संदर्भ:
हाल ही में, भारत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में पहली बिम्सटेक गृह मंत्रियों की बैठक की मेजबानी की। बैठक का समापन दिल्ली घोषणा-पत्र को अपनाने के साथ हुआ, जिसका उद्देश्य आतंकवाद, मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, साइबर अपराध और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के विरुद्ध क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करना है।
बिम्सटेक के बारे में:
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- बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल (BIMSTEC) एक क्षेत्रीय संगठन है, जिसकी स्थापना 6 जून 1997 को हुई थी। इसका सचिवालय ढाका, बांग्लादेश में स्थित है।
- सदस्य देश: भारत, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार और थाईलैंड।
- बिम्सटेक दक्षिण एशिया को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ता है और व्यापार, संपर्क, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, आपदा प्रबंधन तथा सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देता है।
- बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल (BIMSTEC) एक क्षेत्रीय संगठन है, जिसकी स्थापना 6 जून 1997 को हुई थी। इसका सचिवालय ढाका, बांग्लादेश में स्थित है।
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पृष्ठभूमि:
गृह मंत्रियों के बीच सहयोग को मजबूत करने की पहल बिम्सटेक के क्षेत्रीय सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से निपटने के प्रयासों के तहत सामने आई। काठमांडू में आयोजित चौथे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन (2018) में आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय अपराध के विरुद्ध सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया गया। बैंकॉक में आयोजित छठे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन (2025) में गृह मंत्रियों की बैठक के तंत्र की स्थापना का स्वागत किया गया। वर्ष 2026 में आयोजित पहली बैठक क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम साबित हुई।
बैठक के प्रमुख परिणाम:
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- दिल्ली घोषणा-पत्र को अपनाना: सदस्य देशों ने बंगाल की खाड़ी क्षेत्र को सुरक्षित, सुदृढ़ और समृद्ध बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
- आतंकवाद-रोधी सहयोग: बैठक में खुफिया जानकारी साझा करने, आतंकवादी वित्तपोषण की रोकथाम, कट्टरपंथ का मुकाबला करने और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग पर जोर दिया गया।
- संगठित अपराध का मुकाबला: सदस्यों ने मादक पदार्थों की तस्करी, हथियारों की तस्करी, धन शोधन और अन्य अंतरराष्ट्रीय अपराधों के विरुद्ध समन्वित कार्रवाई पर जोर दिया।
- मानव तस्करी: घोषणा-पत्र में मानव तस्करी के पीड़ितों को बचाने, उनके प्रत्यावर्तन और पुनर्वास के लिए मजबूत सहयोग का आह्वान किया गया।
- कानूनी सहयोग: सदस्यों ने पारस्परिक कानूनी सहायता तथा प्रत्यर्पण और सजा प्राप्त कैदियों के हस्तांतरण के संबंध में सहयोग की दिशा में प्रगति पर जोर दिया।
- साइबर सुरक्षा और आपदा प्रबंधन: बैठक में साइबर अपराध से निपटने और क्षेत्रीय आपदा तैयारियों को मजबूत करने के लिए क्षमता निर्माण पर जोर दिया गया।
- दिल्ली घोषणा-पत्र को अपनाना: सदस्य देशों ने बंगाल की खाड़ी क्षेत्र को सुरक्षित, सुदृढ़ और समृद्ध बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
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भारत के लिए महत्त्व:
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- राष्ट्रीय सुरक्षा: सीमा पार आतंकवाद, मादक पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराध के विरुद्ध सहयोग को मजबूत करता है।
- पड़ोसी प्रथम नीति: पड़ोसी देशों के साथ जुड़ाव को गहरा करता है।
- एक्ट ईस्ट नीति: दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ भारत की संपर्क व्यवस्था और रणनीतिक जुड़ाव को बढ़ाता है।
- समुद्री सुरक्षा: व्यापार और नौवहन के लिए बंगाल की खाड़ी को अधिक सुरक्षित बनाने में सहायता करता है।
- क्षेत्रीय नेतृत्व: सामूहिक सुरक्षा को बढ़ावा देने में भारत की भूमिका को मजबूत करता है।
- राष्ट्रीय सुरक्षा: सीमा पार आतंकवाद, मादक पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराध के विरुद्ध सहयोग को मजबूत करता है।
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चुनौतियाँ:
राजनीतिक मतभेद, अपर्याप्त संस्थागत क्षमता, अलग-अलग कानूनी ढाँचे, विश्वास की कमी और सीमित सूचना-साझाकरण, घोषणा-पत्र के कार्यान्वयन में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं।
आगे की राह:
बिम्सटेक को खुफिया जानकारी साझा करने के तंत्र को मजबूत करना चाहिए, कानूनी सहयोग में तेजी लानी चाहिए, संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास आयोजित करने चाहिए और दिल्ली घोषणा-पत्र के कार्यान्वयन के लिए मापनीय लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए।
निष्कर्ष:
पहली बिम्सटेक गृह मंत्रियों की बैठक क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। इसकी सफलता निरंतर राजनीतिक प्रतिबद्धता, आपसी विश्वास और सहमत उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन पर निर्भर करेगी।

