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Blog / 30 Mar 2026

पेयजल में एक्स्ट्रासेलुलर RNA (exRNA): जल शोधन तकनीक में एक नई क्रांति

सन्दर्भ:

हाल ही में प्रतिष्ठित जर्नल 'क्लीन वॉटर' (Clean Water) में प्रकाशित एक शोध ने जल सुरक्षा के प्रति एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। वैज्ञानिकों ने शोध में पाया है कि कीटाणुशोधन (Disinfection) की प्रक्रिया के बाद भी बैक्टीरिया का एक्स्ट्रासेलुलर आरएनए (exRNA) पेयजल में सुरक्षित रहता है। यह खोज न केवल बैक्टीरिया की पहचान करने में मदद करती है, बल्कि यह भी बताती है कि वे मृत्यु से ठीक पहले किस तरह की जीवन रक्षा रणनीतियों का उपयोग कर रहे थे।

क्या है एक्स्ट्रासेलुलर आरएनए (exRNA):

RNA आमतौर पर जीवित कोशिकाओं के भीतर पाया जाता है और प्रोटीन संश्लेषण के लिए जिम्मेदार होता है। जब कोई बैक्टीरिया क्षतिग्रस्त होता है या मर जाता है, तो वह अपने आनुवंशिक पदार्थ (RNA) को बाहर छोड़ देता है, जिसे 'एक्स्ट्रासेलुलर आरएनए' कहा जाता है। पहले माना जाता था कि कीटाणुशोधन के दौरान यह आरएनए तुरंत नष्ट हो जाता है, लेकिन नए शोध ने सिद्ध किया है कि यह जल में बना रहता है।

अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष:

      • बायोलॉजिकल 'ब्लैक बॉक्स': शोधकर्ताओं ने exRNA की तुलना विमान के 'ब्लैक बॉक्स' से की है। जिस तरह ब्लैक बॉक्स दुर्घटना से पहले की गतिविधियों को रिकॉर्ड करता है, उसी तरह exRNA यह बताता है कि बैक्टीरिया मरने से पहले क्या गतिविधि कर रहे थे।
      • उत्तरजीविता रणनीति (Survival Strategy): RNA के विश्लेषण से यह पता चला कि बैक्टीरिया ने कीटाणुनाशक (जैसे क्लोरीन या यूवी लाइट) के खिलाफ खुद को बचाने के लिए कौन से जीन सक्रिय किए थे।
      • बेहतर कीटाणुनाशकों का विकास: इन रणनीतियों को समझकर, वैज्ञानिक अब ऐसे विशिष्ट कीटाणुनाशक तैयार कर सकते हैं जो बैक्टीरिया के इन सुरक्षा चक्रों को सीधे तोड़ सकें।

Extracellular RNA (exRNA) in Drinking Water

महत्व और आवश्यकता:

वर्तमान में जल की शुद्धता मापने के लिए 'कल्चरल' विधि का प्रयोग होता है, जिसमें यह देखा जाता है कि बैक्टीरिया पेट्री डिश में बढ़ रहे हैं या नहीं। लेकिन कई बैक्टीरिया 'वायबल बट नॉन-कल्चरेबल' (VBNC) अवस्था में चले जाते हैं यानी वे जीवित तो होते हैं पर दिखाई नहीं देते।

exRNA तकनीक के लाभ:

      • सटीकता: यह तकनीक बता सकती है कि कौन से बैक्टीरिया वास्तव में मर चुके हैं और कौन से केवल सुप्त अवस्था में हैं।
      • एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR): यह समझने में मदद मिलती है कि बैक्टीरिया रसायनों के प्रति प्रतिरोधी कैसे बन रहे हैं, जो भविष्य की महामारियों को रोकने में सहायक है।
      • सार्वजनिक स्वास्थ्य: शहरी जल आपूर्ति प्रणालियों में छिपे हुए सूक्ष्मजीवों की पहचान कर जल जनित रोगों (Cholera, Typhoid आदि) को अधिक प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है।

क्लोरीनीकरण (Chlorination) की सीमाएँ:

क्लोरीन जल शोधन का सबसे आम तरीका है, लेकिन इसकी कुछ मुख्य कमियाँ हैं:

      • प्रतिरोधी सूक्ष्मजीव: कुछ परजीवी (जैसे Cryptosporidium) क्लोरीन के प्रति बहुत सख्त होते हैं और सामान्य सांद्रता में नहीं मरते है।
      • हानिकारक उप-उत्पाद (DBPs): जब क्लोरीन पानी में मौजूद कार्बनिक पदार्थों (जैसे पत्तियां या मिट्टी) से क्रिया करता है, तो ट्राइहैलोमेथेन (THMs) जैसे कैंसरकारी तत्व बन सकते हैं।

निष्कर्ष:

यह शोध जल उपचार के क्षेत्र में एक 'प्रतिक्रियाशील' (Reactive) दृष्टिकोण से 'निवारक' (Proactive) दृष्टिकोण की ओर बढ़ने का संकेत है। सूक्ष्मजीवों की अंतिम रक्षा पंक्ति को समझकर अपनी जल शोधन प्रणालियों को और अधिक सुरक्षित और आधुनिक बना सकते हैं।