संदर्भ:
दिल्ली सरकार ने 'महामारी रोग अधिनियम, 1897' के तहत रेबीज को एक अधिसूचित रोग (Notifiable Disease) घोषित करने का निर्णय लिया है। इस कदम का उद्देश्य रोग की निगरानी को मजबूत करना, समय पर रिपोर्टिंग सुनिश्चित करना और बचाव योग्य बीमारी का त्वरित उपचार सुलभ कराना है।
रेबीज के विषय में:
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- रेबीज एक विषाणु जनित ज़ूनोटिक बीमारी है, जिसका प्रसार मुख्य रूप से संक्रमित कुत्तों के काटने अथवा उनके लार के संपर्क में आने से होता है। इस रोग की सबसे गंभीर चुनौती इसकी उच्च मृत्यु दर है। वस्तुतः एक बार नैदानिक लक्षण (Clinical Symptoms) प्रकट होने के पश्चात यह बीमारी लगभग हमेशा घातक सिद्ध होती है।
- हालांकि, चिकित्सकीय दृष्टिकोण से यह पूरी तरह निवारण योग्य है, बशर्ते पीड़ित को समय पर 'पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस' (PEP) यानी उचित टीकाकरण और उपचार उपलब्ध कराया जाए। दिल्ली सरकार द्वारा इसे अधिसूचित रोग घोषित करने का निर्णय भारत के उस व्यापक रणनीतिक लक्ष्य के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य एकीकृत स्वास्थ्य प्रयासों के माध्यम से कुत्तों द्वारा होने वाली मानवीय रेबीज मौतों को पूर्णतः समाप्त करना है।
- रेबीज एक विषाणु जनित ज़ूनोटिक बीमारी है, जिसका प्रसार मुख्य रूप से संक्रमित कुत्तों के काटने अथवा उनके लार के संपर्क में आने से होता है। इस रोग की सबसे गंभीर चुनौती इसकी उच्च मृत्यु दर है। वस्तुतः एक बार नैदानिक लक्षण (Clinical Symptoms) प्रकट होने के पश्चात यह बीमारी लगभग हमेशा घातक सिद्ध होती है।
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पृष्ठभूमि:
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- भारत में कमजोर निगरानी प्रणाली के कारण ऐतिहासिक रूप से रेबीज के मामलों की रिपोर्टिंग बहुत कम रही है, जिसके परिणामस्वरूप डेटा में कमी और चिकित्सा हस्तक्षेप में देरी होती रही है। वर्तमान में एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) और रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन (RIG) की उपलब्धता के बावजूद, कई पीड़ित समय पर उपचार नहीं करा पाते, जिससे ऐसी मौतें होती हैं जिन्हें उचित समय पर रोका जा सकता था।
- अब रेबीज को अधिसूचित रोग घोषित करने से सभी सार्वजनिक और निजी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए यह कानूनी रूप से अनिवार्य हो जाएगा कि वे संदिग्ध, संभावित और पुष्ट मामलों की रिपोर्ट निर्दिष्ट अधिकारियों को दें। यह कदम न केवल सटीक डेटा संग्रह और त्वरित सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिक्रिया सुनिश्चित करेगा, बल्कि उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करके मृत्यु दर को कम करने में भी निर्णायक सिद्ध होगा।
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इस निर्णय के मुख्य प्रावधान:
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- अधिसूचना लागू होने के बाद, दिल्ली के सभी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को मानवीय रेबीज के हर मामले की सूचना तुरंत उचित अधिकारियों को देनी होगी।
- रिपोर्टिंग तंत्र को 'एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम' (IDSP) के साथ जोड़ा जाएगा ताकि रियल-टाइम निगरानी और रुझानों का विश्लेषण किया जा सके।
- वर्तमान में, दिल्ली 59 स्वास्थ्य सुविधाओं में एंटी-रेबीज टीके और 33 केंद्रों पर रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन प्रदान करती है। सरकार 'रेबीज उन्मूलन के लिए राज्य कार्य योजना' (SAPRE) को लागू करने की योजना बना रही है, जो "वन हेल्थ" (One Health) दृष्टिकोण अपनाती है। इसमें सार्वजनिक स्वास्थ्य, पशु चिकित्सा सेवाओं और स्थानीय निकायों को एक साथ जोड़ा जाएगा।
- अधिसूचना लागू होने के बाद, दिल्ली के सभी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को मानवीय रेबीज के हर मामले की सूचना तुरंत उचित अधिकारियों को देनी होगी।
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महामारी रोग अधिनियम, 1897 के बारे में:
यह औपनिवेशिक काल का कानून है जिसे 4 फरवरी, 1897 को शुरू में बॉम्बे में ब्यूबोनिक प्लेग को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया था। यह अधिनियम राज्य सरकारों को महामारी के दौरान असाधारण कदम उठाने का अधिकार देता है, जिसमें सार्वजनिक व्यवहार पर नियम जारी करना, निरीक्षण करना, क्वारंटाइन लागू करना और रोकथाम की रणनीतियां बनाना शामिल है।
महत्व:
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- सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी: अनिवार्य अधिसूचना से मजबूत महामारी विज्ञान डेटा प्राप्त होगा, जिससे साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और संसाधनों का कुशल आवंटन संभव होगा।
- समय पर उपचार: त्वरित रिपोर्टिंग से PEP (टीकाकरण) का जल्दी प्रशासन सुनिश्चित होगा, जो मृत्यु को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है।
- उन्मूलन लक्ष्य: यह उपाय राष्ट्रीय और वैश्विक लक्ष्यों का समर्थन करता है ताकि एकीकृत टीकाकरण और जन जागरूकता के माध्यम से रेबीज को समाप्त किया जा सके।
- सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी: अनिवार्य अधिसूचना से मजबूत महामारी विज्ञान डेटा प्राप्त होगा, जिससे साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और संसाधनों का कुशल आवंटन संभव होगा।
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चुनौतियाँ:
निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं से नियमों का पालन कराना, टीकों और RIG की निरंतर आपूर्ति बनाए रखना और पशु के काटने पर तुरंत रिपोर्ट करने के प्रति जन जागरूकता बढ़ाना बड़ी चुनौतियाँ हैं।
निष्कर्ष:
दिल्ली में मानवीय रेबीज को अधिसूचित रोग घोषित करना एक सक्रिय और निवारक सार्वजनिक स्वास्थ्य कदम है। यह रोग की निगरानी को मजबूत करता है, त्वरित चिकित्सा और प्रशासनिक प्रतिक्रिया को सक्षम बनाता है और रोकी जा सकने वाली मौतों को कम करता है। यह निर्णय साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

