संदर्भ:
हाल के समय में, एनीमिया मुक्त भारत (AMB) के अंतर्गत भारत सरकार की संशोधित 7X7X7 रणनीति ने उन निवारक उपायों पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित किया है, जिनका अभी तक पर्याप्त उपयोग नहीं किया गया है। इनमें विशेष रूप से दोहरा फोर्टिफाइड नमक (DFS) शामिल है, जो आयरन की लगातार बनी रहने वाली कमी को दूर करने और एनीमिया कम करने के भारत के प्रयासों को मजबूत बनाने के लिए एक किफायती एवं व्यापक जनसंख्या तक पहुँच वाला समाधान है।
एनीमिया क्या है?
एनीमिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें हीमोग्लोबिन या स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं की पर्याप्त मात्रा नहीं होती, जिससे रक्त की ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता कम हो जाती है। आयरन की कमी इसका एक प्रमुख कारण है, हालाँकि फोलेट और विटामिन B12 की कमी, संक्रमण, रक्तस्राव तथा आनुवंशिक विकार भी इसमें योगदान देते हैं। एनीमिया मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, सीखने की क्षमता, आर्थिक उत्पादकता और समग्र मानव विकास को प्रभावित करता है।
दोहरा फोर्टिफाइड नमक (DFS) क्या है?
-
-
- DFS ऐसा खाद्य नमक है, जिसमें आयरन और आयोडीन दोनों मिलाए जाते हैं। आयरन हीमोग्लोबिन के निर्माण में सहायता करता है और आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया की रोकथाम में मदद करता है, जबकि आयोडीन की कमी से होने वाले घेंघा रोग और मस्तिष्क एवं तंत्रिका तंत्र के विकास में होने वाली बाधाओं जैसे विकारों को रोकने में सहायक होता है।
- चूँकि विभिन्न आय वर्गों और भौगोलिक क्षेत्रों में नमक का नियमित रूप से सेवन किया जाता है, इसलिए DFS पूरक पोषण और आहार विविधता के साथ-साथ बड़े स्तर पर सूक्ष्म पोषक तत्त्वों की आपूर्ति का एक व्यावहारिक माध्यम प्रदान करता है।
- DFS ऐसा खाद्य नमक है, जिसमें आयरन और आयोडीन दोनों मिलाए जाते हैं। आयरन हीमोग्लोबिन के निर्माण में सहायता करता है और आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया की रोकथाम में मदद करता है, जबकि आयोडीन की कमी से होने वाले घेंघा रोग और मस्तिष्क एवं तंत्रिका तंत्र के विकास में होने वाली बाधाओं जैसे विकारों को रोकने में सहायक होता है।
-
DFS की संभावनाएँ और महत्त्व:
-
-
- भारत का सार्वभौमिक नमक आयोडीनीकरण कार्यक्रम इस दिशा में एक स्थापित आधार प्रदान करता है, जिसके अंतर्गत लगभग 95% परिवार आयोडीन युक्त नमक का सेवन करते हैं। बताया जाता है कि सरकारी सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों के माध्यम से चार राज्यों में लगभग 7.6 करोड़ लोगों तक DFS पहुँच रहा है।
- बेंगलुरु, दार्जिलिंग और पंजाब में किए गए परीक्षणों के साक्ष्य तथा उत्तर प्रदेश में इसके कार्यान्वयन के अनुभव से संकेत मिलता है कि उपयुक्त फॉर्मूलेशन का उपयोग करने पर आयरन की स्थिति और उपभोक्ताओं की स्वीकार्यता में सुधार हो सकता है। लेख में उद्धृत एक वैश्विक समीक्षा के अनुसार, DFS एनीमिया में 21% तक की कमी ला सकता है।
- प्रति व्यक्ति लगभग ₹14–₹20 की अनुमानित वार्षिक लागत के साथ DFS एक किफायती निवारक उपाय है। मौजूदा नमक प्रसंस्करण सुविधाएँ, फोर्टिफिकेशन तकनीकें और प्रयोगशाला संबंधी बुनियादी ढाँचा बड़े पैमाने पर उत्पादन तथा गुणवत्ता की निगरानी को सुगम बना सकते हैं।
