यूएलपीजीएम - वी3 मिसाइल
संदर्भ:
हाल ही में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने यूएलपीजीएम - वी3 के अंतिम विकास परीक्षणों को कुरनूल (आंध्र प्रदेश) के निकट स्थित परीक्षण क्षेत्र में सफलतापूर्वक पूरा किया। इस प्रणाली का परीक्षण वायु-से-भूमि (air-to-ground) तथा वायु-से-वायु (air-to-air) दोनों मोड में किया गया, जो आत्मनिर्भर भारत पहल के अंतर्गत भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
यूएलपीजीएम - वी3 के बारे में:
-
-
- यूएलपीजीएम - वी3 का पूरा नाम “अनमैन्ड एरियल व्हीकल लॉन्च्ड प्रिसिजन गाइडेड मिसाइल-V3” है। यह भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित एक स्वदेशी मिसाइल प्रणाली है।
- यह एक हल्की, सटीक-निर्देशित (precision-guided) मिसाइल है, जिसे ड्रोन और मानव रहित हवाई वाहनों (UAVs) से प्रक्षेपित करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह मिसाइल उच्च सटीकता के साथ भूमि तथा हवाई दोनों प्रकार के लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम है।
- इसका नवीनतम V3 संस्करण, पूर्ववर्ती ULPGM-V2 प्रणाली का उन्नत रूप है, जिसमें बेहतर सीकर (seekers), मॉड्यूलर वारहेड तथा अधिक परिचालन लचीलापन जैसी विशेषताएँ शामिल हैं।
- यूएलपीजीएम - वी3 का पूरा नाम “अनमैन्ड एरियल व्हीकल लॉन्च्ड प्रिसिजन गाइडेड मिसाइल-V3” है। यह भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित एक स्वदेशी मिसाइल प्रणाली है।
-
ULPGM-V3 की प्रमुख विशेषताएँ:
-
-
- ULPGM-V3 में कई उन्नत तकनीकों को शामिल किया गया है, जो इसकी युद्धक क्षमता को अत्यधिक बढ़ाती हैं। इनमें शामिल हैं:
- हाई-डेफिनिशन ड्यूल-चैनल सीकर
- दिन और रात दोनों समय संचालन की क्षमता
- “फायर-एंड-फॉरगेट” लक्ष्यभेदन क्षमता
- द्वि-दिशीय (Two-way) डेटा लिंक
- प्रक्षेपण के बाद लक्ष्य अद्यतन प्रणाली (Post-launch target update system)
- एकीकृत ग्राउंड कंट्रोल सिस्टम (GCS)
- हाई-डेफिनिशन ड्यूल-चैनल सीकर
- ड्यूल-चैनल सीकर मिसाइल को विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों में लक्ष्यों का अधिक प्रभावी ढंग से पीछा करने में सक्षम बनाता है। वहीं, टू-वे डेटा लिंक ऑपरेटरों को प्रक्षेपण के बाद भी लक्ष्य संबंधी जानकारी अपडेट करने की सुविधा देता है, जिससे युद्धक्षेत्र में लचीलापन बढ़ता है।
- ULPGM-V3 में कई उन्नत तकनीकों को शामिल किया गया है, जो इसकी युद्धक क्षमता को अत्यधिक बढ़ाती हैं। इनमें शामिल हैं:
-
“फायर-एंड-फॉरगेट” क्षमता के बारे में:
-
-
- “फायर-एंड-फॉरगेट” मिसाइल वह होती है, जो प्रक्षेपण के बाद बिना निरंतर मानव मार्गदर्शन के स्वयं अपने लक्ष्य का पीछा कर उसे नष्ट कर सकती है।
- जब ULPGM-V3 किसी लक्ष्य पर लॉक होकर UAV से प्रक्षेपित की जाती है, तो उसके बाद मिसाइल की ऑनबोर्ड मार्गदर्शन प्रणाली नियंत्रण संभाल लेती है। इससे प्रक्षेपण करने वाला ड्रोन शत्रु क्षेत्र से तेजी से अपनी स्थिति बदल सकता है या पीछे हट सकता है, जिससे युद्ध अभियानों के दौरान उसकी जीवित रहने की संभावना बढ़ जाती है।
- “फायर-एंड-फॉरगेट” मिसाइल वह होती है, जो प्रक्षेपण के बाद बिना निरंतर मानव मार्गदर्शन के स्वयं अपने लक्ष्य का पीछा कर उसे नष्ट कर सकती है।
