होम > Blog

Blog / 02 Jan 2026

प्रलय मिसाइल

संदर्भ:

हाल ही में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने ओडिशा तट के समीप एक ही लॉन्चर से बहुत कम समय के अंतराल में प्रलय मिसाइलों के दो सफल सल्वो प्रक्षेपण किए। यह परीक्षण उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षणों के अंतर्गत किया गया, जिसने इस प्रणाली की संचालन क्षमता और मजबूती को स्पष्ट रूप से सिद्ध किया।

प्रलय मिसाइल के बारे में:

प्रलय एक स्वदेशी रूप से विकसित, ठोस ईंधन आधारित, अर्ध-बैलिस्टिक सरफेस-टू-सरफेस मिसाइल है। इसे पारंपरिक वारहेड के साथ उच्च सटीकता से सामरिक लक्ष्यों पर प्रहार करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। यह मिसाइल भारत की रक्षा प्रणाली में अल्प दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों और क्रूज़ मिसाइलों के बीच की क्षमता की कमी को प्रभावी रूप से पूरा करती है।

Pralay Missile

मुख्य विशेषताएँ:

      • प्रकार: अर्ध-बैलिस्टिक सरफेस-टू-सरफेस मिसाइल
      • प्रणोदन: दो-चरणीय ठोस ईंधन प्रणाली, जो त्वरित प्रक्षेपण क्षमता और उच्च परिचालन विश्वसनीयता प्रदान करती है।
      • उड़ान पथ: अर्ध-बैलिस्टिक प्रक्षेपवक्र, जिसमें उड़ान के दौरान मार्ग बदलने की क्षमता होती है, जिससे शत्रु की वायु रक्षा प्रणालियों द्वारा इसे रोकना कठिन हो जाता है।
      • मारक दूरी: लगभग 150 से 500 किलोमीटर, जो पेलोड विन्यास पर निर्भर करती है।
      • मार्गदर्शन प्रणाली: उन्नत नेविगेशन एवं मार्गदर्शन तंत्र, जो उच्च स्तर की लक्ष्य-सटीकता सुनिश्चित करता है।
      • वारहेड क्षमता: विभिन्न प्रकार के पारंपरिक वारहेड ले जाने में सक्षम, जिससे मिशन-आधारित परिचालन लचीलापन प्राप्त होता है।
      • सल्वो प्रक्षेपण क्षमता: एक ही लॉन्चर से कम समय के अंतराल में कई मिसाइलों का प्रक्षेपण, जिससे संतृप्ति प्रहार (Saturation Strike) की प्रभावशीलता बढ़ती है।

उद्देश्य और रणनीतिक लक्ष्य:

      • त्वरित सटीक हमला क्षमता: भारतीय सेना और वायुसेना को ऐसी पारंपरिक मिसाइल उपलब्ध कराना, जो कम समय में उच्च सटीकता के साथ महत्वपूर्ण सामरिक लक्ष्यों को नष्ट कर सके।
      • बेहतर सामरिक प्रतिरोधक क्षमता: पारंपरिक हथियारों के माध्यम से भरोसेमंद प्रतिरोधक शक्ति विकसित करना, जिससे परमाणु हथियारों पर निर्भरता कम हो सके।
      • संचालन तत्परता: एक ऐसी मोबाइल, भरोसेमंद और तेजी से तैनात की जा सकने वाली मिसाइल प्रणाली विकसित करना, जो तीव्र और उच्च-स्तरीय संघर्ष की स्थितियों में प्रभावी हो।

सल्वो परीक्षण का महत्व:

ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज में उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षणों के दौरान एक ही लॉन्चर से दो प्रलय मिसाइलों का सफल सल्वो प्रक्षेपण एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। दोनों मिसाइलों ने निर्धारित मार्ग का पालन किया और सभी मिशन उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया। इससे प्रणाली की विश्वसनीयता, सटीकता और सेवा में शामिल होने की तैयारी प्रमाणित हुई।

सल्वो परीक्षण क्यों महत्वपूर्ण है?

      • संचालन सत्यापन: वास्तविक परिस्थितियों में मिसाइल के प्रदर्शन की पुष्टि करता है, जिससे इसके शीघ्र सैन्य उपयोग का मार्ग प्रशस्त होता है।
      • मजबूत पारंपरिक प्रतिरोधक शक्ति: क्षेत्रीय खतरों के जवाब में भारत की पारंपरिक मिसाइल क्षमता को और अधिक प्रभावी बनाता है।
      • आत्मनिर्भर भारत: स्वदेशी मिसाइल विकास क्षमता को मजबूत करता है और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के राष्ट्रीय लक्ष्य को समर्थन देता है।

व्यापक रणनीतिक संदर्भ:

प्रलय मिसाइल भारत की सामरिक प्रहार क्षमताओं को गहराई और लचीलापन प्रदान करती है। यह ब्रह्मोस जैसी मिसाइल प्रणालियों का पूरक है और पारंपरिक हथियारों से लैस मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल की भूमिका निभाती है। इसका विकास भारत की विश्वसनीय प्रतिरोधक नीति, सटीक पारंपरिक युद्ध क्षमता और तकनीकी आत्मनिर्भरता की व्यापक रणनीति के अनुरूप है।

निष्कर्ष:

प्रलय मिसाइल का सफल सल्वो प्रक्षेपण भारत की उन्नत मिसाइल तकनीकी क्षमता को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करता है तथा देश की पारंपरिक प्रहार शक्ति को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ करता है। इसकी उच्च सटीकता, त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और परिचालन लचीलापन इसे भारत की सामरिक प्रतिरोधक संरचना का एक महत्वपूर्ण घटक बनाते हैं। सेवा में शामिल होने की दिशा में अग्रसर यह मिसाइल भारत की उभरती रक्षा निर्माण क्षमता और रणनीतिक आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रतीक है।