- भारत का सार्वभौमिक नमक आयोडीनीकरण कार्यक्रम इस दिशा में एक स्थापित आधार प्रदान करता है, जिसके अंतर्गत लगभग 95% परिवार आयोडीन युक्त नमक का सेवन करते हैं। बताया जाता है कि सरकारी सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों के माध्यम से चार राज्यों में लगभग 7.6 करोड़ लोगों तक DFS पहुँच रहा है।
-
मौजूदा नियामक और संस्थागत ढाँचा:
-
-
- भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) DFS सहित फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों के लिए लागू मानक निर्धारित करता है। एनीमिया मुक्त भारत रणनीति 7X7X7 दृष्टिकोण पर आधारित है, जिसमें सात लाभार्थी समूह, सात हस्तक्षेप और सात संस्थागत तंत्र शामिल हैं। PM POSHAN और आंगनवाड़ी सेवाएँ बच्चों एवं माताओं के पोषण में सुधार के लिए महत्त्वपूर्ण मंच प्रदान करती हैं।
- सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) कमजोर परिवारों तक किफायती DFS की पहुँच बढ़ाने का एक अतिरिक्त अवसर प्रदान करती है। हालाँकि, इसकी खरीद और कार्यान्वयन से संबंधित सटीक आवश्यकताओं की पुष्टि वर्तमान कार्यक्रम दिशा-निर्देशों से की जानी चाहिए।
- भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) DFS सहित फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों के लिए लागू मानक निर्धारित करता है। एनीमिया मुक्त भारत रणनीति 7X7X7 दृष्टिकोण पर आधारित है, जिसमें सात लाभार्थी समूह, सात हस्तक्षेप और सात संस्थागत तंत्र शामिल हैं। PM POSHAN और आंगनवाड़ी सेवाएँ बच्चों एवं माताओं के पोषण में सुधार के लिए महत्त्वपूर्ण मंच प्रदान करती हैं।
-
प्रमुख चुनौतियाँ और बाधाएँ:
-
-
- DFS को व्यापक स्तर पर अपनाने में प्रमुख बाधाएँ संस्थागत और परिचालन संबंधी हैं। PDS में DFS का एकीकरण अभी भी असमान है, क्योंकि इसका कार्यान्वयन, वित्तपोषण और खरीद काफी हद तक राज्य स्तर के निर्णयों पर निर्भर करते हैं। खुदरा बाजार में सीमित उपलब्धता और अधिक कीमत के कारण परिवारों की पहुँच प्रभावित हो सकती है।
- अनुचित फॉर्मूलेशन या पैकेजिंग से नमक का रंग बदल सकता है और उसका स्वाद अप्रिय हो सकता है, जबकि नमी तथा रासायनिक अंतःक्रियाएँ पोषक तत्त्वों की स्थिरता को प्रभावित कर सकती हैं।
- जनस्वास्थ्य संबंधी जागरूकता में नमक के सेवन को कम करने के महत्त्व और फोर्टिफिकेशन के बीच संतुलन बनाए रखना भी आवश्यक है। साथ ही, थैलेसीमिया और सिकल सेल रोग जैसे हीमोग्लोबिन संबंधी आनुवंशिक विकारों की उचित चिकित्सकीय जाँच सुनिश्चित की जानी चाहिए।
- DFS को व्यापक स्तर पर अपनाने में प्रमुख बाधाएँ संस्थागत और परिचालन संबंधी हैं। PDS में DFS का एकीकरण अभी भी असमान है, क्योंकि इसका कार्यान्वयन, वित्तपोषण और खरीद काफी हद तक राज्य स्तर के निर्णयों पर निर्भर करते हैं। खुदरा बाजार में सीमित उपलब्धता और अधिक कीमत के कारण परिवारों की पहुँच प्रभावित हो सकती है।
-
निष्कर्ष:
दोहरा फोर्टिफाइड नमक भारत को आयरन और आयोडीन की कमी से निपटने का एक किफायती एवं व्यापक स्तर पर लागू किया जा सकने वाला अवसर प्रदान करता है। सार्वभौमिक नमक आयोडीनीकरण की सफलता के आधार पर, देशभर में DFS को अपनाने से एनीमिया मुक्त भारत के लक्ष्यों और विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण की दिशा में प्रगति तेज हो सकती है। इसकी तकनीकी संभावनाओं को वास्तविक जनस्वास्थ्य लाभ में बदलने के लिए मजबूत राजनीतिक प्रतिबद्धता, पर्याप्त वित्तपोषण, गुणवत्ता आश्वासन और अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी वितरण आवश्यक हैं।

