनों के मिश्रण पर चल सकते हैं। वे बिना किसी मैनुअल हस्तक्षेप के E20 और E85 जैसे मिश्रणों पर आसानी से काम कर सकते हैं। एथेनॉल एक नवीकरणीय जैव ईंधन (renewable biofuel) है, जो कृषि उत्पादों जैसे गन्ना, मक्का, अतिरिक्त अनाज और कृषि अवशेषों से उत्पन्न होता है।

फ्लेक्स फ्यूल तकनीक की मुख्य विशेषताएं:

      • स्वचालित ईंधन अनुकूलन (Automatic Fuel Adaptation): उन्नत सेंसर और एक इंजन कंट्रोल मॉड्यूल (ECM) ईंधन के मिश्रण का पता लगाते हैं और इंजन के मापदंडों को स्वचालित रूप से समायोजित करते हैं।
      • मल्टीपल ब्लेंड्स (मिश्रणों) के साथ अनुकूलता: FFV पेट्रोल, एथेनॉल, या E20, E30 और E85 जैसे विभिन्न मिश्रणों पर काम कर सकते हैं।
      • कम कार्बन उत्सर्जन: एथेनॉल पेट्रोल की तुलना में अधिक साफ जलता है, जिससे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और वायु प्रदूषण कम होता है।
      • स्वदेशी समाधान: चूँकि एथेनॉल का उत्पादन घरेलू स्तर पर किया जाता है, फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक आयातित जीवाश्म ईंधन (imported fossil fuels) पर निर्भरता को कम करती है।

भारत के लिए फ्लेक्स फ्यूल वाहनों का महत्व:

·         कच्चे तेल के आयात में कमी: भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 88% आयात करता है। फ्लेक्स फ्यूल वाहनों (FFVs) को अधिक अपनाने से ऊर्जा सुरक्षा में सुधार हो सकता है और विदेशी मुद्रा खर्च को कम किया जा सकता है।

·         किसानों की आय को मजबूती: इथेनॉल के उत्पादन से कृषि उत्पादों की अतिरिक्त मांग पैदा होती है, जिससे किसानों को आय के नए अवसर मिलते हैं। इथेनॉल मिश्रित कार्यक्रम (EBP) ने 2014 से किसानों के लिए ₹1.58 लाख करोड़ से अधिक की कमाई उत्पन्न की है।

·         पर्यावरणीय लाभ: इथेनॉल के बढ़ते उपयोग से कार्बन उत्सर्जन कम होता है, वाहनों से होने वाला प्रदूषण घटता है और भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं को समर्थन मिलता है।

·         सुलभ कम कार्बन वाली मोबिलिटी: इलेक्ट्रिक वाहनों के विपरीत, FFV मौजूदा ईंधन बुनियादी ढांचे (infrastructure) का उपयोग कर सकते हैं, जिससे इन्हें अपनाना तेज और अधिक लागत प्रभावी हो जाता है।

इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम (EBP) के बारे में:

2003 में शुरू किए गए इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात को कम करना, ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाना, उत्सर्जन को कम करना और किसानों के लिए लाभकारी बाजार तैयार करना है।

प्रमुख उपलब्धियां:

·         राष्ट्रव्यापी स्तर पर इथेनॉल सम्मिश्रण (blending) 2014 के लगभग 1.5% से बढ़कर मार्च 2025 तक 20% हो गया।

·         विदेशी मुद्रा में महत्वपूर्ण बचत और कच्चे तेल की खपत में कमी हासिल की गई है।

प्रभाव:

·         विदेशी मुद्रा में लगभग ₹1.84 लाख करोड़ की बचत हुई।

·         302 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चे तेल की जगह इथेनॉल का उपयोग किया गया।

·         लगभग 909 लाख मीट्रिक टन CO उत्सर्जन कम हुआ।

इथेनॉल-आधारित मोबिलिटी के लिए नीतिगत समर्थन:

सरकार ने राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति (National Policy on Biofuels), PM-JI-VAN योजना, ब्याज सहायता योजना (Interest Subvention Scheme) और इथेनॉल पर GST को 18% से घटाकर 5% करने सहित कई उपाय शुरू किए हैं। इसके अतिरिक्त, भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान शुरू किया गया 'वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन' (Global Biofuels Alliance) जैव ईंधन विकास में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है।

चुनौतियां:
प्रमुख चुनौतियों में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की सीमित उपलब्धता , उच्च इथेनॉल मिश्रण के लिए अपर्याप्त बुनियादी ढांचा, कराधान (taxation) संबंधी विकृतियां, फीडस्टॉक की स्थिरता संबंधी चिंताएं और उपभोक्ताओं में जागरूकता की कमी शामिल है।

निष्कर्ष:
भारत की पहली मास-मार्केट फ्लेक्स-फ्यूल मोटरसाइकिलों की शुरुआत टिकाऊ (sustainable) मोबिलिटी और ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है। इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम और मजबूत नीतिगत पहलों द्वारा समर्थित, फ्लेक्स-फ्यूल वाहन तेल आयात को कम कर सकते हैं, किसानों की आय बढ़ा सकते हैं और उत्सर्जन को कम कर सकते हैं। बुनियादी ढांचे, जागरूकता और नवाचार में निरंतर निवेश के साथ, भारत इथेनॉल-आधारित परिवहन और जैव ईंधन विकास में वैश्विक नेता के रूप में उभर सकता है।

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