सन्दर्भ:
हाल ही में, रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL), विशाखापत्तनम में फ्लीट सपोर्ट शिप-1 (FSS-1) को लॉन्च किया, FSS-5 की कील रखी तथा उन्नत स्लिपवे-4 और 300 टन क्षमता वाली गोलियथ क्रेन का उद्घाटन किया। ये विकास रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्वदेशी जहाज निर्माण के भारत के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हैं।
फ्लीट सपोर्ट शिप क्या है?
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- एक फ्लीट सपोर्ट शिप (FSS) एक विशेष नौसैनिक लॉजिस्टिक्स पोत है, जिसे समुद्र में तैनात युद्धपोतों को ईंधन, पानी, गोला-बारूद, स्पेयर पार्ट्स और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने के लिए डिजाइन किया जाता है। यह एक तैरते हुए लॉजिस्टिक्स बेस के रूप में कार्य करता है, जिससे युद्धपोतों को समुद्र में पुनःपूर्ति (Replenishment at Sea-RAS) की सुविधा मिलती है और वे लंबे समय तक बंदरगाह लौटे बिना परिचालन में बने रह सकते हैं।
- इस प्रकार, FSS नौसेना की परिचालन क्षमता, गतिशीलता और रणनीतिक पहुँच को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाते हैं, जो एक ब्लू-वॉटर नौसेना के लिए आवश्यक हैं।
- एक फ्लीट सपोर्ट शिप (FSS) एक विशेष नौसैनिक लॉजिस्टिक्स पोत है, जिसे समुद्र में तैनात युद्धपोतों को ईंधन, पानी, गोला-बारूद, स्पेयर पार्ट्स और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने के लिए डिजाइन किया जाता है। यह एक तैरते हुए लॉजिस्टिक्स बेस के रूप में कार्य करता है, जिससे युद्धपोतों को समुद्र में पुनःपूर्ति (Replenishment at Sea-RAS) की सुविधा मिलती है और वे लंबे समय तक बंदरगाह लौटे बिना परिचालन में बने रह सकते हैं।
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भारत का FSS कार्यक्रम:
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- भारतीय नौसेना हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL), विशाखापत्तनम के माध्यम से पाँच फ्लीट सपोर्ट शिप के निर्माण की स्वदेशी परियोजना पर कार्य कर रही है। पहला पोत, FSS-1, 6 अक्टूबर 2026 को लॉन्च किया गया।
- इन जहाजों का विस्थापन लगभग 43,500–45,000 टन होने की उम्मीद है और ये हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) तथा इसके बाहर लंबे समय तक नौसैनिक अभियानों को समर्थन प्रदान करेंगे।
- FSS-5 की कील रखे जाने से श्रृंखलाबद्ध उत्पादन की दिशा में प्रगति हुई है और देश में जटिल नौसैनिक जहाज निर्माण परियोजनाओं को संचालित करने की भारत की क्षमता मजबूत हुई है।
- भारतीय नौसेना हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL), विशाखापत्तनम के माध्यम से पाँच फ्लीट सपोर्ट शिप के निर्माण की स्वदेशी परियोजना पर कार्य कर रही है। पहला पोत, FSS-1, 6 अक्टूबर 2026 को लॉन्च किया गया।
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HSL का आधुनिकीकरण:
उन्नत स्लिपवे-4, साथ ही 300 टन क्षमता वाली गोलियथ क्रेन, HSL की बड़े जहाजों के निर्माण और उन्हें लॉन्च करने की क्षमता को बढ़ाएगी। ऐसी अवसंरचना एक मजबूत घरेलू जहाज निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने और विदेशी शिपयार्डों पर निर्भरता कम करने के लिए महत्वपूर्ण है।
रणनीतिक महत्व:
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- आत्मनिर्भर भारत: स्वदेशी निर्माण रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता को मजबूत करता है।
- ब्लू-वॉटर क्षमता: FSS नौसैनिक युद्धपोतों को लंबे समय तक तैनात रहने में सक्षम बनाते हैं, जिससे भारत की समुद्री उपस्थिति मजबूत होती है।
- हिंद-प्रशांत सुरक्षा: बेहतर लॉजिस्टिक क्षमता भारत की नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर के रूप में भूमिका को मजबूत करती है और समुद्री स्थिरता में योगदान देती है।
- रणनीतिक स्वायत्तता: विदेशी शिपयार्डों और तटवर्ती पुनःपूर्ति सुविधाओं पर कम निर्भरता लंबे समय तक चलने वाले अभियानों के दौरान भारत की स्वतंत्र कार्रवाई की क्षमता को मजबूत करती है।
- समुद्री लॉजिस्टिक्स: विश्वसनीय पुनःपूर्ति क्षमता समुद्री मार्गों की सुरक्षा, भारत के समुद्री हितों की रक्षा तथा मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) अभियानों को समर्थन देने के लिए महत्वपूर्ण है।
- आत्मनिर्भर भारत: स्वदेशी निर्माण रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता को मजबूत करता है।
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चुनौतियाँ:
भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी समुद्री-औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए जहाज निर्माण प्रौद्योगिकी, कुशल मानव संसाधन, घरेलू आपूर्ति श्रृंखला, घटक निर्माण और परियोजना क्रियान्वयन को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
निष्कर्ष:
फ्लीट सपोर्ट शिप कार्यक्रम केवल भारतीय नौसेना के बेड़े में एक और पोत को शामिल करना नहीं है; यह भारत के आत्मनिर्भर समुद्री शक्ति बनने की दिशा में परिवर्तन का प्रतीक है। नौसैनिक लॉजिस्टिक्स को स्वदेशी जहाज निर्माण अवसंरचना के साथ जोड़कर भारत अपनी ब्लू-वॉटर क्षमताओं, रणनीतिक स्वायत्तता तथा एक सुरक्षित और स्थिर हिंद-प्रशांत में योगदान देने की क्षमता को बढ़ा सकता है।

