संदर्भ:
हाल ही में, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 5 नवंबर 2026 को स्वदेशी रूप से विकसित प्रलय अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल (Quasi-Ballistic Missile) का सफल उड़ान परीक्षण किया। परीक्षण के सभी निर्धारित उद्देश्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त किया गया, जिससे इसे शीघ्र ही सशस्त्र बलों में शामिल किए जाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
प्रलय मिसाइल क्या है?
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- प्रलय DRDO द्वारा विकसित एक स्वदेशी, ठोस प्रणोदक (Solid-Propellant) आधारित सतह-से-सतह पर मार करने वाली अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल है। इसे दुश्मन के सैन्य ठिकानों, हवाई अड्डों, कमान केंद्रों और अन्य रणनीतिक लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए विकसित किया गया है। इसकी अनुमानित परिचालन सीमा लगभग 150–500 किमी है। यह विभिन्न प्रकार के पारंपरिक वारहेड ले जाने में सक्षम है तथा उच्च सटीकता सुनिश्चित करने के लिए उन्नत मार्गदर्शन एवं नेविगेशन प्रणालियों का उपयोग करती है। इसे मोबाइल लॉन्च प्लेटफॉर्म के माध्यम से तैनात करने के लिए भी डिजाइन किया गया है।
- प्रलय मिसाइल का विकास हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) द्वारा DRDO की अन्य प्रयोगशालाओं के सहयोग से किया गया है। इसकी विकास परियोजना को मार्च 2015 में मंजूरी दी गई थी तथा इसका पहला उड़ान परीक्षण दिसंबर 2021 में किया गया था। भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) इसके विकास-सह-उत्पादन भागीदारों में शामिल हैं।
- प्रलय DRDO द्वारा विकसित एक स्वदेशी, ठोस प्रणोदक (Solid-Propellant) आधारित सतह-से-सतह पर मार करने वाली अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल है। इसे दुश्मन के सैन्य ठिकानों, हवाई अड्डों, कमान केंद्रों और अन्य रणनीतिक लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए विकसित किया गया है। इसकी अनुमानित परिचालन सीमा लगभग 150–500 किमी है। यह विभिन्न प्रकार के पारंपरिक वारहेड ले जाने में सक्षम है तथा उच्च सटीकता सुनिश्चित करने के लिए उन्नत मार्गदर्शन एवं नेविगेशन प्रणालियों का उपयोग करती है। इसे मोबाइल लॉन्च प्लेटफॉर्म के माध्यम से तैनात करने के लिए भी डिजाइन किया गया है।
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अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल क्या है?
पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों के विपरीत, जो अपेक्षाकृत पूर्वानुमानित प्रक्षेप पथ (Trajectory) का अनुसरण करती हैं, अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइलें अपेक्षाकृत कम ऊँचाई और समतल उड़ान पथ का अनुसरण करती हैं तथा इनमें दिशा बदलने (Manoeuvring) की क्षमता होती है। इससे इनके प्रक्षेप पथ का पूर्वानुमान लगाना कठिन हो जाता है और दुश्मन की मिसाइल रक्षा प्रणालियों के सामने चुनौती उत्पन्न होती है। इस प्रकार, प्रलय भारत की सटीक प्रहार क्षमता को मजबूत करती है।
भारत के लिए रणनीतिक महत्त्व:
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- प्रलय मिसाइल प्रभावी सटीक प्रहार क्षमता प्रदान करके भारत की पारंपरिक प्रतिरोधक क्षमता (Conventional Deterrence) को मजबूत करती है। यह भारतीय थल सेना और भारतीय वायु सेना की परिचालन तैयारियों को बेहतर बनाती है तथा उभरते सुरक्षा खतरों के प्रति प्रतिक्रिया देने में लचीलापन प्रदान करती है।
- इसका स्वदेशी विकास विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करता है तथा घरेलू रक्षा विनिर्माण, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देता है। इसके अतिरिक्त, यह क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को भी मजबूत करती है।
- प्रलय मिसाइल प्रभावी सटीक प्रहार क्षमता प्रदान करके भारत की पारंपरिक प्रतिरोधक क्षमता (Conventional Deterrence) को मजबूत करती है। यह भारतीय थल सेना और भारतीय वायु सेना की परिचालन तैयारियों को बेहतर बनाती है तथा उभरते सुरक्षा खतरों के प्रति प्रतिक्रिया देने में लचीलापन प्रदान करती है।
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निष्कर्ष:
प्रलय मिसाइल का सफल परीक्षण भारत के स्वदेशी रक्षा विकास की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया के उद्देश्यों को आगे बढ़ाता है। रणनीतिक स्वायत्तता प्राप्त करने और भारत को तकनीकी रूप से उन्नत रक्षा शक्ति के रूप में स्थापित करने के लिए रक्षा अनुसंधान एवं नवाचार में निरंतर निवेश आवश्यक है।
