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Blog / 24 Mar 2026

विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम में संशोधन की संभावना

संदर्भ:

संसद के वर्तमान सत्र के दौरान, केंद्र सरकार द्वारा विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA), 2010 में संशोधन पेश करने की संभावना है। प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य विदेशी अंशदान के उपयोग में पारदर्शिता बढ़ाना, जवाबदेही को मजबूत करना और राष्ट्रीय हितों की रक्षा सुनिश्चित करना है।

विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA):

    • विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 भारत में गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), संघों और व्यक्तियों द्वारा विदेशी धन के स्वीकार और उपयोग को नियंत्रित करता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी अंशदान देश की संप्रभुता, अखंडता या आंतरिक सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव न डाले।
    • विदेशी धन प्राप्त करने के लिए किसी भी संगठन के लिए FCRA के तहत पंजीकरण अनिवार्य है।

FCRA Amendment 2026

प्रमुख प्रस्तावित संशोधन:

    • परिसंपत्ति प्रबंधन हेतु नामित प्राधिकरण
      • एकनामित प्राधिकरणकी व्यवस्था, जिसे विदेशी धन से निर्मित परिसंपत्तियों को अपने नियंत्रण में लेने, प्रबंधन करने या निपटाने का अधिकार होगा।
      • यह उन NGOs पर लागू होगा जिनका FCRA पंजीकरण निलंबित, रद्द या नवीनीकृत नहीं हुआ है।
      • इससे उस कमी को दूर किया जाएगा, जहाँ अधिनियम धन को नियंत्रित करता था, पर परिसंपत्तियों के प्रबंधन का स्पष्ट प्रावधान नहीं था।
    • मुख्य पदाधिकारीकी परिभाषा का विस्तार
      • व्यापक परिभाषा में शामिल होंगे:
        • निदेशक, भागीदार, ट्रस्टी
        • हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) का कर्ता (मुखिया)
        • शासी निकाय, प्रबंधन समिति, ट्रेड यूनियन या संघों के सदस्य
        • प्रबंधन या नियंत्रण के लिए उत्तरदायी कोई भी व्यक्ति
      • इससे संगठनात्मक संरचना में व्यापक जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
    • मुख्य पदाधिकारियों की जवाबदेही
      • मुख्य पदाधिकारियों को अधिनियम के उल्लंघन के मामलों में कानूनी रूप से उत्तरदायी बनाया जाएगा।
    • इससे व्यक्तिगत स्तर पर जवाबदेही मजबूत होगी।
    • जांच हेतु पूर्व स्वीकृति (धारा 43 संशोधन)
      • कानून प्रवर्तन एजेंसियों या राज्य सरकारों को FCRA से जुड़े मामलों की जांच शुरू करने से पहले केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी।
    • धन प्राप्ति और उपयोग की समय-सीमा
      • सरकार को विदेशी अंशदान प्राप्त करने की वैधता अवधि निर्धारित करने का अधिकार दिया जाएगा।
      • धन के उपयोग के लिए निश्चित समय-सीमा तय की जाएगी, जो पहले की खुली व्यवस्था को समाप्त करेगी।
    • दंडात्मक प्रावधानों में कमी
      • अपराधों के लिए अधिकतम कारावास अवधि को पाँच वर्ष से घटाकर एक वर्ष करने का प्रस्ताव है।

आंकड़े और क्षेत्रीय परिदृश्य:

    • लगभग 16,000 संगठन वर्तमान में FCRA के तहत पंजीकृत हैं।
    • वार्षिक विदेशी अंशदान का प्रवाह लगभग ₹22,000 करोड़ है।

संशोधन के पीछे तर्क:

      • विदेशी धन के दुरुपयोग या गलत चलन को रोकना
      • निगरानी और प्रवर्तन तंत्र को मजबूत करना
      • परिसंपत्ति प्रबंधन से संबंधित नियामक कमियों को दूर करना
      • NGOs के संचालन में शामिल व्यक्तियों की जवाबदेही बढ़ाना
      • राष्ट्रीय सुरक्षा और जनहित सुनिश्चित करना
    • ये संशोधन विदेशी वित्तपोषित संस्थाओं पर निगरानी को सख्त करने की निरंतर नीति प्रवृत्ति को भी दर्शाते हैं।

महत्त्व:

    • पारदर्शिता में वृद्धि: स्पष्ट समय-सीमा और सख्त परिभाषाएँ अनुपालन को बेहतर बनाएंगी।
    • जवाबदेही: मुख्य पदाधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी से प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी।
    • नियामक स्पष्टता: परिसंपत्ति प्रबंधन के लिए औपचारिक ढांचा उपलब्ध होगा।
    • राष्ट्रीय सुरक्षा: घरेलू मामलों में विदेशी प्रभाव पर अधिक नियंत्रण सुनिश्चित होगा।

निष्कर्ष:

FCRA में प्रस्तावित संशोधन भारत में विदेशी अंशदान के नियमन को अधिक सख्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। यद्यपि इनका उद्देश्य पारदर्शिता, जवाबदेही और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है, लेकिन इनकी प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नियामक नियंत्रण और नागरिक समाज संगठनों की कार्यगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन कैसे बनाए रखा जाता है।