चर्चा में क्यों?
हाल ही में दिल्ली सरकार ने दिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नीति 2026 को मंजूरी दी है, जो स्वच्छ एवं टिकाऊ परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। इस नीति के तहत 31 मार्च 2028 के बाद नए पेट्रोल चालित मोटरसाइकिल और स्कूटरों का पंजीकरण नहीं किया जाएगा, जबकि दिसंबर 2026 के बाद नए सीएनजी ऑटो-रिक्शा का पंजीकरण भी बंद कर दिया जाएगा।
दिल्ली ईवी नीति 2026 के प्रमुख प्रावधान
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- 31 मार्च 2028 के बाद नए पेट्रोल चालित मोटरसाइकिल और स्कूटरों का पंजीकरण नहीं होगा।
- दिसंबर 2026 के बाद नए सीएनजी ऑटो-रिक्शा का पंजीकरण बंद कर दिया जाएगा।
- अप्रैल 2028 से पंजीकृत होने वाले सभी नए दोपहिया और तिपहिया वाहन केवल इलेक्ट्रिक होंगे।
- वर्ष 2030 तक दिल्ली के कुल वाहन बेड़े का 30% विद्युतीकरण (Electrification) करने का लक्ष्य।
- ईवी प्रोत्साहन और चार्जिंग अवसंरचना के विकास के लिए 15,000 करोड़ रुपये का प्रावधान।
- वाहन खरीद प्रोत्साहन (Purchase Incentives):
- 31 मार्च 2028 के बाद नए पेट्रोल चालित मोटरसाइकिल और स्कूटरों का पंजीकरण नहीं होगा।
1. इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन खरीदने पर 30,000 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि।
2. इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहन खरीदने पर 50,000 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि।
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- बीएस-IV तथा उससे पुराने वाहनों को कबाड़ (Scrap) करने पर विशेष प्रोत्साहन।
- स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वाहनों की तुलना में शुद्ध बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों (Battery Electric Vehicles- BEVs) को प्राथमिकता।
- बीएस-IV तथा उससे पुराने वाहनों को कबाड़ (Scrap) करने पर विशेष प्रोत्साहन।

सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को क्यों बढ़ावा दे रही है?
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- वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के अनुसार, सर्दियों के दौरान दिल्ली में PM2.5 प्रदूषण का लगभग 23% हिस्सा वाहनों से होने वाले उत्सर्जन के कारण होता है, जिससे परिवहन क्षेत्र शहर में वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा स्रोत बन जाता है।
- दिल्ली के कुल वाहनों में लगभग 67% हिस्सेदारी दोपहिया वाहनों की है। ऐसे में इनके विद्युतीकरण से प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। इसके साथ ही यह सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार, जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता में कमी तथा भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में भी सहायक होगा।
- वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के अनुसार, सर्दियों के दौरान दिल्ली में PM2.5 प्रदूषण का लगभग 23% हिस्सा वाहनों से होने वाले उत्सर्जन के कारण होता है, जिससे परिवहन क्षेत्र शहर में वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा स्रोत बन जाता है।
इलेक्ट्रिक वाहनों और सार्वजनिक परिवहन की भूमिका
इलेक्ट्रिक वाहन टेलपाइप (Exhaust Pipe) से कोई उत्सर्जन नहीं करते, जिससे PM2.5, नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx), कार्बन मोनोऑक्साइड तथा ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आती है।
हालांकि, केवल ईवी अपनाना पर्याप्त नहीं होगा। इसके साथ-साथ निम्नलिखित क्षेत्रों को भी सुदृढ़ करना आवश्यक है—
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- इलेक्ट्रिक बसों का विस्तार।
- मेट्रो नेटवर्क का विस्तार।
- साइकिल ट्रैक एवं गैर-मोटर चालित परिवहन को बढ़ावा।
- बेहतर लास्ट-माइल कनेक्टिविटी।
- इलेक्ट्रिक बसों का विस्तार।
इन उपायों से यातायात जाम और निजी वाहनों पर निर्भरता कम की जा सकेगी।
दिल्ली का वायु प्रदूषण:
दिल्ली में वायु प्रदूषण कई कारणों से लगातार गंभीर बना रहता है, जिनमें प्रमुख हैं-
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- वाहनों से होने वाला उत्सर्जन।
- सड़क एवं निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल।
- औद्योगिक गतिविधियाँ।
- बायोमास एवं कचरे का जलाना।
- पड़ोसी राज्यों में पराली जलाना।
- वाहनों से होने वाला उत्सर्जन।
सर्दियों के दौरान तापमान प्रतिलोमन (Temperature Inversion), कम हवा की गति तथा कोहरे जैसी मौसम संबंधी परिस्थितियाँ प्रदूषकों को पृथ्वी की सतह के निकट ही रोक देती हैं, जिससे वायु गुणवत्ता अत्यंत खराब हो जाती है।
भौगोलिक कारक और जनस्वास्थ्य पर प्रभाव
दिल्ली इंडो-गंगा के मैदान (Indo-Gangetic Plain) में स्थित एक स्थलरुद्ध (Landlocked) शहर है, जो हरियाणा और उत्तर प्रदेश से घिरा हुआ है।
समुद्री हवाओं का अभाव तथा वायुमंडलीय प्रदूषकों के कम प्रसार (Poor Atmospheric Dispersion) के कारण प्रदूषण लंबे समय तक बना रहता है।
प्रदूषित वायु के लंबे समय तक संपर्क में रहने से—
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- अस्थमा,
- दीर्घकालिक श्वसन रोग,
- हृदय संबंधी रोग,
- तथा समय से पहले मृत्यु (Premature Death)
- अस्थमा,
जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। विशेष रूप से बच्चे और बुजुर्ग इसके प्रति सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं।
संस्थाओं और प्रौद्योगिकी की भूमिका:
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) तथा वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) वायु गुणवत्ता की निगरानी तथा प्रदूषण नियंत्रण उपायों के समन्वय का कार्य करते हैं।
प्रदूषण नियंत्रण एवं नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए निम्नलिखित तकनीकों का उपयोग महत्वपूर्ण हो सकता है-
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- रियल-टाइम वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणाली।
- उपग्रह आधारित निगरानी।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान।
- स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन प्रणाली।
- रियल-टाइम वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणाली।
निष्कर्ष:
दिल्ली ईवी नीति 2026 टिकाऊ एवं स्वच्छ शहरी परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। यद्यपि इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देकर परिवहन क्षेत्र से होने वाले प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है, लेकिन दिल्ली की वायु गुणवत्ता में स्थायी सुधार के लिए स्वच्छ सार्वजनिक परिवहन, प्रभावी नियामकीय प्रवर्तन, क्षेत्रीय सहयोग, आधुनिक प्रौद्योगिकी तथा नागरिकों की सक्रिय भागीदारी को समान रूप से बढ़ावा देना आवश्यक होगा।