-
परिचालन और रणनीतिक उपयोग:
-
-
- ULPGM-V3 को एक बहु-भूमिका (multi-role) हथियार प्रणाली के रूप में डिजाइन किया गया है, जो निम्नलिखित लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम है:
- शत्रु के टैंक और बख्तरबंद वाहन
- बंकर और मजबूत किलेबंद संरचनाएँ
- हेलीकॉप्टर
- ड्रोन और निम्न-उड़ान वाले हवाई खतरे
- उच्च-मूल्य वाले सामरिक लक्ष्य
- शत्रु के टैंक और बख्तरबंद वाहन
- इस मिसाइल में मॉड्यूलर वारहेड्स का उपयोग किया गया है, जिसका अर्थ है कि मिशन की आवश्यकताओं के अनुसार विभिन्न प्रकार के वारहेड चुने जा सकते हैं। इनमें शामिल हैं:
- एंटी-आर्मर वारहेड
- बंकरों के लिए पेनेट्रेशन-कम-ब्लास्ट वारहेड
- व्यापक घातक क्षेत्र के लिए प्री-फ्रैगमेंटेशन वारहेड
- एंटी-आर्मर वारहेड
- ULPGM-V3 को एक बहु-भूमिका (multi-role) हथियार प्रणाली के रूप में डिजाइन किया गया है, जो निम्नलिखित लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम है:
-
महत्व:
-
-
- यह मिसाइल भारत को एक शक्तिशाली स्वदेशी प्रिसिजन-स्ट्राइक हथियार प्रदान करती है, जो आधुनिक युद्धक्षेत्रों के लिए उपयुक्त है। इससे निम्न क्षमताएँ मजबूत होती हैं:
- सामरिक ड्रोन युद्ध क्षमता
- सटीक हमले (Precision Strike) अभियान
- एंटी-आर्मर युद्ध क्षमता
- सीमा निगरानी और स्ट्राइक तैयारी
- ड्रोन और हेलीकॉप्टर के विरुद्ध वायु रक्षा क्षमता
- सामरिक ड्रोन युद्ध क्षमता
- मानवरहित हवाई वाहनों (UAVs) से सटीक-निर्देशित मिसाइलों का प्रक्षेपण विशेष रूप से उन उच्च-जोखिम वाले क्षेत्रों में उपयोगी है जहाँ मानवयुक्त विमान अधिक खतरे में हो सकते हैं। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार ULPGM-V3 भारत के नेटवर्क-सेंट्रिक और अनमैन्ड वारफेयर सिस्टम की ओर बढ़ते कदम का हिस्सा है।
- यह मिसाइल भारत को एक शक्तिशाली स्वदेशी प्रिसिजन-स्ट्राइक हथियार प्रदान करती है, जो आधुनिक युद्धक्षेत्रों के लिए उपयुक्त है। इससे निम्न क्षमताएँ मजबूत होती हैं:
-
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के बारे में:
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन भारत की प्रमुख रक्षा अनुसंधान एजेंसी है, जो रक्षा मंत्रालय के अधीन 1958 में स्थापित की गई थी। यह पूरे देश में प्रयोगशालाओं के बड़े नेटवर्क का संचालन करती है और स्वदेशी सैन्य तकनीकों के विकास में केंद्रीय भूमिका निभाती है।
DRDO का उद्देश्य:
-
-
- उन्नत रक्षा प्रणालियों का डिजाइन और विकास
- महत्वपूर्ण सैन्य तकनीकों में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना
- रक्षा उपकरणों में आयात पर निर्भरता कम करना
- भारत की रणनीतिक और तकनीकी स्वायत्तता को मजबूत करना
- उन्नत रक्षा प्रणालियों का डिजाइन और विकास
-
निष्कर्ष:
ULPGM-V3 के परीक्षण भारत की स्वदेशी प्रिसिजन स्ट्राइक क्षमता और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। UAV प्लेटफॉर्म को उन्नत मिसाइल प्रणालियों और मजबूत घरेलू औद्योगिक आधार के साथ जोड़कर भारत अगली पीढ़ी की युद्ध तैयारी की ओर बढ़ रहा है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और निर्यात क्षमता दोनों मजबूत हो रहे हैं।
