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Blog / 23 May 2026

भारत में जनांकिकीय संक्रमण और SRS 2024 रिपोर्ट

भारत में जनांकिकीय संक्रमण और SRS 2024 रिपोर्ट

संदर्भ:

हाल ही में भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय द्वारा सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) सांख्यिकीय रिपोर्ट 2024 जारी की गई है। यह रिपोर्ट दर्शाती है कि भारत तीव्र जनांकिकीय संक्रमण (Demographic Transition) के दौर से गुजर रहा है।

SRS 2024 रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:

कुल प्रजनन दर:

भारत की कुल प्रजनन दर घटकर 1.9 हो गई है, जो यह संकेत देती है कि देश धीरे-धीरे निम्न प्रजनन वाले समाज की ओर बढ़ रहा है। यह प्रतिस्थापन स्तर 2.1 से नीचे है।

अशोधित जन्म दर:

देश की जन्म दर में निरंतर गिरावट दर्ज की गई है।
एक दशक पहले यह 21 थी, जो अब घटकर 18.3 प्रति 1,000 जनसंख्या हो गई है।
ग्रामीण क्षेत्रों (20.2) की तुलना में शहरी क्षेत्रों (14.7) में जन्म दर काफी कम है।

शिशु मृत्यु दर:

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के कारण IMR घटकर 24 प्रति 1,000 जीवित जन्म हो गई है।
पिछले पाँच वर्षों में इसमें 6 अंकों की गिरावट दर्ज की गई है।

पाँच वर्ष से कम आयु मृत्यु दर:

देश में पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर घटकर 28 हो गई है।

अशोधित मृत्यु दर:

यह दर 6.4 प्रति 1,000 व्यक्ति पर स्थिर बनी हुई है।
हालाँकि, यह अभी भी कोविड-पूर्व स्तर से कुछ अधिक है।

जन्म के समय लिंगानुपात (Sex Ratio at Birth - SRB)

वर्ष 2022–24 के दौरान इसमें मामूली सुधार दर्ज किया गया है।
अब यह 918 लड़कियाँ प्रति 1,000 लड़कों तक पहुँच गया है।

Demographic Transition in India and the SRS 2024 Report

क्षेत्रीय असमानताएँ एवं राज्य स्तरीय विविधता:

भारत के विभिन्न राज्यों में जनांकिकीय परिवर्तन समान नहीं हैं।

अग्रणी राज्य

केरल और तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्य जनांकिकीय संक्रमण में अग्रणी हैं।
केरल में IMR केवल 8 है, जो देश में सबसे कम है।
तमिलनाडु में यह 11 दर्ज की गई है।

चुनौतीपूर्ण राज्य

मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सुधारों के बावजूद IMR 35 तथा U5MR 41 बनी हुई है।
बिहार एवं उत्तर भारत के कुछ अन्य राज्यों में TFR अभी भी राष्ट्रीय औसत से अधिक है।

यह क्षेत्रीय असमानता स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक विकास में अंतर को दर्शाती है।

जनांकिकीय संक्रमण का अर्थ:

जनांकिकीय संक्रमण वह प्रक्रिया है जिसमें किसी देश में:
जन्म दर और मृत्यु दर दोनों धीरे-धीरे कम होने लगते हैं
जनसंख्या वृद्धि दर धीमी पड़ जाती है
वृद्ध आबादी का अनुपात बढ़ने लगता है

भारत वर्तमान में इस संक्रमण के उन्नत चरण में प्रवेश कर रहा है।

प्रशासनिक एवं नीतिगत निहितार्थ:

जनांकिकीय लाभांश का संकट

TFR के 1.9 तक गिरने से भविष्य में कार्यशील आयु वर्ग की आबादी कम हो सकती है।
वृद्ध आबादी की निर्भरता बढ़ेगी
सामाजिक सुरक्षा पर दबाव बढ़ेगा
सरकार को कौशल विकास एवं रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान देना होगा

ग्रामीण-शहरी स्वास्थ्य असमानता

ग्रामीण क्षेत्रों में IMR (27) अभी भी शहरी क्षेत्रों (17) से अधिक है।
यह राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की आवश्यकता दर्शाता है।

वृद्धजन आबादी की चुनौती:

कम प्रजनन दर के कारण भविष्य में वृद्धजन आबादी तेजी से बढ़ेगी।
इसके लिए आवश्यक होगा:
पेंशन प्रणाली का विस्तार
जेरियाट्रिक स्वास्थ्य सेवाएँ
सामाजिक सुरक्षा ढाँचे का सुदृढ़ीकरण

सरकार की प्रमुख पहलें:

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM)
आयुष्मान भारत योजना
पोषण अभियान
मिशन इंद्रधनुष
जननी सुरक्षा योजना
राष्ट्रीय जनसंख्या नीति

इन पहलों ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

प्रमुख परिभाषाएँ एवं अवधारणाएँ:

      • शिशु मृत्यु दर (Infant Mortality Rate - IMR): एक वर्ष से कम आयु के बच्चों की प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर होने वाली मृत्यु की संख्या को शिशु मृत्यु दर कहा जाता है।
        यह स्वास्थ्य व्यवस्था एवं सामाजिक-आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण संकेतक है।
      • जन्म दर (Crude Birth Rate - CBR): एक वर्ष में प्रति 1,000 जनसंख्या पर होने वाले जीवित जन्मों की संख्या को जन्म दर कहा जाता है।
      • कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate - TFR): किसी महिला द्वारा अपने जीवनकाल में औसतन जन्म दिए जाने वाले बच्चों की संख्या को कुल प्रजनन दर कहा जाता है।
      • नवजात मृत्यु दर (Neonatal Mortality Rate - NMR): जन्म के 28 दिनों के भीतर शिशुओं की प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर होने वाली मृत्यु की संख्या को नवजात मृत्यु दर कहा जाता है।

निष्कर्ष:

SRS 2024 रिपोर्ट दर्शाती है कि भारत जनसंख्या स्थिरीकरण के चरण में प्रवेश कर चुका है। अब नीति निर्माताओं को स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, क्षेत्रीय असमानताओं में कमी, वृद्धजन आबादी की चुनौतियों तथा जनांकिकीय लाभांश के प्रभावी उपयोग पर ध्यान देना होगा, ताकि समावेशी एवं सतत विकास सुनिश्चित किया जा सके।

 

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